Moral Stories In Hindi

नैतिक कहानियाँ | Moral Stories in Hindi

नैतिक कहानी का सबसे पुराना नियम यही है कि सीख कहानी के बाद न आए, कहानी के भीतर से निकले। इस पन्ने पर जो बयालीस नैतिक कहानियाँ हैं, उनमें कहीं आख़िर में यह लिखा नहीं मिलेगा कि इससे हमें क्या सीख मिली। जो मिलना है वह पढ़ते-पढ़ते मिल जाता है, और अगर नहीं मिलता तो कमी कहानी की है, पढ़ने वाले की नहीं।

यहाँ की कहानियाँ बड़े उपदेशों से नहीं, छोटी-छोटी बातों से बनी हैं। जालोर के एक रेतीले खेत में लगे ग्यारह अनार। समिति के गोदाम से चुपचाप निकल गया यूरिया। बग़ल वाली दुकान का अचानक दाम गिरा देना। रीवा की आठ फ़ुट चौड़ी एक दुकान। इन कहानियों के लोग बड़े लोग नहीं हैं और उनके फ़ैसले भी बाहर से बड़े नहीं दिखते, पर उन्हीं फ़ैसलों पर उनका आगे का पूरा जीवन टिका होता है। यही इन Moral Stories in Hindi (कई पाठक इन्हें Moral Story in Hindi लिखकर भी ढूँढ़ते हैं) का ढंग है।

ये किसके लिए हैं। कुछ कहानियाँ छोटी और सीधी हैं, जिन्हें स्कूल जाने वाले बच्चे ख़ुद पढ़ सकते हैं या घर में सुनाई जा सकती हैं। कुछ बड़ी उम्र के पाठकों के लिए हैं, जहाँ मामला इतना साफ़ नहीं होता कि कौन सही है और कौन ग़लत, और जहाँ सही काम करने की क़ीमत भी चुकानी पड़ती है। दोनों तरह की कहानियाँ यहाँ जान-बूझकर रखी गई हैं, क्योंकि नैतिक कहानियाँ सिर्फ़ बच्चों की चीज़ नहीं होतीं।

शुरुआत के लिए तीन नाम। मेहनत का मीठा फल, जिसमें ग्यारह साल की मेहनत का हिसाब एक ही मौसम में हो जाता है। सच्चाई की ताकत, जहाँ सच बोलने का दाम गिनकर चुकाना पड़ता है। और नन्ही पीया की उड़ान, गाँव की उस पहली लड़की की कहानी जो रोज़ बस पकड़कर क़स्बे तक पढ़ने जाती थी। तीनों अलग तरह की हैं और तीनों बिना उपदेश के ख़त्म होती हैं।

यहाँ की सारी कहानियाँ मौलिक हैं और इसी साइट के लिए लिखी गई हैं। कहीं और से ली हुई या अनुवाद की हुई नहीं।

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