टॉमी गाँव का कुत्ता था, पर उसका ठिकाना गाँव में नहीं था। वह दिन में गलियों में घूमता और रात को जंगल के किनारे वाले पेड़ के नीचे सो जाता। लोग कहते थे कि वहाँ सोना ख़तरनाक है। टॉमी ने जगह कभी नहीं बदली। जिस रात जंगल से कोई आवाज़ आती, वह सबसे पहले उठता, और गाँव की तरफ़ मुँह करके भौंकना शुरू कर देता।

गाँव में उसे बहादुर माना जाता था और इस बात पर कभी बहस नहीं हुई।

सच यह था कि टॉमी लड़ नहीं सकता था। कुत्ता तेंदुए से नहीं लड़ता। जो कुत्ता लड़ने जाता है वह मारा जाता है, और यह हर कुत्ता जानता है।

टॉमी जो कर सकता था, वह एक ही चीज़ थी। वह ख़बर दे सकता था।

और ख़बर देने के लिए उसे वहाँ होना पड़ता था जहाँ ख़बर बनती है, यानी जंगल और गाँव के बीच में। वह वहीं सोता था।

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यह उसने चुना नहीं था। वह वहाँ इसलिए सोता था कि गाँव के भीतर उसे जगह नहीं मिली थी। भीतर पहले से कुत्ते थे और उन्होंने उसे भगा दिया था, और यह उसकी जवानी की बात है, जब वह हारा था।

जो जगह किसी को हारकर मिली हो, वह बाद में उसकी ख़ूबी मान ली जाती है। गाँव के पास इसका कोई और तरीक़ा नहीं था।

टॉमी साल में तीन-चार बार भौंकता था।

यह गिनती अजीब लगती है और यही उसकी असली बात है। कुत्ता जब भी कुछ हिले तब भौंके, तो कोई नहीं उठता। टॉमी सिर्फ़ तब भौंकता था जब जंगल की तरफ़ से कुछ आ रहा हो और वह भी बड़ा हो।

बाक़ी सब पर वह चुप रहता था। सियार पर नहीं भौंकता था। ख़रगोश पर नहीं। साइकिल पर तो बिलकुल नहीं।

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यह उसने सीखा था और सीखने में उसे बरस लगे थे। शुरू के बरसों में वह भी हर चीज़ पर भौंकता था, जैसे सब कुत्ते भौंकते हैं। फिर उसने एक चीज़ देखी। जिस रात वह ज़्यादा भौंकता, अगली रात लोग खिड़की तक नहीं खोलते। और जिस रात वह चुप रहता, उस रात अगर वह एक बार भी बोल दे तो दरवाज़े खुल जाते हैं। कुत्ता हिसाब नहीं लगाता। पर वह वही करता रहता है जिससे नतीजा निकलता है, और यही हिसाब लगाने जैसा दिखता है।

इसलिए जिस रात वह भौंकता, गाँव में हर घर में कोई न कोई उठ जाता था। लोग उसकी आवाज़ पहचानते थे और उसका मतलब जानते थे।

बारह बरस में उसने पाँच बार भैंस बचाई, दो बार बछड़ा, और एक बार वह हुआ जिसे कोई गिनता नहीं, क्योंकि उसमें कुछ हुआ ही नहीं। एक रात वह भौंका, तीन घर के लोग उठे, लालटेन जलीं, और जो भी आ रहा था वह लौट गया।

इन आठ मौक़ों के बीच में कुल मिलाकर बारह बरस पड़ते हैं और उन बारह बरसों की बाक़ी सारी रातें ख़ाली गईं। उन ख़ाली रातों में टॉमी वहीं सोता रहा, बारिश में भी, जाड़े में भी, और जाड़े में जंगल के किनारे की ज़मीन गाँव के भीतर की ज़मीन से ठंडी होती है। यह क़ीमत उसने रोज़ चुकाई और इसका ज़िक्र किसी क़िस्से में नहीं आता, क्योंकि इसमें देखने लायक़ कुछ नहीं है।

टॉमी बूढ़ा हुआ और बूढ़ा होने पर उसके कान पहले गए।

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इसके बाद वह ग़लतियाँ करने लगा। दो बार वह ऐसी रात में भौंका जिसमें कुछ नहीं था और एक बार ऐसी रात में नहीं भौंका जिसमें कुछ था, हालाँकि उस रात कोई नुक़सान नहीं हुआ। गाँव ने इसे नज़रअंदाज़ किया, जैसे पुराने आदमी की ग़लती नज़रअंदाज़ की जाती है।

उन्हीं दिनों गाँव में एक जवान कुत्ता आ गया। वह कहीं और से आया था और वह चौपाल के पास सोने लगा, जो गाँव के बीच में है और जहाँ रात को लोग रहते हैं।

वह बहुत ज़्यादा भौंकता था और हर वक़्त भौंकता था।

वह हर आने-जाने वाले पर भौंकता था। साइकिल पर, बकरी पर, दूसरे कुत्ते पर, और कई बार बिना किसी वजह के। रात में उसकी आवाज़ चालीस बार तक सुनी जा सकती थी।

गाँव को यह अच्छा लगा। लोगों ने कहा कि यह चौकन्ना है।

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यह ग़लतफ़हमी समझने लायक़ है। भौंकना सुनाई देता है और चुप रहना सुनाई नहीं देता। इसलिए जो ज़्यादा भौंके, वह ज़्यादा काम करता हुआ लगता है।

टॉमी उस जाड़े में मरा। किसी को ठीक-ठीक दिन याद नहीं।

अगली गर्मी में एक रात बछड़ा गया।

वह जवान कुत्ता उस रात भी भौंका था। वह उससे पहले वाली रात भी भौंका था और उससे पहले वाली भी। कोई नहीं उठा और किसी को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उठने वाले भी सुबह काम पर जाते हैं।

सुबह जब बछड़े का पता चला, तो लोगों ने सबसे पहले यह कहा कि कुत्ते ने बताया क्यों नहीं।

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उसने बताया तो था, और पूरी रात बताया था।

इसके बाद गाँव ने वह काम किया जो गाँव करते हैं। उन्होंने वजह जगह में ढूँढ़ी।

तय हुआ कि जवान कुत्ते को उसी पेड़ के नीचे रखा जाए जहाँ टॉमी सोता था। कुछ लोगों को यह पक्का लग रहा था कि जगह में ही कुछ है।

उसे वहाँ बाँध दिया गया, क्योंकि बिना बाँधे वह लौट आता था।

अब वह वहीं से भौंकता है। रात में चालीस बार। जंगल की तरफ़ से आने वाली हर चीज़ पर और गाँव की तरफ़ से आने वाली हर चीज़ पर, और उन दोनों में उसने कभी फ़र्क़ नहीं किया।

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पेड़ वही है और जगह वही है। जो चीज़ बदल गई है, वह गिनती है।