एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल का राजा था, और सभी जानवरों से उसकी बहुत इज्जत थी। लेकिन शेर को कभी अकेलापन महसूस होता था, क्योंकि उसके पास कोई सच्चा मित्र नहीं था। जंगल में बहुत से जानवर रहते थे, लेकिन शेर किसी से भी खुलकर बात नहीं कर पाता था, क्योंकि उसकी शेर की ताकत से सभी डरते थे।
एक दिन शेर ने सोचा, "क्या फायदा ताकत का, अगर मेरे पास कोई सच्चा मित्र नहीं है?" इस विचार के साथ उसने जंगल में घूमते हुए एक खरगोश को देखा, जो शांतिपूर्वक अपने बिल में खेल रहा था। शेर ने उसे देखा और पास जाकर कहा, "तुम क्यों इतने खुश हो, क्या तुम्हें डर नहीं लगता कि मैं तुम्हें खा लूँगा?"
खरगोश ने शेर से कहा, "मुझे आपसे डर नहीं लगता, क्योंकि मैं जानता हूँ कि आप अच्छे हैं। आप जितने ताकतवर हैं, उतने ही दयालु भी हैं।" शेर को यह बात सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ। उसने खरगोश से कहा, "तुम मुझे सच्चा मित्र बनाना चाहोगे?"
खरगोश ने खुश होकर कहा, "हां, क्यों नहीं! अगर आप मुझे अपना मित्र बना लेते हैं, तो मुझे गर्व होगा।" शेर ने खरगोश को अपना मित्र बना लिया और दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। अब शेर और खरगोश हर दिन एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। शेर ने देखा कि जब उसके पास एक सच्चा दोस्त था, तो वह ज्यादा खुश महसूस करता था।
एक दिन जंगल में एक बड़ा संकट आ गया। जंगल में कुछ शिकारी आए और उन्होंने शेर को पकड़ने का जाल बिछा लिया। शेर, जो अपनी ताकत पर बहुत भरोसा करता था, जाल में फँस गया और वह बाहर नहीं निकल पाया। शिकारी ने शेर को पकड़ लिया और उसे बंधक बना लिया।
जब खरगोश ने यह देखा, तो वह बहुत दुखी हुआ। उसने शेर को बचाने का निश्चय किया। वह तुरन्त जंगल में दौड़ा और शिकारी के पास गया। वह अपनी छोटी सी बुद्धिमानी से शिकारी के सामने खड़ा हुआ और कहा, "शेर को छोड़ दो, नहीं तो मैं तुम्हें जंगल में सभी जानवरों के बारे में बता दूंगा, जो तुम्हें पकड़ने आएंगे।" शिकारी हंसा और बोला, "तुम एक छोटा सा खरगोश क्या कर सकते हो?"
खरगोश ने कहा, "मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पास बहुत से हथियार हैं, लेकिन अगर तुम शेर को छोड़ दो, तो तुम्हारे लिए बहुत अच्छा होगा। वह जंगल का राजा है और उसकी मदद से तुम बहुत कुछ पा सकते हो।" शिकारी ने यह सोचा कि खरगोश सही कह रहा है, और उसने शेर को छोड़ दिया।
शेर को जब पता चला कि उसके मित्र खरगोश ने उसे बचाया, तो वह बहुत खुश हुआ। उसने खरगोश का धन्यवाद किया और कहा, "तुमने मेरी जान बचाई। तुम एक सच्चे दोस्त हो, और इस दोस्ती का कोई मूल्य नहीं हो सकता।" खरगोश ने कहा, "सच्चे दोस्त कभी एक-दूसरे को अकेला नहीं छोड़ते।"
शेर ने अब समझ लिया था कि दोस्ती ताकत से बड़ी होती है। वह जानता था कि अगर वह अकेला होता, तो वह शिकारी के जाल में फंसकर मर सकता था, लेकिन खरगोश ने उसकी मदद की और उसे बचाया। शेर ने यह सिखा कि सच्ची दोस्ती का मतलब केवल साथ रहना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ देना है।
इसके बाद से शेर और खरगोश का रिश्ता और भी मजबूत हो गया। वे दोनों हर संकट का सामना मिलकर करने लगे। जंगल के सभी जानवरों ने उनकी दोस्ती को देखा और महसूस किया कि सच्चे दोस्ती में शक्ति और साहस दोनों होते हैं।
इस कहानी से यह सिखने को मिलता है कि दोस्ती केवल एक साथ बिताए गए अच्छे समय में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ कठिन समय में खड़ा होना भी सच्ची दोस्ती का हिस्सा है। शेर और खरगोश की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि दोस्ती में ताकत और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।