एक समय की बात है, जंगल में एक शेर और एक चालाक लोमड़ी रहते थे। शेर जंगल का राजा था, उसकी ताकत के आगे सभी जानवर डरते थे। वहीं लोमड़ी अपनी चतुराई और समझदारी के लिए प्रसिद्ध थी। लोमड़ी के पास कभी भी किसी भी समस्या का समाधान ढूंढ़ने का तरीका था।

एक दिन, शेर बहुत बीमार हो गया। उसे कई दिनों से भूख भी नहीं लगी थी और वह कमजोर हो गया था। उसकी हालत देखकर बाकी जंगल के जानवर परेशान थे। शेर अब अपनी ताकत और सामर्थ्य खो चुका था। सभी जानवर डर रहे थे कि कहीं शेर कमजोर होकर कोई गलत कदम न उठा ले।

एक दिन, लोमड़ी शेर के पास गई और उसने शेर से पूछा, "तुम इतने बड़े और शक्तिशाली शेर हो, फिर तुम्हारी ये हालत क्यों हुई?" शेर ने कहा, "मेरे पास अब ताकत नहीं रही। मैं अब शिकार करने में असमर्थ हूं और भूख के कारण मेरी हालत खराब हो गई है।" लोमड़ी ने कहा, "तुमसे एक बात पूछ सकती हूं, शेर भाई?" शेर ने जवाब दिया, "हां, तुम मुझसे कुछ भी पूछ सकती हो।"

लोमड़ी ने कहा, "क्या तुमने कभी सोचा है कि तुम्हारी शक्ति केवल शारीरिक ताकत से नहीं, बल्कि समझदारी और चतुराई से भी आती है?" शेर को यह सुनकर थोड़ा अजीब सा लगा, लेकिन लोमड़ी ने कहा, "मैं जानती हूं कि तुम बड़ी मुश्किल में हो, लेकिन अगर तुम मेरी बात मानो तो तुम्हारी समस्या का हल ढूंढ़ सकते हो।"

शेर ने पूछा, "क्या तुम मुझे कुछ सलाह दे सकती हो?" लोमड़ी मुस्कुराई और बोली, "तुम्हें सिर्फ अपनी चतुराई का इस्तेमाल करना होगा। तुम जंगल के दूसरे जानवरों को यह विश्वास दिलाओ कि तुम पूरी तरह से ठीक हो गए हो और फिर तुम शिकार करने जा सकते हो। शेर, तुम उन जानवरों को फंसाकर आसानी से शिकार कर सकते हो, क्योंकि उनकी नज़र में तुम एक ताकतवर शेर ही रहोगे।"

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शेर ने लोमड़ी की सलाह मानी और उसने यह तय किया कि वह अपनी बीमारी के बावजूद जंगल के जानवरों के सामने अपनी ताकत का दिखावा करेगा। उसने जंगल के बीच में आकर जोर-जोर से दहाड़ लगाई। उसकी दहाड़ सुनकर सारे जानवर डर के मारे इधर-उधर भाग गए। शेर ने उनके डर का फायदा उठाया और धीरे-धीरे शिकार करना शुरू कर दिया।

कुछ ही दिनों में शेर फिर से ताकतवर महसूस करने लगा। उसने महसूस किया कि लोमड़ी की समझदारी ने उसे फिर से ताकतवर बना दिया। शेर ने लोमड़ी को धन्यवाद दिया और कहा, "तुम्हारी सलाह ने मुझे मेरी खोई हुई ताकत वापस दिलाई। अब मुझे यह समझ में आ गया है कि सिर्फ शारीरिक ताकत से काम नहीं चलता, समझदारी और चतुराई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।"

लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुमने सही समझा शेर भाई। कभी भी किसी मुश्किल में समझदारी से काम लो। ताकत से ज्यादा चतुराई और बुद्धिमानी की जरूरत होती है।" शेर ने अब यह सीखा कि अगर ताकत और समझदारी का सही संयोजन हो, तो कोई भी समस्या हल की जा सकती है।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ताकत और समझदारी दोनों का मिलाजुला उपयोग ही हमें किसी भी मुश्किल से बाहर निकाल सकता है। शेर ने अपनी शारीरिक ताकत के साथ-साथ अपनी समझदारी का भी इस्तेमाल किया और लोमड़ी ने अपनी चतुराई से शेर को फिर से अपनी ताकत का एहसास कराया।

इस पंचतंत्र की कहानी 'शेर और चालाक लोमड़ी' हमें यह सिखाती है कि अगर हम केवल अपनी शारीरिक ताकत पर निर्भर रहते हैं, तो कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं पा सकते। समझदारी और चतुराई का सही इस्तेमाल ही हमारी असली ताकत होती है।

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इस कहानी में शेर ने यह सीखा कि ताकत का सिर्फ एक हिस्सा होता है। असली ताकत तब होती है जब हम अपनी समझदारी का इस्तेमाल करते हैं। लोमड़ी ने शेर को यह सिखाया कि समझदारी से कोई भी मुश्किल हल की जा सकती है।