जंगल में एक प्यारी सी बिल्ली रहती थी जिसका नाम था मिठू। मिठू बहुत खुशमिजाज और मजेदार बिल्ली थी, लेकिन उसे एक चीज़ का बहुत शौक था - रंगीन मोती। वह हमेशा सोचती, "अगर मुझे ढेर सारे रंगीन मोती मिल जाएं, तो मैं सबसे सुंदर और खुशहाल बिल्ली बन जाऊँगी।" मिठू के पास कोई मोती नहीं था, लेकिन वह हमेशा जंगल में इधर-उधर खोजती रहती थी।
एक दिन मिठू ने जंगल के पास एक पुरानी झील के किनारे चमकते हुए मोती देखे। उसकी आँखें चमक उठीं, और उसने सोचा, "यह मोती मेरे लिए हैं!" वह खुशी से झील के पास दौड़ी, लेकिन जब उसने मोती उठाने की कोशिश की, तो वह फिसलकर पानी में गिर गई। मिठू परेशान हो गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने सोचा, "अगर मैं और मेहनत करूँ तो ये मोती मेरे होंगे।"
मिठू का दोस्त चूहे का टिंकू, जो हमेशा उसकी मदद करने के लिए तैयार रहता था, उसे देख रहा था। टिंकू ने मिठू से कहा, "मिठू, तुम क्यों परेशान हो? क्या तुम जानती हो कि असली खुशी सिर्फ मोतियों में नहीं, बल्कि दोस्तों और रिश्तों में होती है?"
मिठू चौंकी, "लेकिन मुझे तो रंगीन मोती चाहिए, जिससे मैं सबसे सुंदर दिख सकूँ।" टिंकू मुस्कराते हुए बोला, "अगर तुम यही सोचोगी, तो तुम्हारी खुशियाँ सिर्फ चीजों तक सीमित रह जाएंगी। असली सुंदरता तो दिल में होती है।"
मिठू ने टिंकू की बातों को ध्यान से सुना। वह सोचने लगी कि शायद टिंकू सही कह रहा है। वह अपनी खोज को छोड़कर जंगल के दूसरे जानवरों से मिलने गई। सबसे पहले उसने सूरजमुखी फूलों के पास बैठी एक छोटी सी तितली से दोस्ती की। फिर वह जंगल में मस्ती करती हुई उल्लू और खरगोश के पास भी गई।
धीरे-धीरे मिठू ने महसूस किया कि असली खजाना तो दोस्ती में है। वह अब मोतियों की बजाय अपने दोस्तों के साथ समय बिताने में ज्यादा खुश थी। उसे समझ में आया कि जो चीज़ें हमें खुशी देती हैं, वह हमेशा बाहर से नहीं आतीं, बल्कि हमारे दिल और रिश्तों से आती हैं।
एक दिन, मिठू जंगल में घूमते हुए एक शानदार मोती से भरा बक्सा पाई। लेकिन अब उसकी सोच बदल चुकी थी। उसने मोतियों को देखकर मुस्कराया, लेकिन सोचा, "यह मोती मुझे खुश नहीं कर सकते। मेरी सच्ची खुशी तो मेरे दोस्तों में है।" मिठू ने मोतियों का बक्सा वापस झील में फेंक दिया और अपनी दोस्तों के पास लौट आई।
मिठू और उसके दोस्तों ने मिलकर खेल और मस्ती की। मिठू अब जान चुकी थी कि असली मोती तो जीवन के रिश्तों और दोस्तों में हैं। वह अब पहले से ज्यादा खुश और संतुष्ट थी।
सीख: "सच्ची खुशी बाहरी चीजों से नहीं, बल्कि हमारी अंदर की खुशी और अच्छे रिश्तों से आती है। हमें कभी भी अपनी खुशी को भौतिक चीजों में नहीं ढूँढना चाहिए।"
समाप्त