एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक शरारती बंदर अपनी टोली के साथ रहता था। उसका नाम मनी था और वह हर समय कुछ न कुछ शरारत करता रहता था। मनी को लगता था कि शरारतें करना सिर्फ मज़ेदार ही नहीं, बल्कि उसकी ताकत भी साबित करता है। वह जंगल में हर जानवर के साथ खेलता और शरारत करता, कभी किसी के फल चुराकर खाता, तो कभी किसी को परेशान करता। सभी जानवर उससे तंग आ चुके थे, लेकिन मनी की शरारतें कभी खत्म नहीं होती थीं।

एक दिन जंगल में एक बड़ा परिवर्तन आया। जंगल के राजा, एक बड़ा और शक्तिशाली शेर, बीमार पड़ गया। सभी जानवर चिंतित थे, क्योंकि शेर के बिना जंगल की शांति और सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं थी। वह सब सोचने लगे कि अब जंगल का नेतृत्व कौन करेगा। उसी समय मनी ने सोचा, "यदि शेर बीमार है तो यह मेरे लिए अच्छा मौका है। मैं ही जंगल का राजा बन सकता हूँ!" इस विचार से मनी का मन खुश हो गया, और उसने जंगल के सभी जानवरों को अपने चालाक तरीकों से अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई।

मनी ने सबसे पहले जंगल के सबसे बड़े हाथी के पास जाकर कहा, "तुम्हारे पास इतनी ताकत है, क्यों न तुम मेरे साथ मिलकर जंगल के राजा बन जाओ?" हाथी ने उसे घूरते हुए कहा, "मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है इस जंगली राजनीति में। तुम्हारी यह शरारतें मेरे काम की नहीं हैं।" मनी ने अपनी शरारतों के बारे में सोचना जारी रखा, लेकिन उसे कोई साथ नहीं मिल रहा था। तब मनी ने सोचा, "मैं इस समस्या का हल खुद निकाल लूँगा।"

मनी ने जंगल के अन्य जानवरों को भी अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। वह उन्हें अपनी शरारतों का जादू दिखाने के लिए उन्हें हंसी-मजाक में उलझाता और कहता, "मुझे ही इस जंगल का राजा बनने का अधिकार है, मैं सबको मज़े दिलाऊँगा।" लेकिन कोई भी जानवर मनी की बातों पर विश्वास नहीं कर रहा था। वे सभी समझ गए थे कि मनी की शरारतें जंगल के लिए खतरे का कारण बन सकती थीं।

एक दिन मनी ने अपनी शरारत से परेशान होकर जंगल के राजा शेर से मिलने का फैसला किया। शेर ने मनी को अपने पास बुलाया। मनी ने अपनी आदत के अनुसार शेर को भी परेशान करने की सोची। वह शेर के पास गया और कहा, "शेर भाई, तुमने जंगल के नियम बनाए हैं, लेकिन तुम बीमार हो, तुम जंगल के राजा नहीं रह सकते। अब मैं जंगल का राजा बनूंगा।"

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शेर ने गुस्से में आकर कहा, "तुमने क्या कहा, मनी? तुम्हें लगता है कि शरारतों से तुम राजा बन सकते हो?" मनी ने कहा, "हाँ, बिल्कुल! मेरी शरारतें ही मुझे जंगल का राजा बनाएंगी।" शेर ने ठंडी सांस ली और कहा, "मनी, तुम शरारतों के बारे में जो सोच रहे हो, वह तुम्हारे लिए एक भारी सबक बनेगा।"

शेर ने मनी से कहा, "तुम जंगल के सभी जानवरों को समझाओ कि वे अब शरारतों से दूर रहें। केवल एक समझदार और कर्तव्यनिष्ठ जानवर ही जंगल का राजा हो सकता है।" मनी ने शेर की बातों को अनसुना किया और अपनी शरारतें जारी रखी।

कुछ दिन बाद, मनी ने अपनी शरारत से जंगल के एक छोटे से पक्षी का घोंसला उड़ा दिया। यह देखकर शेर बहुत गुस्से में आ गया। उसने मनी से कहा, "अब तुमने सीमा पार कर दी है। तुम्हें अब अपनी शरारतों का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।" मनी ने कहा, "तुम मुझे कुछ नहीं कर सकते, शेर भाई।" शेर ने कहा, "तुम समझ नहीं रहे हो। अब तुम जंगल के लिए खतरा बन चुके हो।"

शेर ने मनी को जंगल से बाहर निकाल दिया। उसने मनी से कहा, "तुम अगर शरारतें करने में लगे रहोगे, तो कभी भी किसी का विश्वास नहीं जीत पाओगे। तुम्हारी हरकतों से केवल नुकसान होगा, ना कि कोई भला होगा।" मनी को समझ में आ गया कि उसकी शरारतें उसके लिए और जंगल के लिए कितनी हानिकारक थीं। उसने अपनी गलती मानी और जंगल के अन्य जानवरों से माफी मांगी।

इसके बाद मनी ने शरारतें करना छोड़ दिया और जंगल के सभी जानवरों के साथ मिलकर अच्छा काम करने की शुरुआत की। उसने अपनी पुरानी आदतों को छोड़कर समझदारी से काम करना शुरू किया। जंगल में फिर से शांति और समृद्धि आ गई, और मनी ने सीखा कि शरारतें कभी किसी के लिए फायदेमंद नहीं होतीं।

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यह कहानी हमें यह सिखाती है कि शरारतें कभी भी किसी के लिए अच्छे परिणाम नहीं ला सकतीं। हमें अपने कार्यों और शब्दों में समझदारी और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। मनी की तरह अगर हम भी शरारतों को छोड़कर सही रास्ते पर चलें, तो हम अपने जीवन में सफलता और शांति पा सकते हैं।