Mythological Stories In Hindi

पौराणिक कहानियाँ | Mythological Stories In Hindi

ये किस्से पुराने हैं और इन्हें यहाँ दोबारा लिखा गया है। ध्रुव, प्रह्लाद, एकलव्य, नचिकेता, श्रवण — इनके साथ जो हुआ, वह वही है जो सदियों से चला आ रहा है। उसमें हमने कुछ जोड़ा नहीं और कुछ बदला नहीं।

जो हमारा है वह यह है कि कहानी किसकी आँख से देखी जा रही है। बाक़ी हर जगह ये ऊपर से सुनाए जाते हैं — सिंहासन से, आकाश से, ऋषि के आसन से। इसीलिए वे सब एक जैसे पढ़े जाते हैं। यहाँ इन्हें वह देख रहा है जो पास खड़ा था और जिसका अपना कुछ दाँव पर लगा था। जो रसोई में सफ़र का खाना बाँध रहा था। जो घोड़े की रास पकड़े खड़ा था। जो नाव चलाता था और जिसे उसी रात तय करना था कि वह नाव खोले या नहीं।

इसलिए हर कहानी में दो चीज़ें साथ-साथ चलती हैं। एक वह, जो हो रहा है और जिसे सब पहले से जानते हैं। दूसरी वह, जो उस देखने वाले के अपने दिन में हो रहा है — उसका काम, उसका डर, उसका अपना फ़ैसला जो उसे उसी शाम लेना है। पहली वाली आपको सौ जगह मिलेगी। दूसरी कहीं नहीं मिलेगी।

इनमें राजा भी हैं और राजा के यहाँ बर्तन माँजने वाले भी। युद्ध हैं, पर मैदान के किनारे से देखे गए। तपस्या है, पर उस आदमी की नज़र से जो रोज़ उसी रास्ते से गुज़रता था और जिसे लगता था कि यह बच्चा भूख से मर जाएगा।

यहाँ जो नहीं है, वह भी बता देना ठीक रहेगा। अंत में लिखी हुई कोई सीख नहीं है। कोई यह नहीं बताता कि किस काम से क्या मिलता है। और यह दावा कहीं नहीं किया गया कि यह सब सचमुच हुआ था। ये कहानियाँ हैं और कहानियों की तरह पढ़ी जानी चाहिए।

इन्हें पौराणिक कथा, Pauranik Kahaniyan और Mythological Stories In Hindi, तीनों नामों से खोजा जाता है।

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