Dadi Nani Ki Kahaniya

दादी-नानी की कहानियाँ | Dadi Nani Ki Kahaniya

ये उसी पुरानी बनावट की कहानियाँ हैं जो घरों में सुनाई जाती थीं। तीन बार दी गई एक परीक्षा। एक सौदा जिसमें एक शर्त छिपी थी। सबसे छोटा भाई जो सबसे पहले समझ गया। एक बोलने वाला जानवर जिसकी बात किसी ने नहीं सुनी। किस्से नए हैं, ढाँचा वही है।

इनमें सुनाने वाले की आवाज़ है, पर सुनाने वाला किरदार नहीं है। बीच में कोई बात सीधे तुमसे कही जाती है। कोई ब्यौरा दो बार आता है, क्योंकि कहने वाले को वह अच्छा लगता है। कहीं बात भटकती है और फिर वही भटकी बात आगे काम आती है।

यहाँ राजा हैं, सौदागर हैं, बुनकर हैं, और वे जानवर भी हैं जो पंचतंत्र में नहीं आते। जो नहीं है वह अंत में लिखी हुई सीख है। कहानी वहीं ख़त्म होती है जहाँ कोई चीज़ अपनी जगह पर बैठ जाती है, और उसके बाद कुछ नहीं जोड़ा जाता।

हर कहानी के आख़िर में एक हिस्सा उस घर का है जहाँ वह सुनाई जाती थी। वह वाक्य जो हर बार दोहराया जाता था। वह हिस्सा जो छोटे बच्चे अब उलटा सुनाते हैं। यही इन कहानियों को दादी-नानी की कहानियाँ बनाता है, कोई शुरुआती भूमिका नहीं।

इन्हें ज़ोर से पढ़ा जाए तो ये पूरी मिलती हैं। इनके वाक्य बोलने के हिसाब से लिखे गए हैं और कुछ जगह जान-बूझकर लंबे हैं, ताकि पढ़ने वाले की आवाज़ को जगह मिले।

इन्हें Dadi Nani Ki Kahaniya, नानी की कहानी और दादी माँ की कहानी, तीनों नामों से खोजा जाता है।

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