एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक चालाक सियार और उसके कुछ साथी रहते थे। सियार जंगल का सबसे चतुर जानवर था और हमेशा अपने दोस्तों को अपनी समझदारी से प्रभावित करता था। वह किसी भी समस्या से बाहर निकलने का तरीका जानता था और उसके साथियों को भी अपनी योजनाओं में शामिल करता था।

एक दिन, सियार और उसके साथी जंगल में शिकार की तलाश में निकले। दिनभर जंगल में घूमने के बाद, उन्हें एक बड़ी बकरी दिखी। यह बकरी बहुत ही मोटी और तंदुरुस्त थी। सियार ने बकरी को देख कर कहा, "यह शिकार बहुत बढ़िया होगा! हमें इसे पकड़ना चाहिए।" लेकिन उसके साथी डर गए, क्योंकि बकरी बहुत ताकतवर थी और उन सभी से कहीं ज्यादा बड़ी थी।

सियार ने अपने दोस्तों को समझाया, "अगर हम सब मिलकर इसे घेर लें तो हम इसे पकड़ सकते हैं। मैं इसे ललचाऊंगा और तुम लोग इसका पीछा करके इसे पकड़ लोगे।" उसकी बातों से उसके साथी सहमत हो गए, और सबने मिलकर योजना बनाई। सियार ने बकरी के पास जाकर कहा, "तुम बहुत सुंदर हो, क्या तुम मेरे साथ चलकर जंगल के दूसरे हिस्से में नहीं चलोगी? वहां बहुत अच्छे घास हैं।" बकरी, जो कि हमेशा किसी नए स्थान पर घास खाना पसंद करती थी, सियार की बातों में आ गई और वह उसके पीछे चलने लगी।

जैसे ही बकरी कुछ दूर आगे बढ़ी, सियार ने अपने दोस्तों को इशारा किया और वे सब मिलकर बकरी को घेरने लगे। लेकिन तभी बकरी ने एक जबरदस्त दहाड़ मारी और अपने पूरे शरीर से सियार और उसके साथियों को धक्का दे दिया। सियार और उसके साथी भागते हुए जंगल में छिप गए। बकरी ने अपनी ताकत से उन्हें खदेड़ दिया।

सियार और उसके साथी जंगल के एक कोने में जाकर छिप गए। वे समझ गए कि बकरी से शिकार करना आसान नहीं था, क्योंकि वह बहुत मजबूत थी। सियार ने अपने दोस्तों से कहा, "हमारे पास बकरी को पकड़ने का कोई और तरीका नहीं है। हमें अपना दिमाग लगाना होगा।" फिर सियार ने एक नई योजना बनाई।

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अगली सुबह, सियार ने बकरी के पास जाकर कहा, "तुम बहुत ही बलशाली हो, बकरी। तुम्हारे जैसा कोई नहीं है। मुझे लगता है कि तुम जंगल के राजा बन सकती हो। क्या तुम जंगल के राजा बनने के लिए मेरे साथ एक चुनौती नहीं लेना चाहोगी?" बकरी, जो कि थोड़ी घमंडी और आत्ममुग्ध थी, सियार की बातों में आ गई और उसने कहा, "ठीक है, मैं जंगल की राजीनी बन सकती हूँ।"

सियार ने बकरी को एक बड़ी चुनौती दी - "तुम जंगल के सबसे बड़े जानवर को हराकर दिखाओ।" बकरी ने चुटकी में सहमति दी, क्योंकि उसे अपनी ताकत पर पूरा विश्वास था। सियार ने उसे जंगल में जाने के लिए कहा जहां एक भयंकर बाघ रहता था। बकरी यह नहीं जानती थी कि सियार उसे बाघ से मिलवाने की योजना बना रहा था।

जैसे ही बकरी बाघ के पास पहुंची, सियार ने बाघ को यह कहते हुए इशारा किया, "यह जंगल का नया राजा है, वह तुमसे ज्यादा ताकतवर है।" बाघ ने बकरी को देखा और फिर सियार से पूछा, "क्या यह सच है?" सियार ने कहा, "हां, यह सच है।" बाघ ने बकरी से कहा, "तुम जंगल के राजा बनने का दावा करती हो, तो हमें मुकाबला करना होगा।" बकरी डर के बजाय समझदारी से बोली, "तुमसे मुकाबला करने से अच्छा है कि हम मिलकर जंगल के बाकी जानवरों के खिलाफ एक साथ काम करें।"

बाघ और बकरी के बीच बातचीत होने लगी, और इसी दौरान सियार अपने दोस्तों के साथ चुपके से वहां से निकल गया। उसने बकरी के दिमाग में यह विचार डाला कि जंगल के जानवरों के खिलाफ एकजुट होकर काम करना चाहिए, लेकिन असल में उसकी योजना थी कि बकरी को फंसाकर उसे कुछ समय के लिए बहलाया जाए।

इस प्रकार, सियार और उसके साथियों ने अपनी चालाकी से बकरी को हराया और उसे जंगल से बाहर कर दिया। बकरी ने यह सिखा कि आत्ममुग्धता और घमंड से किसी को भी जीतना आसान नहीं होता, और सच्चे दोस्तों का साथ हमेशा महत्वपूर्ण होता है।

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यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी भी किसी के घमंड को उसकी असल ताकत समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। समझदारी और सही योजना से किसी भी समस्या का हल निकाला जा सकता है। दोस्ती और सहयोग से हमेशा बड़ी समस्याओं को भी आसानी से सुलझाया जा सकता है।