एक समय की बात है, एक घने जंगल में कई प्रकार के जानवर रहते थे। इस जंगल में एक चालाक और चतुर गिलहरी रहती थी। गिलहरी अपनी तेज़ी और समझदारी के लिए जानी जाती थी। वह हमेशा दूसरों की मदद करती थी और किसी भी मुश्किल को बड़ी आसानी से हल कर देती थी। लेकिन जंगल में कुछ ऐसे भी जानवर थे जो गिलहरी की समझदारी को कम समझते थे और उसे हल्के में लेते थे।
एक दिन, जंगल के पास एक बड़ा तालाब था। तालाब में एक मगरमच्छ रहता था। मगरमच्छ हमेशा जंगल के जानवरों को डराता था और कभी-कभी उन पर हमला भी कर देता था। उसने कई बार गिलहरी को भी धमकाया था। मगरमच्छ की इन हरकतों से परेशान होकर, गिलहरी ने यह तय किया कि वह इस समस्या का हल निकालेगी।
गिलहरी ने सोचा, "अगर मैं इस मगरमच्छ को समझाकर उसे शांत कर सकूं तो जंगल में शांति लौट सकती है।" गिलहरी एक दिन तालाब के किनारे गई और उसने मगरमच्छ से कहा, "हे मगरमच्छ भाई, तुम क्यों हमेशा जंगल के जानवरों को डराते हो? तुम्हारी ताकत और ताकतवर होने की वजह से हमें डरना नहीं चाहिए। हम भी जंगल के साथी हैं, हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।"
मगरमच्छ हंसा और बोला, "तुम तो एक छोटी सी गिलहरी हो, क्या तुम मेरी ताकत को चुनौती देने आई हो?" गिलहरी ने कहा, "नहीं, मैं तुम्हारी ताकत से नहीं डरती, लेकिन हमें एक-दूसरे के साथ शांति से रहना चाहिए। क्या तुम मुझे एक मौका दोगे?"
मगरमच्छ ने गिलहरी की बातों को नजरअंदाज कर दिया और कहा, "तुम छोटी हो, मुझे तुमसे कोई खतरा नहीं है, लेकिन मैं तुमसे यह कहना चाहता हूँ कि तुम यहाँ न आओ, वरना मुझे तुम्हारा शिकार करना पड़ेगा।" गिलहरी ने समझ लिया कि मगरमच्छ को समझाने का समय अब नहीं है, इसलिए उसने एक नई योजना बनाई।
गिलहरी जंगल में अन्य जानवरों से मिली और सबको बताने लगी कि मगरमच्छ एक बार फिर उन पर हमला करने की योजना बना रहा है। गिलहरी ने सभी जानवरों को एकजुट किया और कहा, "अगर हम सभी मिलकर एकजुट होकर मगरमच्छ का सामना करें, तो हम उसे हराकर जंगल में शांति ला सकते हैं।"
सभी जानवर गिलहरी के साथ हो गए और सबने मिलकर मगरमच्छ के पास जाने का फैसला किया। एक दिन, जब मगरमच्छ तालाब में सो रहा था, जानवरों का एक समूह उसे घेरने गया। मगरमच्छ को देखकर सबने एक साथ उसे चेतावनी दी, "अब तुम हमारे जंगल में कोई परेशानी नहीं पैदा कर सकते। हम सब तुम्हारा सामना करने के लिए तैयार हैं।"
मगरमच्छ ने देखा कि सभी जानवर एकजुट होकर उसकी तरफ बढ़ रहे हैं। उसे यह समझ में आया कि यदि उसने अब भी कोई गलत कदम उठाया, तो उसका सामना कई जानवरों से करना पड़ेगा। मगरमच्छ ने अपना गुस्सा शांत किया और उसने कहा, "ठीक है, मैं अब तुम्हें परेशान नहीं करूंगा।"
इस घटना के बाद, जंगल में शांति लौट आई और सभी जानवर खुशी से रहने लगे। गिलहरी की चतुराई और उसकी समझदारी ने जंगल में शांति बहाल की। गिलहरी ने यह सिद्ध कर दिया कि धैर्य, समझदारी और एकजुटता से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम अपनी समझदारी और धैर्य का सही इस्तेमाल करें, तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का हल भी मिल सकता है। गिलहरी ने हमें यह सिखाया कि हमें कभी भी अपनी चतुराई को कम नहीं आंकना चाहिए।
गिलहरी की इस चतुराई और साहसिक कार्य ने उसे जंगल में आदर्श बना दिया। उसके बाद से, जंगल के सभी जानवर उसे आदर और सम्मान की दृष्टि से देखते थे। गिलहरी ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर दिल में हिम्मत और दिमाग में समझदारी हो, तो किसी भी समस्या को हल किया जा सकता है।