एक समय की बात है, एक घने जंगल के पास एक साधू बाबा रहते थे। वह बहुत ही शांत और बुद्धिमान थे, और उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को सही रास्ते पर चलने की शिक्षा देना था। साधू का आश्रम जंगल के किनारे स्थित था और वह हर दिन ध्यान और प्रार्थना में लीन रहते थे। पास के गाँव के लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे और उनका आशीर्वाद लेने के लिए आते थे।

एक दिन, जंगल में एक सियार ने देखा कि साधू बाबा अपने आश्रम में अकेले बैठे ध्यान लगा रहे थे। सियार बहुत ही चालाक और शरारती था। उसे यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि साधू बाबा ध्यान में लीन हैं और उनका ध्यान भंग करना आसान होगा। सियार ने सोचा, "अगर मैं साधू बाबा को धोखा दे सकता हूँ, तो मुझे जंगल में रहने वाले जानवरों के बीच बहुत इज्जत मिलेगी।"

सियार धीरे-धीरे साधू बाबा के पास आया और बोला, "हे साधू बाबा! मैं एक साधारण सियार हूँ, लेकिन मुझे बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त है। मुझे यह आभास हुआ कि मुझे अपनी शक्ति का उपयोग करने से पहले आपसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।"

साधू बाबा ने आँखें खोलते हुए कहा, "तुम कौन हो और तुम्हारी क्या इच्छा है, बताओ?" सियार ने सोचा, "यह सही मौका है, साधू बाबा के सामने अपनी ताकत का दिखावा करना है।" सियार बोला, "मैं एक विशेष शक्तिशाली सियार हूँ, जो अपने शिकार पर नियंत्रण रख सकता है और किसी भी जानवर को आसानी से अपना शिकार बना सकता हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि अगर आप मुझे आशीर्वाद देंगे, तो मैं अपनी शक्तियों को और भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाऊँगा।"

साधू बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, "शक्ति और ज्ञान सच्चे साधकों को मिलते हैं, लेकिन इस शक्ति का उपयोग किसी भी परिस्थिति में अहंकार या दूसरों को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं करना चाहिए। शक्ति का सही उपयोग वही है, जो दूसरों की भलाई के लिए किया जाए।"

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सियार ने यह सुनकर सोचा कि शायद साधू बाबा बहुत समझदार हैं, लेकिन वह चाहता था कि साधू बाबा उसे कुछ विशेष शक्ति दें, ताकि वह बाकी जानवरों को अपना दबदबा दिखा सके। इसलिए सियार ने कहा, "हे बाबा! अगर आप मुझे अपनी शक्ति देंगे तो मैं जंगल में रहने वाले सभी जानवरों को उनके स्थान पर बैठा दूँगा और सबका आदर प्राप्त करूंगा। मुझे विश्वास है कि आप मुझे विशेष शक्ति देंगे।"

साधू बाबा ने कहा, "तुम्हारे पास पहले से ही शक्ति है, लेकिन तुम्हें उसे सही रास्ते पर चलने के लिए इस्तेमाल करना होगा। शक्ति केवल बाहरी रूप से नहीं, बल्कि भीतर से भी आती है।"

सियार ने सोचा कि साधू बाबा की बातों से कुछ हासिल नहीं होने वाला है, इसलिए उसने फिर से कहा, "बाबा, कृपया मुझे एक चमत्कारी शक्ति दीजिए, जिससे मैं जंगल के सभी जानवरों को अपनी बातों में फंसा सकूं।"

साधू बाबा ने शांति से कहा, "तुम एक छोटे से सियार हो, जो अपने दम पर कोई काम नहीं कर सकता। तुम्हें यह समझना होगा कि शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण समझदारी और सही रास्ता है। अगर तुम दूसरों को सिर्फ अपनी शक्ति से डराकर उनका आदर हासिल करना चाहते हो, तो तुम कभी सच्चे सम्मान के योग्य नहीं बन पाओगे।"

सियार ने साधू बाबा की बातों को नजरअंदाज किया और जंगल के सभी जानवरों को डराने और उनका आदर हासिल करने के लिए अपने उपायों की योजना बनाने लगा। वह दिन-रात जंगल में शिकार करने और जानवरों को धमकाने में व्यस्त हो गया। धीरे-धीरे, सियार ने जंगल में अपनी खौ़फनाक पहचान बना ली। वह सभी जानवरों को अपनी शक्ति का भय दिखाता और उन्हें डराकर अपनी बातों को मानने पर मजबूर कर देता।

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लेकिन एक दिन, एक बकरी ने सियार से तंग आकर कह दिया, "तुम केवल अपनी शक्ति और डर से जंगल में अपना राज कायम करना चाहते हो, लेकिन तुम यह नहीं समझ पा रहे हो कि सच्चा सम्मान तब मिलता है, जब हम अपने साथियों का आदर करते हैं और किसी को भी दुःख नहीं पहुंचाते।"

इस पर सियार को समझ में आ गया कि उसका रास्ता गलत था। उसने यह महसूस किया कि शक्ति और डर से तो वह अपना दबदबा बना सकता था, लेकिन सच्चे सम्मान के लिए उसे अपनी चालाकियों और शरारतों को छोड़कर समझदारी से काम लेना होगा।

कुछ दिन बाद, सियार वापस साधू बाबा के पास गया और उनसे अपने व्यवहार पर पछताते हुए माफी मांगी। साधू बाबा ने उसे समझाया, "देखो, सियार! सच्ची ताकत और सम्मान तब ही मिलता है, जब हम अपने कार्यों से दूसरों को फायदा पहुँचाते हैं और उनकी मदद करते हैं।"

सियार ने बाबा की बातों को आत्मसात किया और जंगल के सभी जानवरों से माफी मांगी। उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल जंगल में शांति और सामंजस्य बनाने के लिए करना शुरू किया। अब सियार ने समझ लिया था कि सम्मान शक्ति से नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों और समझदारी से आता है।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि बाहरी शक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है अंदर की शक्ति, समझदारी, और दूसरों के प्रति आदर। हम किसी भी परिस्थिति में अपनी शक्ति का सही इस्तेमाल कर सकते हैं, और यही हमें सच्चा सम्मान दिलाता है।