हादसा रात पौने ग्यारह बजे हुआ और उस वक़्त मोड़ पर सिर्फ़ एक आदमी मौजूद था। वह चाय की दुकान पर काम करता था और दुकान बंद होने के बाद वहीं सोता था। उसकी उम्र सोलह के आसपास थी और उसे मुन्ना कहा जाता था, क्योंकि उसका असली नाम पूछने की ज़रूरत किसी को नहीं पड़ी थी।

मुन्ना जन्म से बहरा था। इसी वजह से बोलता भी नहीं था। रिपोर्ट में लिखा गया कि मौक़े पर कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। यह ग़लत भी नहीं लिखा गया था, क्योंकि काग़ज़ पर गवाह वही होता है जिसका बयान लिखा जा सके।

मरने वाला सुगिया का भाई था। वह साइकिल से लौट रहा था और मोड़ पर उसे पीछे से कुछ लगा। सुबह पुलिस ने साइकिल उठाई, पंचनामा किया, और मामला अज्ञात वाहन में दर्ज कर लिया। अज्ञात वाहन का मतलब गाँव में सब जानते हैं। उसका मतलब है कि फ़ाइल खुलेगी और बंद हो जाएगी।

सुगिया तीसरे दिन चाय की दुकान पर गई। मुन्ना बर्तन धो रहा था। उसने उसे देखा। फिर तुरंत खड़ा हो गया, और फिर उसने वह किया जो वह पिछले तीन दिन से हर आने-जाने वाले के साथ कर रहा था।

सुगिया उन दिनों थाने के चक्कर भी लगा रही थी। वहाँ उससे हर बार यही पूछा जाता कि कोई देखने वाला था क्या, और वह हर बार यही कहती कि चाय वाली दुकान वाला लड़का वहीं सोता है। लिखने वाले ने एक बार उससे कहा कि वह लड़का बोल नहीं सकता, तो लिखेंगे क्या। यह सवाल उसे तब ठीक लगा था।

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उसने पहले अपने कान पर उँगली रखी। फिर उसने अपना हाथ सीधा किया, हथेली नीचे की तरफ़, और उसे इधर से उधर हिलाया, धीरे-धीरे, दो-तीन बार।

दुकान वाला बोला कि यह तीन दिन से यही कर रहा है। उसने यह भी बताया कि इसका मतलब वह समझता है। कान पर उँगली का मतलब है कि उसने सुना नहीं, और हाथ हिलाने का मतलब है कि उसे कुछ नहीं मालूम। बेचारा माफ़ी माँग रहा है, उसने कहा। इसे लगता है कि लोग इसी से नाराज़ हैं।

सुगिया को भी यही समझ आया और वह लौट आई। नौ दिन तक उसने इस बारे में और कुछ नहीं सोचा, क्योंकि उन नौ दिनों में और भी बहुत कुछ था।

दसवें दिन वह किसी काम से फिर उधर से निकली। मुन्ना बाहर बैठा था और उसने उसे देखते ही वही दोनों इशारे फिर किए, उसी क्रम में, पहले कान, फिर हाथ।

सुगिया उस दिन रुक गई। उसने सोचा कि माफ़ी माँगने वाला आदमी दस दिन तक एक ही तरह माफ़ी नहीं माँगता। माफ़ी एक बार माँगी जाती है, दो बार माँगी जाती है, और फिर आदमी नज़र चुराने लगता है। यह लड़का नज़र नहीं चुरा रहा था। यह हर बार सामने आकर वही दोहरा रहा था।

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उसने उसके सामने बैठकर उसका हाथ पकड़ा और उसे दोबारा करने को कहा, इशारे से। मुन्ना ने कान पर उँगली रखी। सुगिया ने सिर हिलाकर पूछा, सुना नहीं? मुन्ना ने ना में सिर हिलाया।

यह अटपटी बात थी। वह सुनता ही नहीं था। कभी नहीं सुनता था। उसे यह बताने की ज़रूरत ही नहीं थी कि उसने सुना नहीं।

उसने मुन्ना को उठाकर मोड़ तक चलने को कहा और वह चल दिया। मोड़ पर पहुँचकर उसने बिना पूछे वह जगह दिखाई जहाँ साइकिल गिरी थी, और फिर वह जगह जहाँ वह ख़ुद उस रात लेटा हुआ था। दोनों जगहों के बीच बीस क़दम से भी कम था। इतने पास से गुज़रने वाली गाड़ी को वह नहीं देख सकता था, क्योंकि वह सो रहा था। महसूस ज़रूर कर सकता था।

सुगिया ने अपनी उँगली अपने कान पर रखी और फिर सवाल की तरह उसकी तरफ़ देखा। मुन्ना ने उसका हाथ पकड़ा, कान से हटाया, और उसे नीचे लाकर ज़मीन पर रख दिया।

फिर उसने अपनी दोनों हथेलियाँ ज़मीन पर रखीं। और उन्हें हल्का-हल्का हिलाया।

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उसने कान की तरफ़ इशारा इसलिए नहीं किया था कि उसने सुना नहीं। उसने इसलिए किया था कि आवाज़ का सवाल ही नहीं है। उसने ज़मीन से महसूस किया था। ज़मीन उस रात हिली थी।

सुगिया ने दूसरा इशारा दोबारा करवाया, हथेली नीचे, इधर से उधर। उसने उसकी नक़ल करके अपनी हथेली हिलाई और उसकी तरफ़ देखा। मुन्ना ने अपने हाथ ऊपर उठाकर वही हरकत सिर से ऊँची जगह पर की, और साथ में अपने कंधे झुका लिए, जैसे कोई भारी चीज़ ऊपर से झूल रही हो।

मोटरसाइकिल से ज़मीन नहीं हिलती। कार से भी नहीं हिलती। जो ज़मीन हिलाकर गुज़रे और जिसका ऊपरी हिस्सा झूलता हो, वह भरा हुआ ट्रक होता है।

उस इलाक़े में रात को भरे ट्रक एक ही वजह से निकलते हैं। पत्थर। सिर्फ़ पत्थर। और पत्थर की गाड़ियाँ काँटे पर तुलती हैं, और काँटे पर पर्ची कटती है, और पर्ची पर गाड़ी का नंबर और समय दोनों छपते हैं।

काँटे वाले ने कहा कि पर्चियाँ महीने भर रखी जाती हैं और उसके बाद रद्दी में चली जाती हैं। हादसे को ग्यारह दिन हो चुके थे। उस रात दस बजे से बारह बजे के बीच उस काँटे से तीन गाड़ियाँ तुलकर निकली थीं, और तीनों की पर्चियाँ अब भी वहीं थीं।

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आगे जो हुआ वह अदालत का काम है और उसमें बरसों लगते हैं। इतना ज़रूर हुआ कि अज्ञात वाहन वाली फ़ाइल में तीन नंबर लिख दिए गए, और उसके बाद उसे बंद करना उतना आसान नहीं रह गया।

मुन्ना का बयान कभी दर्ज नहीं हुआ। ज़िले में उसकी भाषा जानने वाला कोई नहीं था और अदालत ने पूछा कि क्या गवाह से सवाल-जवाब हो सकते हैं, और जवाब में नहीं लिखा गया। फ़ाइल में जो लगी, वह काँटे की पर्ची है। उस पर्ची पर गाड़ी का नंबर है, तारीख़ है, वज़न है, और समय है। उस पर मुन्ना का नाम कहीं नहीं है।