एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक शेर और एक मच्छर रहते थे। शेर जंगल का राजा था, और उसकी ताकत के सामने किसी भी जानवर की नहीं चलती थी। वह जंगल में सबसे बड़ा, सबसे ताकतवर और सबसे भयभीत करने वाला जानवर था। दूसरी ओर, मच्छर बहुत छोटा और नज़रअंदाज किया जाने वाला जीव था, जिसे कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था।
एक दिन शेर जंगल के किनारे सो रहा था, और गर्मी के कारण उसकी नींद गहरी थी। मच्छर को यह मौका मिल गया और वह शेर के पास आकर उसकी नाक में बैठ गया। मच्छर ने शेर की नाक में धीरे-धीरे अपनी चोंच घुसाई और शेर से खून चूसने लगा। शेर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि वह गहरी नींद में था।
कुछ समय बाद, शेर की नींद टूटी और उसने अपनी नाक में एक हल्का सा आभास महसूस किया। वह परेशान हो गया और नाक को जोर से झटका दिया, लेकिन मच्छर को उड़ने का मौका मिला और वह दूर उड़ गया। शेर गुस्से में आ गया और उसने सोचा, "यह क्या मजाक है! एक छोटा सा मच्छर मेरे साथ ऐसा कर गया?" वह झपकी से उठकर पूरी ताकत से अपने पंजों को जमीन पर मारे और मच्छर को फिर से ढूंढने लगा।
मच्छर जानता था कि शेर उसकी ताकत से लाखों गुना ज्यादा शक्तिशाली है, लेकिन वह यह भी जानता था कि अगर वह शेर से युद्ध करेगा, तो वह हार जाएगा। इसलिए उसने सोचा कि शेर को परेशान करने का एक और तरीका है। मच्छर ने शेर के कानों में जाकर धीरे-धीरे चींटी की तरह आवाज़ करना शुरू कर दिया, जिससे शेर और भी परेशान हो गया।
शेर ने सुना कि उसके कानों में कुछ आवाजें आ रही थीं। वह गुस्से से बड़बड़ाते हुए मुंह में दांत भींचकर अपने कानों को खरोंचने लगा, लेकिन मच्छर उसके कानों में खेलता हुआ निकल गया। शेर की परेशानी और बढ़ गई, और वह अब और भी गुस्से में था।
कुछ देर बाद, शेर ने अपने गुस्से को शांत किया और सोचा कि वह कभी भी इस मच्छर के साथ नहीं निपट सकता। उसने फैसला किया कि वह अब शांत रहेगा और मच्छर को अगर फिर से तंग किया तो वह इस छोटे से जीव का पीछा करेगा। मच्छर ने फिर से शेर के नाक में बैठने की कोशिश की, लेकिन शेर ने नाक के पास थोड़ा सा मूव किया और मच्छर को उड़ा दिया।
मच्छर कुछ देर उड़ने के बाद फिर से शेर के पास लौटा। अब मच्छर ने सोचा, "अगर मैं शेर के गुस्से को और बढ़ाऊं तो वह मुझसे हार जाएगा।" मच्छर शेर के पास जाकर फिर से उसकी नाक में घुसा और शेर के खून को चूसने लगा। इस बार शेर ने महसूस किया और झटके से अपनी नाक को हिलाया। मच्छर ने बहुत ही धीरे-धीरे शेर को फिर से परेशान किया।
अब शेर ने ठान लिया कि वह मच्छर को कभी नहीं छोड़ने वाला है। वह गुस्से में आकर जोर-जोर से दहाड़ने लगा। मच्छर ने शेर की आवाज़ सुनी और समझा कि शेर अब पूरी तरह से गुस्से में है, तो उसने सोचा, "अगर मैं इस शेर को फिर से परेशान करूं, तो मुझे नुकसान हो सकता है।" उसने शेर से माफी मांगी और शेर को यह समझाया कि वह सिर्फ अपनी शिकार के लिए शेर के पास आया था, न कि उसकी परेशानी के लिए।
शेर ने मच्छर की बात सुनी और उसने अपने गुस्से को शांत किया। वह जानता था कि मच्छर छोटा है और कोई बड़ा खतरा नहीं पैदा कर सकता। वह मुस्कुराया और कहा, "तुम छोटे हो, लेकिन मैंने तुमसे सीखा कि कभी भी किसी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। किसी भी जीव की ताकत उसकी समझदारी और हिम्मत में होती है, और यह सिखाया है कि कभी भी किसी को छोटा नहीं समझना चाहिए।"
मच्छर ने शेर का धन्यवाद किया और कहा, "मैंने भी सीखा है कि शेर जैसे बड़े जानवर को परेशान करना मुझसे नहीं हो सकता था। मैं अब जंगल में शांति से रहूँगा।" इसके बाद मच्छर शेर से माफी मांगकर उड़ गया और शेर ने फिर से शांति से अपना जीवन जीने का फैसला किया।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी जीव छोटा या बड़ा नहीं होता। शेर और मच्छर की कहानी यह सिखाती है कि हर किसी की अपनी अहमियत होती है और हमें किसी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। कभी-कभी छोटा सा जीव भी हमें सिखा सकता है कि समझदारी और धैर्य से हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं।