एक समय की बात है, जंगल में एक शेर रहता था, जो अपनी ताकत और शक्ति के लिए प्रसिद्ध था। वह जंगल का राजा था और सभी जानवर उससे डरते थे। शेर का मानना था कि उसकी ताकत ही सब कुछ है, और उसका कोई भी विरोधी नहीं हो सकता। वह किसी भी जानवर से अपनी बात मनवाने में सक्षम था, और वह अपनी शक्ति का बहुत ज्यादा घमंड करता था।

एक दिन शेर जंगल के राजा की तरह रॉयल अंदाज में घूम रहा था, जब उसने एक माकड़ (बंदर) को देखा। माकड़ था तो छोटा, लेकिन उसकी चतुराई के लिए वह जंगल में जाना जाता था। शेर ने माकड़ को देखकर उसे चुनौती दी, "तुम मुझसे क्या मुकाबला कर सकते हो? क्या तुम नहीं जानते कि मैं इस जंगल का सबसे ताकतवर जानवर हूं?"

माकड़ हंसते हुए बोला, "हे शेर, तुम्हारी ताकत तो बहुत महान है, लेकिन मैं तुम्हें यह बताना चाहता हूं कि केवल ताकत से ही जीत नहीं मिलती। कभी-कभी समझदारी और चतुराई से भी बड़ी चुनौतियां जीती जा सकती हैं।"

शेर ने माकड़ की बातों को अनदेखा किया और कहा, "तुम मुझे समझाने की कोशिश कर रहे हो? मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि ताकत ही सब कुछ है।" शेर ने अपने जबड़े खोले और माकड़ को डराने की कोशिश की, लेकिन माकड़ शांत था।

माकड़ ने शेर से कहा, "तुमसे भिड़ने की मेरी कोई इच्छा नहीं है, लेकिन मैं तुम्हें यह दिखाना चाहता हूं कि ताकत से ज्यादा जरूरी क्या है। तुम अपनी शक्ति को मानते हो, लेकिन तुम्हें इस दुनिया की एक सच्चाई समझनी होगी – 'अहंकार और शक्ति के अति प्रयोग से बहुत से बड़े संकट आ सकते हैं।' मैं चाहता हूं कि तुम मुझसे रेस करों।"

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शेर ने कहा, "रेस? तुम तो मुझसे कहीं भी नहीं जीत सकते। लेकिन ठीक है, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ रेस करूंगा।" यह कहते हुए शेर ने माकड़ को चुनौती स्वीकार कर ली।

रेस की शुरुआत हुई, और शेर तेजी से दौड़ने लगा। माकड़ धीरे-धीरे, लेकिन समझदारी से रेस में शामिल हुआ। शेर को अपनी ताकत पर बहुत भरोसा था, और वह यह सोचने लगा कि माकड़ तो बहुत धीरे-धीरे दौड़ रहा है, इसलिए उसे किसी तरह की चिंता नहीं होनी चाहिए।

जैसे-जैसे रेस आगे बढ़ी, शेर ने देखा कि माकड़ कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। शेर ने यह समझा कि माकड़ तो बहुत पीछे रह गया होगा, और अब उसे जीतने के लिए रुककर आराम करना चाहिए। शेर एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए लेट गया और सो गया।

लेकिन माकड़ ने अपनी चतुराई से रेस जारी रखी। वह किसी शोर से बचने के लिए छिपता हुआ धीरे-धीरे शेर से आगे बढ़ रहा था। माकड़ ने शेर के आराम करने का फायदा उठाया और रेस के अंतिम दौर में पहुंचने से पहले शेर को पीछे छोड़ दिया।

जब शेर की आँखें खुली, तो उसने देखा कि माकड़ रेस जीत चुका है। शेर बहुत हैरान हुआ और उसने माकड़ से पूछा, "तुमने यह रेस कैसे जीत ली? तुम्हारे पास तो मेरी जैसी ताकत नहीं थी, फिर भी तुम जीत गए!"

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माकड़ हंसते हुए बोला, "तुमने यह सोचा कि सिर्फ ताकत से ही कोई जीत सकता है, लेकिन तुम्हें यह समझना चाहिए कि जब तक तुम्हारा दिमाग शांत और समझदार नहीं होगा, तब तक तुम अपनी ताकत का सही उपयोग नहीं कर सकोगे। तुमने आराम करने का निर्णय लिया, जबकि मैंने अपनी चतुराई से रेस जारी रखी।"

शेर को माकड़ की बातों ने गहरी सोच में डाल दिया। उसने महसूस किया कि केवल ताकत ही सफलता की कुंजी नहीं हो सकती। उस दिन के बाद शेर ने अपने घमंड को छोड़ दिया और उसने यह समझा कि कभी-कभी हमें अपनी शक्ति और अहंकार का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि हमें बिना किसी संकट का सामना करना पड़े।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सिर्फ ताकत और घमंड से कोई भी समस्या हल नहीं हो सकती। हमें अपने समझदारी और चतुराई का भी सही समय पर इस्तेमाल करना चाहिए। यह पंचतंत्र की एक बहुत ही प्रेरणादायक कहानी है, जो हमें यह बताती है कि किसी भी समस्या से निपटने के लिए सिर्फ शक्ति नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी की आवश्यकता होती है।

शेर और माकड़ की यह कहानी न केवल जंगल के जानवरों के लिए एक शिक्षा थी, बल्कि यह मानव जीवन में भी उपयोगी है। जब भी हमें अपने जीवन में किसी चुनौती का सामना करना पड़े, हमें यह समझना चाहिए कि शक्ति और समझदारी दोनों का सही संतुलन ही हमें जीत दिला सकता है।