गाँव के पश्चिमी छोर पर एक पगडंडी थी, जो टूटी हुई थी और कहीं-कहीं गायब हो जाती थी। वह कब्रिस्तान तक जाती थी। झाड़ियाँ इतनी घनी थीं कि दोपहर में भी वहाँ छाँव रहती। बड़े पेड़ों की जड़ें कई कब्रों के ऊपर से निकल चुकी थीं। दिन में भी लोग वहाँ अकेले नहीं जाते थे। रात की तो बात ही अलग थी।
विनय एक साहसी और जिज्ञासु युवक था, जिसे हमेशा से भूतिया कहानियों और रहस्यमयी घटनाओं का पर्दाफाश करने का शौक था। वह मानता था कि इन डर और अफवाहों के पीछे कोई ठोस आधार नहीं होता और यह सब केवल लोगों की कल्पनाएँ होती हैं। गाँव के बुजुर्ग उसे समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन विनय ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। उसने निश्चय कर लिया कि वह रात के अंधेरे में कब्रिस्तान के पास जाकर वहाँ की घटनाओं की तह तक जाएगा और सच्चाई का पता लगाएगा।
जैसे ही रात का अंधेरा गहरा होने लगा और चाँद बादलों के पीछे छुप गया, विनय अपने कैमरे और टॉर्च के साथ कब्रिस्तान की ओर बढ़ चला। उसकी चाल धीमी और सतर्क थी, जैसे वह किसी अदृश्य शक्ति को चुनौती दे रहा हो। कब्रिस्तान के किनारे पहुँचा तो वहाँ का सन्नाटा उसके कानों में गूंजने लगा। वह धीरे-धीरे कब्रिस्तान के किले के पास गया, जहाँ कब्रों की एक लंबी पंक्ति फैली हुई थी। उसकी आँखें डर और उत्सुकता से भर गई थीं। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, लेकिन उसने खुद को शांत रखने की कोशिश की। अचानक उसे एक तेज़ हवा का झोंका महसूस हुआ, और ऐसा लगा जैसे कोई उसे घूर रहा हो।
आधी रात के बाद
विनय ने अपनी टॉर्च की रोशनी को चारों ओर घुमाया, लेकिन उसने किसी भी प्रकार का जीवित व्यक्ति नहीं देखा। फिर उसने सोचा कि वह सिर्फ अपना डर जीतने की कोशिश कर रहा था। जैसे ही वह कब्रों के पास पहुँचा, अचानक एक तेज़, असाधारण आवाज़ आई, जो मानो कब्रों से उठ रही हो। उसने अपने मन को स्थिर किया और आगे बढ़ने की कोशिश की। तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसकी पीठ पर हाथ रखा है। विनय डर के मारे पलटने की बजाय धीरे से हाथ हटाने की कोशिश करने लगा, लेकिन वह हाथ और भी मजबूत हो गया।
वह कांपते हुए पलटा और सामने देखा। सामने एक व्यक्ति खड़ा था, लेकिन वह सामान्य नहीं था। उसकी आँखों से लाल चमक निकल रही थी, और उसका चेहरा पूरी तरह से सड़ा हुआ था। उसकी त्वचा पर काली परत चढ़ी हुई थी, और वह बुरी तरह से सड़ चुका था। उसके कपड़े पुराने और फटे हुए थे, और उसके शरीर से एक बदबू आ रही थी जो विनय के नथुनों में भर गई। उसकी आँखों में गुस्सा और घृणा भरी हुई थी। उसने धीरे-धीरे विनय की तरफ देखा और कहा, "तुमने जो किया, वह तुमसे सस्ते में नहीं छोड़ा जाएगा।"
विनय का दिल तेजी से धड़कने लगा, और उसे समझ में आ गया कि यह कोई साधारण आदमी नहीं था। यह एक आत्मा थी, जो कब्रिस्तान की सड़ी-गली ज़मीन पर भटक रही थी। विनय का गला सूख गया, और उसकी सांसें थम सी गईं। उस आत्मा की आँखों में जैसे कोई गहरा रहस्य छिपा था। वह खौफनाक हंसी हंसते हुए विनय के पास बढ़ी। विनय अब जानता था कि उसे यहां से भागना ही होगा, और उसने बिना समय गवाए भागने का फैसला किया।
जैसे ही वह दौड़ने लगा, उसने महसूस किया कि वह आत्मा उसकी नजदीक हो रही थी। उसके कदम तेज़ हो रहे थे, और उसे महसूस हुआ कि आत्मा भी तेजी से उसके पीछे आ रही थी। विनय ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन जैसे ही वह दौड़ते हुए देखा, सभी कब्रें जैसे उसके पीछे दौड़ रही थीं। हर कब्र का मुँह खुला था, और उसकी आँखों में अजीब-सी हलचल थी।
तभी एक तेज आंधी आई, और कब्रों से एक आवाज सुनाई दी। "कभी भूलकर भी इस जगह पर मत आना। हम शांति की खोज में नहीं हैं, बल्कि हमारी आत्माओं को शांति चाहिए।" विनय बिना पलटे, दौड़ते हुए गाँव की ओर भागा। उसे लगा कि अगर वह रुकता, तो वह कभी लौट नहीं पाता। वह अब पूरी तरह से यह समझ चुका था कि जिन चीजों को वह मजाक समझता था, वे असल में बहुत खतरनाक थीं।
जो आवाज़ किसी और ने नहीं सुनी
विनय का दिल अब डर और थकावट से भर चुका था। जैसे-जैसे वह गाँव के पास पहुँचने वाला था, उसे हर कदम के साथ और ज्यादा घबराहट महसूस हो रही थी। उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, और उसने समझा कि वह जैसे-जैसे गाँव के पास पहुँच रहा था, वह और भी नर्वस हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि कोई और उसे पकड़ने के लिए पीछे से आ रहा था। वह अब पूरी तरह से यह महसूस कर चुका था कि उस जगह के पास आकर उसने कोई बड़ी गलती की थी।
गाँव के पास पहुँचते ही विनय ने देखा कि वह अब सुरक्षित है। लेकिन उसकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। उसके चेहरे पर पसीने की बूँदें थी, और आँखों में डर साफ़ दिखाई दे रहा था। वह गाँव में प्रवेश करने ही वाला था कि उसने पीछे मुड़कर देखा। वहाँ कुछ नहीं था, लेकिन उस अंधेरे में एक साया नजर आया। यह वही आत्मा थी जो उसे पीछा कर रही थी। वह साया एक बार फिर उसे घूर रहा था, और विनय के दिल में एक और भय की लहर दौड़ गई।
अगले दिन गाँव के लोगों ने विनय को देखा और समझ गए कि क़ब्रिस्तान के किनारे से गुज़रने के बाद वह वैसा नहीं रहा। उसका चेहरा पीला था और वह किसी की आँख में देखकर बात नहीं करता था। उसने उस रात की पूरी बात कभी किसी को नहीं बताई। एक बार उसके छोटे भाई ने पूछा कि वहाँ क्या था, तो विनय ने उससे उलटा सवाल किया कि उस रात वह कहाँ था। लड़के ने कहा, घर पर। विनय ने दोबारा नहीं पूछा, पर उसके बाद वह रात में दरवाज़ा अंदर से बंद करके सोने लगा।