जंगल में गिलहरी से छोटा कोई नहीं था। चालाक उसे सब कहते थे, पर तारीफ़ के तौर पर नहीं। शायद इसीलिए सबसे ज़्यादा उसी को पता था कि कहाँ क्या हो रहा है। वह पेड़ों के ऊपर से चलती थी और ऊपर से सब दिखता था: कौन किससे बच रहा है, कौन रास्ता बदलकर जा रहा है, और तालाब के किनारे वाला रास्ता पिछले कुछ महीनों से क्यों सूना पड़ा है। बड़े जानवर उसकी बात पर ध्यान नहीं देते थे। छोटी है, कहते थे, और आगे बढ़ जाते थे।
एक दिन, जंगल के पास एक बड़ा तालाब था। तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। मगरमच्छ हमेशा जंगल के जानवरों को डराता था और कभी-कभी उन पर हमला भी कर देता था। उसने कई बार गिलहरी को भी धमकाया था। मगरमच्छ की इन हरकतों से परेशान होकर, गिलहरी ने यह तय किया कि वह इस समस्या का हल निकालेगी।
मगरमच्छ की वजह से जंगल का आधा हिस्सा बदल चुका था। हिरन अब दूसरे रास्ते से पानी पीने जाते थे। वह रास्ता दुगना लंबा था। पक्षी तालाब के ऊपर से उड़ते ही नहीं थे। एक बूढ़े ख़रगोश ने उधर जाना छोड़ दिया था। किसी ने शिकायत नहीं की। सबको लगता था कि अब यह ऐसा ही रहेगा।
गिलहरी ने सोचा, "अगर मैं इस मगरमच्छ को समझाकर उसे शांत कर सकूं तो जंगल में शांति लौट सकती है।" गिलहरी एक दिन तालाब के किनारे गई और उसने मगरमच्छ से कहा, "हे मगरमच्छ भाई, तुम क्यों हमेशा जंगल के जानवरों को डराते हो? तुम्हारी ताकत और ताकतवर होने की वजह से हमें डरना नहीं चाहिए। हम भी जंगल के साथी हैं, हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।"
मगरमच्छ हंसा और बोला, "तुम तो एक छोटी सी गिलहरी हो, क्या तुम मेरी ताकत को चुनौती देने आई हो?" गिलहरी ने कहा, "नहीं, मैं तुम्हारी ताकत से नहीं डरती, लेकिन हमें एक-दूसरे के साथ शांति से रहना चाहिए। क्या तुम मुझे एक मौका दोगे?"
मगरमच्छ ने गिलहरी की बातों को नजरअंदाज कर दिया और कहा, "तुम छोटी हो, मुझे तुमसे कोई खतरा नहीं है, लेकिन मैं तुमसे यह कहना चाहता हूँ कि तुम यहाँ न आओ, वरना मुझे तुम्हारा शिकार करना पड़ेगा।" गिलहरी ने समझ लिया कि मगरमच्छ को समझाने का समय अब नहीं है, इसलिए उसने एक नई योजना बनाई।
लौटते वक़्त गिलहरी को अपनी ग़लती समझ आ गई। वह अकेली गई थी। मगरमच्छ के लिए अकेली गिलहरी सिर्फ़ एक गिलहरी थी। और कुछ नहीं। बात मनवाने के लिए कहने वाले का बड़ा होना ज़रूरी नहीं है। ज़रूरी यह है कि कहने वाले अकेले न हों। यह बात उसने उसी शाम बाकी सबको बताई।
गिलहरी जंगल में अन्य जानवरों से मिली और सबको बताने लगी कि मगरमच्छ एक बार फिर उन पर हमला करने की योजना बना रहा है। गिलहरी ने सभी जानवरों को एकजुट किया और कहा, "अगर हम सभी मिलकर एकजुट होकर मगरमच्छ का सामना करें, तो हम उसे हराकर जंगल में शांति ला सकते हैं।"
सभी जानवर गिलहरी के साथ हो गए और सबने मिलकर मगरमच्छ के पास जाने का फैसला किया। एक दिन, जब मगरमच्छ तालाब में सो रहा था, जानवरों का एक समूह उसे घेरने गया। मगरमच्छ को देखकर सबने एक साथ उसे चेतावनी दी, "अब तुम हमारे जंगल में कोई परेशानी नहीं पैदा कर सकते। हम सब तुम्हारा सामना करने के लिए तैयार हैं।"
मगरमच्छ ने देखा कि सभी जानवर एकजुट होकर उसकी तरफ बढ़ रहे हैं। उसे यह समझ में आया कि यदि उसने अब भी कोई गलत कदम उठाया, तो उसका सामना कई जानवरों से करना पड़ेगा। मगरमच्छ ने अपना गुस्सा शांत किया और उसने कहा, "ठीक है, मैं अब तुम्हें परेशान नहीं करूंगा।"
जानवर लौटने लगे। गिलहरी सबसे पीछे थी। बूढ़े ख़रगोश ने उससे पूछा कि अगर मगरमच्छ फिर शुरू हो गया तो? गिलहरी ने कहा कि तब सब फिर आ जाएँगे। 'और अगर न आएँ?' गिलहरी चुप रही। फिर बोली, 'तो मैं अकेली आऊँगी।' ख़रगोश चुप रहा। 'पर सब आएँगे,' गिलहरी ने कहा। 'मुझे पता है।'
इस घटना के बाद, जंगल में शांति लौट आई और सभी जानवर खुशी से रहने लगे। गिलहरी की चतुराई और उसकी समझदारी ने जंगल में शांति बहाल की। गिलहरी ने यह सिद्ध कर दिया कि धैर्य, समझदारी और एकजुटता से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है।
उसके बाद तालाब के किनारे वाला रास्ता फिर से चलने लगा। हिरन छोटे रास्ते से पानी पीने जाने लगे। पक्षी तालाब के ऊपर से उड़ने लगे। मगरमच्छ अब भी वहीं रहता था। किसी ने उसे जंगल से निकालने की बात नहीं की। कभी-कभी गिलहरी ऊपर की डाल से उसे देखती। वह पानी से गिलहरी को देखता। दोनों में से कोई कुछ नहीं कहता था।