भीम गधा था, और गाँव में गधे से कोई राय नहीं पूछता। वह सुबह से शाम तक खेत और मंडी के बीच बोझ ढोता। मालिक उससे बात नहीं करता था, बस सुबह पीठ थपथपाकर बोझ लाद देता और शाम को उतार लेता। रात को भीम बाड़े के कोने में चुपचाप खड़ा रहता। बाकी जानवर उसे बुद्धू समझते थे, क्योंकि वह कम बोलता था। किसी ने यह नहीं देखा कि जब सब बोल रहे होते हैं, तब भीम सुन रहा होता है।
एक दिन गाँव में एक भयंकर बाघ आ गया। वह बहुत ही क्रूर और ताकतवर था। बाघ ने गाँव के आस-पास के खेतों में आकर जानवरों को डराना शुरू कर दिया था। वह दिन-रात अपने शिकार की तलाश में खेतों में घूमता रहता। गाँव के सभी जानवर डर के मारे अपनी जगहों से बाहर नहीं निकलते थे। गाँव के लोग भी घबराए हुए थे, और कोई भी इस समस्या का हल नहीं खोज पा रहा था।
बाघ के आने के बाद बाड़े में रातें लंबी हो गईं। गायें जुगाली करना भूल जातीं। मुर्गियाँ ऊपर वाली टाँड़ पर चढ़ जातीं और नीचे नहीं उतरतीं। रोज़ रात कोई न कोई कहता कि कल कुछ करना पड़ेगा, और रोज़ सुबह कोई कुछ नहीं करता। भीम सब सुनता रहा।
उस समय, भीम ने सोचा, "अगर हम सब मिलकर बाघ का सामना करें, तो उसे हराया जा सकता है।" भीम ने बाकी जानवरों को एकत्रित किया और उन्हें एक योजना बनाने के लिए प्रेरित किया। भीम जानता था कि बाघ की ताकत को अकेले नहीं हराया जा सकता, लेकिन अगर सब मिलकर काम करें, तो वे बाघ को परास्त कर सकते हैं।
उसे तीन बातें पता थीं, जो और किसी को नहीं थीं। बाघ हमेशा उत्तर वाले नाले से आता था, क्योंकि वहाँ पानी था। वह हमेशा शाम ढलने के ठीक बाद आता था। और वह कभी बाड़े के भीतर नहीं घुसा था, सिर्फ़ बाहर के खेतों तक आया था। ये बातें भीम को इसलिए पता थीं क्योंकि वह उसी रास्ते से रोज़ मंडी जाता था।
"मैं तो एक साधारण गधा हूँ," भीम ने कहा, "लेकिन अगर हम सब मिलकर काम करें, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होगी।" भीम की बातों ने अन्य जानवरों को उत्साहित किया, और वे सब उसके साथ आ गए। गाँव के सभी जानवरों ने मिलकर एक योजना बनाई और बाघ का सामना करने का फैसला किया।
पहले भीम ने बाघ को एक दूर-दराज के स्थान पर बुलाया। वह जानता था कि बाघ को अपनी ताकत पर घमंड है और वह किसी भी चुनौती को स्वीकार कर सकता है। भीम ने बाघ से कहा, "तुम बहुत ताकतवर हो, लेकिन क्या तुम सब जानवरों से अकेले मुकाबला कर सकते हो?" बाघ ने उसे हंसी में जवाब दिया, "तुम एक छोटे से गधे को क्या चुनौती देने आए हो? मैं तुम सबको एक झटके में हरा सकता हूँ।"
योजना भीम की थी, पर उसने यह किसी को नहीं बताया। उसने बस इतना किया कि शाम को अपनी जगह बदल ली। वह बाड़े के उस कोने में जाकर खड़ा हो गया जो उत्तर वाले नाले की तरफ़ खुलता था, और वहीं खड़ा रहा। एक ने पूछा कि वहाँ क्यों खड़े हो। भीम ने जवाब नहीं दिया।
भीम ने बाघ से कहा, "अगर तुम सचमुच इतना ताकतवर हो, तो क्यों नहीं हम सबको एक साथ चुनौती देते हो? तुम्हें यह पता चल जाएगा कि हम सभी एक साथ मिलकर तुम्हारा सामना कर सकते हैं।" बाघ ने भीम की बातों को मजाक समझा, लेकिन उसे चुनौती स्वीकार करनी पड़ी।
बाघ और भीम के बीच मुकाबला शुरू हुआ। भीम ने बाघ को एक जगह पर रोका और सभी जानवरों को एकत्रित होने का संकेत दिया। सभी जानवरों ने अपनी-अपनी ताकत से बाघ को घेर लिया। बाघ ने जब देखा कि उसे चारों ओर से घेर लिया गया है, तो वह डर के मारे थम गया। अब उसे अपनी ताकत का अहंकार टूटता नजर आया।
जब बाघ आया तो भीम ने वही किया जो एक गधा कर सकता है। उसने रेंकना शुरू कर दिया। ज़ोर से। लगातार। वह आवाज़ सुंदर नहीं थी। गाँव में सब उस पर हँसते थे। पर वह आवाज़ आधे गाँव तक जाती थी, और उस रात गई भी। लालटेनें जलीं। दरवाज़े खुले। बाघ लौट गया।
"तुम सब मिलकर मुझे क्या कर सकते हो?" बाघ ने गुस्से में कहा। लेकिन सभी जानवरों ने एकजुट होकर बाघ का सामना किया और उसे जंगल से बाहर धकेल दिया। बाघ ने अपनी हार स्वीकार की और जंगल छोड़ दिया। गाँव में फिर से शांति लौट आई और सभी जानवर अपने घरों में सुरक्षित हो गए।
भीम की बहादुरी और समझदारी ने यह साबित कर दिया कि अकेले काम करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर हम सब मिलकर काम करें, तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती। भीम ने अपनी चालाकी और साहस से बाघ को हराया और सभी जानवरों को यह सिखाया कि बुद्धिमानी और सहयोग से कोई भी मुश्किल हल की जा सकती है।
उसके बाद कई महीनों तक बाघ उधर नहीं आया। बाड़े में रातें फिर सामान्य हो गईं। किसी ने भीम को धन्यवाद नहीं कहा, क्योंकि किसी को ठीक-ठीक पता नहीं था कि हुआ क्या था। बस एक चीज़ बदली। शाम को जब भीम उत्तर वाले कोने में जाकर खड़ा होता, तो अब कोई उससे यह नहीं पूछता कि वहाँ क्यों खड़े हो।