एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक सारस और एक बकरा रहते थे। दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे, हालांकि उनके जीवन के तरीके और रहन-सहन में काफी फर्क था। सारस एक बहुत अच्छा उड़ने वाला पक्षी था, जो आकाश में उड़ने के अलावा जमीन पर भी बहुत हल्का-फुल्का और चपल था। वहीं बकरा बहुत ताकतवर था, लेकिन उसकी गति इतनी तेज़ नहीं थी, और वह ज़मीन पर ही रहता था।

एक दिन सारस ने बकरे से कहा, "तुम जानते हो, मैं आकाश में उड़ता हूं, लेकिन कभी-कभी मुझे महसूस होता है कि ज़मीन पर चलने की भी अपनी विशेषताएँ हैं। तुम्हारी तरह ताकतवर होने का मज़ा मुझे कभी नहीं मिला।" बकरा हंसते हुए बोला, "तुम ठीक कहते हो। मैं ज़मीन पर चलता हूं, लेकिन मुझे हमेशा यह ख्वाहिश होती है कि काश मैं तुम्हारी तरह उड़ सकता। आकाश में उड़ना बहुत मज़ेदार होगा।"

दोनों ही एक-दूसरे की विशेषताओं को लेकर आर्कर्षित थे, और एक दिन सारस ने बकरे से कहा, "अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें उड़ना सिखा सकता हूँ।" बकरा थोड़ी देर सोचते हुए बोला, "क्या तुम मुझे सच में उड़ाना सिखा सकते हो?" सारस ने हंसी में कहा, "बिल्कुल! तुम मेरी मदद से आकाश में उड़ सकते हो।" बकरा बहुत खुश हुआ और उसने अपनी योजना को साकार करने का निर्णय लिया।

अगले दिन सारस ने बकरे से कहा, "हम सुबह-सुबह शुरुआत करेंगे। तुम अपनी पीठ पर बैठ जाओ और मैं तुम्हें अपनी उड़ान में शामिल करूंगा।" बकरा बहुत खुश था, लेकिन उसे यह भी चिंता थी कि क्या वह आकाश में सही से उड़ पाएगा। उसने विश्वास से कहा, "मैं तुम्हारी मदद पर विश्वास करता हूँ, सारस।"

सारस ने बकरे को अपनी पीठ पर बैठाया और उड़ने के लिए आकाश में उड़ा। बकरा पहली बार आकाश में उड़ते हुए बहुत खुश हुआ। वह जमीन से बहुत ऊँचा उड़ रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि आकाश की हवा उसके शरीर को बहुत हल्का बना देती थी। वह बहुत खुश था क्योंकि उसकी इच्छा पूरी हो रही थी।

📚 यह भी पढ़ें बंदर और उसकी शरारतें
बंदर और उसकी शरारतें पढ़ें 'बंदर और उसकी शरारतें', एक पंचतंत्र कहानी जिसमें एक शरारती बंदर की अजीबोगरीब हरकतों के बारे में बताया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी शरारतें भी किसी के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

लेकिन जैसे ही दोनों ऊँचाई पर पहुँचे, बकरा डरने लगा। उसे लगा कि कहीं वह गिर न जाए। वह कापते हुए बोला, "सारस, मुझे बहुत डर लग रहा है। मैं ऊपर बहुत ऊँचा उड़ने के लिए तैयार नहीं हूँ।" सारस ने उसे शांत किया और कहा, "तुम घबराओ मत, मैं तुम्हें सुरक्षित रखूँगा। बस मेरे साथ विश्वास रखो।"

लेकिन अचानक एक तेज़ हवा का झोंका आया और बकरा डगमगाने लगा। वह डर के मारे जोर-जोर से चिल्लाया, "मुझे नीचे उतारो, मुझे नीचे उतारो!" सारस ने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन हवा इतनी तेज़ थी कि वह बकरे को नीचे नहीं उतार पा रहा था। कुछ ही देर में बकरा हवा के झोंके में फिसलता हुआ नीचे गिरने लगा।

सारस ने देखा कि बकरा नीचे गिर रहा है और तुरंत अपनी उड़ान को तेज़ करते हुए बकरे के पास पहुँच गया। उसने अपनी चोंच से बकरे को अपनी पकड़ में लिया और उसे धीरे-धीरे जमीन पर लाया। बकरा डरा हुआ था, लेकिन उसने देखा कि सारस ने उसकी जान बचाई थी। बकरा बहुत डर के बावजूद खुश था क्योंकि उसके दोस्त ने उसे बचा लिया था।

जमीन पर पहुंचने के बाद बकरा ने सारस से कहा, "तुम्हारे बिना मैं आज अपनी जान गवा बैठता। तुम्हारी मदद ने मुझे बचा लिया। मैं अब जानता हूँ कि तुम मेरे सच्चे दोस्त हो।" सारस मुस्कुराते हुए बोला, "दोस्ती का मतलब ही यही है, बकरा। हम एक-दूसरे की मदद करते हैं, और एक-दूसरे के डर को समझते हैं। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।"

उस दिन के बाद से बकरा और सारस की मित्रता और भी मजबूत हो गई। बकरा अब जानता था कि दोस्ती में कभी भी किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए, बल्कि हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। सारस ने बकरे को समझाया कि हमें अपनी सीमाओं के अंदर ही खुश रहना चाहिए और जो हम कर सकते हैं, वही सबसे बेहतर है।

📚 यह भी पढ़ें हाथी और हाथी का बच्चा
हाथी और हाथी का बच्चा पढ़ें 'हाथी और हाथी का बच्चा', एक पंचतंत्र कहानी जिसमें हाथी और उसके बच्चे के बीच के रिश्ते, समझदारी और संघर्ष को दर्शाया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि परिवार के सदस्य एक-दूसरे की मदद से किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

दोनों दोस्तों ने यह समझ लिया कि हर किसी की अपनी खासियत होती है, और सच्ची मित्रता वही है, जब हम एक-दूसरे की मदद करते हैं, चाहे हम एक-दूसरे से कितने भी अलग क्यों न हों। यही असली दोस्ती है - जहां विश्वास, मदद और समर्थन एक-दूसरे के बीच बंधन बनते हैं।