रवि एक साधारण इंसान थाया कम से कम उसे ऐसा लगता था। उसकी ज़िन्दगी बिल्कुल सामान्य थीएक अच्छी नौकरी, एक प्यार करने वाली पत्नी, और एक शांत जीवन। लेकिन एक दिन, उसकी दुनिया तब हिल गई जब उसे एक अजनबी से एक पैकेज मिला।

पैकेज खोलते ही उसे एक पुरानी डायरी मिली, जिस पर लिखा था "तुम्हारा असली चेहरा"। रवि को यह अजीब लगा, लेकिन जिज्ञासावश उसने डायरी के पन्ने पलटने शुरू किए। पहला ही पृष्ठ पढ़ते ही उसके रोंगटे खड़े हो गएउसमें उसकी जिंदगी से जुड़ी घटनाएं लिखी थीं, लेकिन उनमें कुछ ऐसा था जो उसने कभी अनुभव ही नहीं किया था।

धीरे-धीरे रवि को अजीब-अजीब सपने आने लगे। कभी वह खुद को किसी अंधेरी गली में देखता, कभी किसी पुराने हवेली में। सबसे डरावना था वह सपना, जिसमें उसने खुद को खून से सने हाथों के साथ आईने में देखा।

कहानी आगे बढ़ती है

एक रात, जब उसकी पत्नी निशा सो रही थी, रवि ने खुद को अचानक अपने स्टडी रूम में पाया। लेकिन उसने वहां पहुंचा कैसे? उसकी याददाश्त बिल्कुल धुंधली हो गई थी। सामने मेज़ पर वही डायरी खुली पड़ी थी और उसमें लिखा था, "अगला कदम उठाओ, सच्चाई तुम्हारे बहुत करीब है।"

रवि को अब डर लगने लगा था कि कहीं वह अपना मानसिक संतुलन तो नहीं खो रहा। उसने अपने ऑफिस के CCTV फुटेज देखने का फैसला किया। जब उसने रिकॉर्डिंग चेक की, तो उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

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फुटेज में, रात 2 बजे वह खुद ऑफिस में घूमता हुआ दिख रहा था, लेकिन उसे इसकी कोई याद नहीं थी! और सबसे खतरनाक बातकैमरे में दिखने वाला रवि, असल रवि से थोड़ा अलग लग रहा थाजैसे उसका "दूसरा चेहरा"।

रवि ने अपनी पत्नी को यह सब बताना चाहा, लेकिन उसे डर था कि वह उसे पागल समझेगी। अगले दिन, उसने उस डायरी को दोबारा पढ़ा और आखिरी पन्ने पर लिखा था "अगर तुम इसे पढ़ रहे हो, तो तुम्हारा असली चेहरा जाग चुका है। अब सच को स्वीकार करो, वरना तुम्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

उस रात रवि के घर की बिजली चली गई। जैसे ही वह टॉर्च लेकर नीचे गया, उसे एक परछाईं दिखी। वह किसी इंसान की परछाईं थी, लेकिन जब उसने नज़दीक जाकर देखा, तो वह कोई और नहीं बल्कि वह खुद था।

कहानी का अगला मोड़

"तुम कौन हो?" रवि ने कांपते हुए पूछा।

"मैं तुम्हारा असली रूप हूँ," उस परछाईं ने कहा। "तुम्हें कुछ याद नहीं, लेकिन मैं जानता हूँ कि तुम कौन हो।"

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रवि को अचानक कुछ याद आने लगा। कुछ साल पहले, वह एक एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हुआ था, और उसके बाद से उसकी याददाश्त में कुछ खाली जगहें थीं।

"क्या मैंने कुछ गलत किया है?" रवि ने कांपते हुए पूछा।

"हां," परछाईं बोली, "लेकिन तुम्हें सच जानने के लिए उस जगह पर वापस जाना होगा जहां यह सब शुरू हुआ था।"

अगले दिन, रवि उसी पुराने एक्सीडेंट स्पॉट पर गया। वहां एक बूढ़ा आदमी मिला, जिसने बताया कि उस रात रवि अकेला नहीं थावह किसी की हत्या करके भाग रहा था। लेकिन सिर में चोट लगने की वजह से उसकी याददाश्त चली गई थी।

"तुम्हें अपनी असली पहचान फिर से स्वीकार करनी होगी," बूढ़े ने कहा।

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रवि समझ नहीं पा रहा था कि वह असली रवि है या दूसरा चेहरा? सच उसे धीरे-धीरे निगल रहा था।

क्या रवि एक अपराधी था? या कोई उसके साथ खेल खेल रहा था?

रवि अब दो रास्तों के बीच फंसा थाया तो वह अपना दूसरा चेहरा स्वीकार कर ले या फिर हमेशा के लिए अंधेरे में खो जाए।

रवि ने इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए एक गहरी रात का चुनाव किया। उसने वही पुरानी जगह चुनी, जहाँ वह एक्सीडेंट में शामिल था। उसी जगह, जब वह खड़ा था, उसे अचानक एक और आवाज सुनाई दी। यह आवाज वही थी, जो उसे पहले उस परछाईं से मिली थी।

"तुमने जो किया है, उसे बदलने की कोशिश नहीं करना। तुम्हारी किस्मत तय हो चुकी है," आवाज ने कहा। रवि को अब यह समझ में आ गया कि उसकी जिंदगी के कई राज हैं, जो कभी खुलने नहीं चाहिए थे।

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रवि ने ठान लिया कि वह इस रहस्य का सामना करेगा, चाहे जो हो। उसने अपना नाम बदलने का फैसला किया। वह इस दुनिया से छुपकर कहीं दूर चला जाना चाहता था, ताकि वह अपने असली चेहरे से बच सके।

लेकिन जिस दिन उसने अपने नए जीवन की शुरुआत करने का सोचा, उसी दिन उसे एक और पैकेज मिला। इस बार, उस पैकेज में एक और डायरी थीजिस पर लिखा था "तुम्हारा दूसरा चेहरा फिर से जाग चुका है"। रवि अब पूरी तरह से उलझ चुका थाक्या वह कभी भी इस जीवन से बाहर निकल सकेगा?

अब रवि को यह एहसास हो चुका था कि उसका दूसरा चेहरा उसके पीछे हमेशा रहेगा, और जितनी बार वह उससे बचने की कोशिश करेगा, वह उतना ही करीब आ जाएगा।

एक दिन, रवि ने आखिरी बार अपने पुराने घर की ओर रुख किया। वहां एक लिफाफा पड़ा था, जिस पर उसका नाम लिखा था। उसे यह देख कर आश्चर्य हुआ कि वह लिफाफा उसी अजनबी से आया था, जिसने उसे वह पहली डायरी भेजी थी।

उसने लिफाफा खोला और उस लिफाफे के अंदर वही कागज थाजिस पर लिखा था, "तुम्हारा असली चेहरा फिर से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन अब तुम्हारी पहचान खत्म हो चुकी है।"

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रवि अब यह समझ चुका था कि उसकी कहानी कभी खत्म नहीं होगी। उसका दूसरा चेहरा हमेशा के लिए उसे घेरने वाला था, और कोई भी भागने का रास्ता नहीं था।