एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव के पास एक घना जंगल था। उस जंगल में बहुत से जानवर रहते थे, जिनमें बकरा और भेड़ भी शामिल थे। बकरा बहुत घमंडी था। वह हमेशा अपनी ताकत और सुंदरता पर गर्व करता था। वह सोचता था कि वह सबसे बढ़िया है, और बाकी जानवरों को तुच्छ समझता था। वहीं भेड़ बहुत समझदार और चतुर थी, लेकिन वह किसी से भी अपनी चतुराई का प्रदर्शन नहीं करती थी।
एक दिन, बकरा जंगल के पास के मैदान में घास चर रहा था। तभी भेड़ उसके पास से गुजर रही थी। बकरा भेड़ को देख कर बोला, "तुम जैसी मामूली और छोटे कद वाली भेड़ मेरे बराबर नहीं हो सकती। देखो, मैं कितना ताकतवर और सुंदर हूँ। तुम हमेशा मेरे पीछे ही रहोगी, क्योंकि मैं ही जंगल का सबसे शानदार जानवर हूँ।"
भेड़ ने बकरा की बातों को शांतिपूर्वक सुना और फिर बोली, "तुम्हारा घमंड देखकर मुझे यह लगता है कि तुम एक दिन अपनी घमंड की वजह से बड़ी मुसीबत में पड़ोगे।" बकरा हंसते हुए बोला, "तुम जैसी भेड़ को क्या समझ? तुम मुझसे कुछ नहीं कर सकती।" भेड़ ने कोई जवाब नहीं दिया और अपने रास्ते चली गई।
कुछ दिन बाद, बकरा फिर से उसी मैदान में घूम रहा था। अचानक उसने देखा कि एक बड़ा शिकारी शिकार की तलाश में जंगल के पास आ रहा था। शिकारी के पास एक तेज़ बंदूक थी और वह बकरा के बारे में सोच रहा था। बकरा ने देखा कि शिकारी उसकी ओर बढ़ रहा है, लेकिन उसकी घमंड में उसे यह समझने का समय नहीं मिला कि वह खतरे में है।
बकरा डर के बजाय यह सोचने लगा कि वह शिकारी से कैसे बच सकता है। वह भागने के लिए तैयार हुआ, लेकिन शिकारी ने उसकी ओर बंदूक तान दी। उसी समय, भेड़ जो पास में ही घास खा रही थी, यह देख रही थी। वह समझ गई कि बकरा परेशानी में है, और उसे बचाना होगा।
भेड़ ने दौड़ते हुए बकरा के पास पहुंचकर कहा, "तुम्हारी घमंड ने तुम्हें यहाँ तक पहुँचाया है, लेकिन अगर तुम मेरी बात मानो तो मैं तुम्हें बचा सकती हूँ।" बकरा घबराया हुआ था और बोला, "मुझे क्या करना चाहिए?" भेड़ ने कहा, "तुम्हें शांत रहकर मेरी योजना पर अमल करना होगा। हम दोनों मिलकर शिकारी से बच सकते हैं।"
भेड़ ने अपनी चतुराई से एक योजना बनाई। उसने बकरा से कहा, "तुम मेरे पीछे-पीछे चलो और मैं तुम्हे उस झाड़ी के पास ले जाऊंगी जहाँ शिकारी हमारी पहचान नहीं कर पाएगा।" बकरा को भेड़ की बातों पर यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन उसने सोचा कि शायद यही आखिरी तरीका हो सकता है। वह भेड़ के पीछे-पीछे दौड़ने लगा।
भेड़ ने धीरे-धीरे बकरा को झाड़ी के पास पहुंचाया और दोनों झाड़ी में छिप गए। शिकारी ने जब उन्हें देखा, तो उसने सोचा कि ये दोनों जानवर बहुत सामान्य हैं और उन्हें छोड़ दिया। बाद में, शिकारी वहाँ से चला गया। बकरा और भेड़ अपनी जान बचाकर झाड़ी से बाहर आए।
बकरा अब भेड़ से बोला, "तुम सही कह रही थीं, मैंने अपनी घमंड में सब कुछ खो दिया था, लेकिन तुमने अपनी समझदारी से मुझे बचाया। अगर तुम मेरी मदद नहीं करतीं, तो मैं आज शिकारी का शिकार बन जाता।" भेड़ मुस्कुराई और बोली, "घमंड कभी भी किसी का भला नहीं करता। हमें अपनी समझदारी और साहस का सही इस्तेमाल करना चाहिए।"
इस घटना के बाद, बकरा ने अपने घमंड को छोड़ दिया और भेड़ से सीखा कि जीवन में समझदारी और विनम्रता अधिक महत्वपूर्ण हैं। वह अब किसी को कमतर नहीं समझता था और भेड़ से दोस्ती कर ली थी।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि घमंड और अहंकार केवल हमारी परेशानी बढ़ाते हैं, जबकि समझदारी और विनम्रता हमें किसी भी मुश्किल से बाहर निकाल सकती हैं। "घमंडी बकरा और चालाक भेड़" हमें यह सिखाती है कि जीवन में कभी भी दूसरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और समझदारी से काम लेना चाहिए।