एक समय की बात है, एक घना जंगल था जहाँ पर कई प्रकार के जानवर रहते थे। इस जंगल में एक बड़ा और शक्तिशाली शेर राज करता था। शेर जंगल का राजा होने के नाते सभी जानवरों से डर और आदर करता था। शेर को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था और वह हमेशा अपनी ताकत का प्रदर्शन करता रहता था। एक दिन, शेर को जंगल के एक कोने में मिर्ची का पौधा दिखा। मिर्ची की गंध उसे बहुत तीखी लगी, लेकिन उसे यह देखकर अच्छा लगा कि यह पौधा बहुत अजीब सा था।

शेर ने सोचा, "मुझे यह मिर्ची का पौधा तोड़कर देखना चाहिए। यह कोई छोटा पौधा नहीं हो सकता।" वह मिर्ची के पौधे के पास गया और उसके तने को जोर से खींचकर तोड़ डाला। जैसे ही शेर ने मिर्ची का पौधा तोड़ा, उसकी आँखों में जलन होने लगी और उसकी नाक में जलन की वजह से उसे जोर जोर से छींकने लगी। वह गुस्से में आ गया, क्योंकि उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि मिर्ची ने उसे इतना क्यों चिढ़ाया।

शेर ने सोचा, "मैं तो बहुत ताकतवर हूँ, फिर यह मिर्ची मुझसे कैसे हार सकती है?" गुस्से में आकर शेर ने सोचा कि वह जंगल के सभी जानवरों को यह दिखाएगा कि वह मिर्ची के पौधे से ज्यादा ताकतवर है। वह पूरे जंगल में घूमते हुए सभी जानवरों को अपनी ताकत दिखाने लगा। वह जंगल के सभी जानवरों को अपनी ताकत से डरा रहा था और उन्हें अपनी ताकत का अहसास दिला रहा था।

इस दौरान, जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। लोमड़ी ने देखा कि शेर गुस्से में है और वह पूरी तरह से परेशान है। लोमड़ी ने सोचा, "शेर को गुस्से में देखना ही काफी है, अब मुझे उसे समझाना होगा कि मिर्ची ने उसे क्यों परेशान किया था।" लोमड़ी शेर के पास गई और उसने कहा, "राजा शेर, आप तो जंगल के सबसे ताकतवर जानवर हैं। क्या आपको लगता है कि मिर्ची का पौधा आपकी ताकत को चुनौती दे सकता है?"

शेर ने गुस्से में कहा, "मुझे यह मिर्ची का पौधा बहुत छोटा सा और तुच्छ लगा। लेकिन इसने मुझे इतनी जलन दी, जो मैं सहन नहीं कर सका। अब मैं इसे अपने पैरों तले रौंद दूँगा।" लोमड़ी ने शेर से कहा, "आपकी ताकत पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन कभी-कभी छोटी छोटी चीज़ें भी हमें बहुत परेशान कर देती हैं। आपको यह समझना होगा कि यह मिर्ची का पौधा नहीं, बल्कि आपकी अदूरदर्शिता थी, जिसने आपको तकलीफ दी।"

📚 यह भी पढ़ें बंदर और उसकी शरारतें
बंदर और उसकी शरारतें पढ़ें 'बंदर और उसकी शरारतें', एक पंचतंत्र कहानी जिसमें एक शरारती बंदर की अजीबोगरीब हरकतों के बारे में बताया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी शरारतें भी किसी के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

शेर को लोमड़ी की बातों पर थोड़ा विचार आया। उसे समझ में आया कि कभी-कभी अपनी ताकत का अहंकार ही हमारी कमजोरी बन जाता है। शेर ने लोमड़ी से कहा, "तुमने सही कहा। मुझे अपनी ताकत का अहंकार नहीं करना चाहिए था। मिर्ची के पौधे ने मुझे यह सिखाया कि कभी-कभी छोटी-छोटी बातें भी बड़ी समस्या बन सकती हैं।"

इसके बाद शेर ने मिर्ची के पौधे से दूरी बनाना शुरू कर दी और उसने समझ लिया कि बड़ी ताकत के साथ साथ समझदारी भी ज़रूरी है। लोमड़ी ने शेर को समझाया कि उसे अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करना चाहिए और किसी को भी छोटा नहीं समझना चाहिए। शेर ने सभी जानवरों से माफी माँगी और जंगल में फिर से शांति बनी रही।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमारी ताकत, हमारी समझदारी से अधिक प्रभावी नहीं हो सकती। शेर ने अपनी ताकत का अहंकार किया था, लेकिन मिर्ची के पौधे ने उसे यह सिखाया कि कभी-कभी छोटी चीज़ों से भी बड़ी परेशानी हो सकती है। हमें अपनी ताकत और समझदारी दोनों का सही प्रयोग करना चाहिए।

इस प्रकार, शेर ने मिर्ची से यह शिक्षा ली कि हमें अपनी ताकत का घमंड नहीं करना चाहिए और छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। इससे उसकी समझदारी में सुधार आया और वह और भी बुद्धिमान हो गया। जंगल में फिर से शांति स्थापित हो गई और सभी जानवर शेर के साथ खुशहाल जीवन जीने लगे।