एक छोटे से गाँव में दो प्यारे बच्चे रहते थे, जिनके नाम थे आरव और प्रीति। दोनों को समुद्र के किनारे खेलना बहुत पसंद था। हर छुट्टी में वे समुद्र के किनारे जाते और रेत के किले बनाते।

एक दिन, आरव और प्रीति ने सोचा, "हम इस बार एक बड़ा और चमचमाता रेत का किला बनाएंगे, जो सभी को देख कर हैरान हो जाएं!" दोनों बहुत उत्साहित थे, और उन्होंने अपनी रचनात्मकता का पूरा इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।

"हम किले में बहुत सी रंगीन पत्थर, मोती और सीपियाँ डालेंगे," प्रीति ने कहा। "और हम किले के चारों ओर एक सुंदर सा बगीचा भी बनाएंगे," आरव ने उत्साह से कहा।

दोनों बच्चों ने अपनी योजना बनाई और काम में लग गए। सबसे पहले, उन्होंने रेत को इकठ्ठा किया और किले की नींव तैयार की। वे बड़े धैर्य से रेत को ढेर करके उसे किले के आकार में बनाने लगे।

"क्या तुमने कभी इतना बड़ा किला देखा है?" प्रीति ने उत्सुकता से आरव से पूछा। "नहीं, यह सबसे खास किला होगा," आरव ने जवाब दिया, और फिर दोनों ने मिलकर किले के चारों कोनों में रंगीन पत्थर और सीपियाँ सजानी शुरू की।

किला दिन-ब-दिन सुंदर होता गया। बच्चे किले के प्रत्येक हिस्से को दिल से सजाने में लगे थे। एक समय ऐसा आया जब किला पूरी तरह तैयार हो गया। यह किला सोने जैसा चमक रहा था, और उसकी चमक समुद्र के पानी में भी दिखाई दे रही थी।

"देखो! हमारा किला कितना सुंदर हो गया है!" प्रीति ने खुशी से कहा। "यह सच में चमचमाता रेत का किला बन गया है!" आरव ने कहा और दोनों बच्चे हंस पड़े।

उस किले में एक खास चीज़ थी - किले की दीवारों के बीच छोटे-छोटे रास्ते बने थे, जिनमें से होकर लोग किले के भीतर जा सकते थे। बच्चों ने उसमें कुछ पौधे भी लगाए थे, जो किले के आंतरिक हिस्से को और भी सुंदर बना रहे थे।

थोड़ी देर बाद, गाँव के बाकी बच्चे भी किले को देखने आए। वे देखकर हैरान रह गए। "यह तो किसी महल से भी सुंदर है!" एक बच्चा बोला। "सच में, यह किला चमचमाता है!" दूसरे बच्चे ने कहा।

बच्चों ने मिलकर किले के पास बैठकर खूब मस्ती की। वे किले की दीवारों पर चढ़े, रेत के रास्तों में दौड़े, और किले के बगीचे में खेलते हुए बहुत खुश थे। यह किला केवल एक रेत का किला नहीं था, बल्कि यह बच्चों की मेहनत, रचनात्मकता और दोस्ती का प्रतीक बन चुका था।

"हमने इस किले को बनाने में बहुत मेहनत की है," आरव ने कहा। "लेकिन अब यह सबकी खुशी का कारण बन गया है।" प्रीति ने कहा, "हां, और यही हमारी सफलता है - यह किला न केवल सुंदर है, बल्कि हम सबके दिलों को भी जोड़ता है।"

सूरज की रोशनी में किला और भी चमकने लगा। बच्चों ने तय किया कि अगले दिन वे फिर से किले को और भी बेहतर बनाएंगे। उनके लिए यह किला केवल एक खेल नहीं था, बल्कि यह एक सपना था, जिसे उन्होंने मिलकर साकार किया था।

और इस तरह, आरव और प्रीति ने न केवल एक चमचमाता रेत का किला बनाया, बल्कि उन्होंने यह भी सीखा कि मेहनत और रचनात्मकता से कुछ भी असंभव नहीं होता।

सीख: "मेहनत और दोस्ती से बड़ी से बड़ी समस्याएं हल हो सकती हैं। जब हम एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो हम जो भी सोचते हैं, वह संभव हो सकता है।"

समाप्त