एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक चूहा रहता था। उसका नाम 'चिरप' था। चिरप एक बहुत समझदार और चतुर चूहा था। गाँव में उसकी पहचान उसकी समझदारी और बुद्धिमानी के लिए थी। चिरप अपनी छोटी सी कद-काठी के बावजूद कभी भी किसी मुश्किल से डरता नहीं था। उसका मानना था कि जो सोच-समझ कर काम करता है, वही मुश्किलों का हल निकाल सकता है।

एक दिन, गाँव के जंगल में एक शेर ने आकर अपना डेरा जमा लिया। शेर ने जंगल के सारे जानवरों में दहशत फैला दी थी। वह हर दिन जंगल के जानवरों को डराता और शिकार करता था। शेर के आतंक से सभी जानवर परेशान थे और कोई भी उससे मुकाबला करने का साहस नहीं जुटा पा रहा था।

इस भयावह स्थिति में, चिरप ने सोचा कि शेर से कैसे निपटा जा सकता है। हालांकि वह छोटा था, लेकिन उसकी समझदारी में कोई कमी नहीं थी। चिरप ने अन्य जानवरों से बात की और सबको एकजुट होने के लिए प्रेरित किया। उसने कहा, "अगर हम सब मिलकर शेर का सामना करें, तो हम उसे हरा सकते हैं। हमें अपनी ताकत नहीं, बल्कि समझदारी का इस्तेमाल करना होगा।"

सब जानवर चिरप की बातों से प्रभावित हुए, लेकिन फिर भी वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर शेर का सामना कैसे किया जा सकता है। चिरप ने एक दिन शेर को अकेला पाया। वह उसके पास गया और शेर से कहा, "तुम बहुत ताकतवर हो, लेकिन क्या तुमने कभी किसी चूहे से मुकाबला किया है?"

शेर ने हंसी में कहा, "तुम जैसे छोटे से चूहे से मैं क्यों मुकाबला करूँगा? तुम मेरी दया पर हो, और मैं तुम्हें कभी भी मार सकता हूँ।" लेकिन चिरप ने कहा, "तुम मुझे मार सकते हो, लेकिन अगर तुम मेरी मदद लो तो मैं तुम्हें एक बड़ा लाभ दे सकता हूँ।" शेर ने दिलचस्पी दिखाई और पूछा, "कैसे?"

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चिरप ने कहा, "मैं तुम्हारे लिए जंगल के सारे रास्तों को जानता हूँ। मैं तुम्हें ऐसे रास्तों से ले जाऊँगा जहाँ तुम बिना किसी परेशानी के शिकार कर सको।" शेर, जो चूहे की बातों को मजाक समझ रहा था, फिर भी उसकी बातों को स्वीकार कर लिया और चूहे को अपने साथ चलने के लिए कह दिया।

चिरप और शेर जंगल में एक साथ चलने लगे। चिरप ने शेर को उन रास्तों से परिचित कराया, जहाँ शेर को शिकार करने में कोई कठिनाई नहीं हुई। शेर को अब यह अहसास हुआ कि चिरप वास्तव में बहुत समझदार है और उसकी मदद से वह ज्यादा शिकार कर सकता था।

इसके बाद, शेर ने चिरप से कहा, "तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो। तुम्हारी मदद से मैंने बहुत शिकार किए और अब मैं जंगल के सबसे शक्तिशाली जानवर की तरह महसूस कर रहा हूँ। मैं तुम्हारा आभारी हूँ।" चिरप ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "आपका धन्यवाद, लेकिन असली शक्ति सिर्फ ताकत में नहीं, बल्कि समझदारी में होती है।" शेर ने यह बात मान ली और चिरप की समझदारी की सराहना की।

शेर ने फिर जंगल में सभी जानवरों को एकजुट किया और उनसे कहा, "हम सभी को एकजुट होकर रहना चाहिए। ताकत केवल शारीरिक नहीं, बल्कि हमारी समझदारी में भी है। हमें अपने दिमाग का सही इस्तेमाल करना चाहिए।" शेर के इस बयान ने जंगल के सभी जानवरों को एक नई दिशा दी और सब ने मिलकर शांति से रहने का फैसला किया।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कभी-कभी हमें अपनी ताकत से ज्यादा अपनी समझदारी का इस्तेमाल करना चाहिए। चिरप ने यह साबित किया कि बुद्धिमानी और साहस से हम किसी भी मुश्किल को हल कर सकते हैं। चाहे हम छोटे हों या बड़े, हमारी सोच और समझदारी ही हमें मुश्किलों से बाहर निकाल सकती है।

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इस पंचतंत्र की कहानी "चूहे की समझदारी" से हमें यह भी सिखने को मिलता है कि हमें कभी भी अपनी छोटी सी ताकत को कम नहीं आंकना चाहिए। समझदारी से हम किसी भी बड़े से बड़े संकट को भी हल कर सकते हैं।

इस कहानी में चूहे ने शेर को यह सिखाया कि ताकत सिर्फ शारीरिक नहीं होती, बल्कि सही सोच और रणनीति भी हमारी सबसे बड़ी शक्ति हो सकती है। यही समझदारी हमें जीवन की कठिनाइयों से जूझने में मदद करती है।