एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक सांप और एक चुहिया रहते थे। जंगल में हर किसी को अपनी-अपनी ज़िंदगी में व्यस्तता थी, लेकिन इन दोनों की मुलाकात कुछ इस तरह हुई कि दोनों का जीवन एक दूसरे से जुड़ गया। सांप जंगल का सबसे खतरनाक जानवर था, और उसकी डरावनी आँखों और तेज़ फangs से सभी जानवर डरते थे। दूसरी तरफ, चुहिया बहुत छोटी सी, नन्ही सी थी, जो हर समय चूहों की तरह इधर-उधर दौड़ती रहती थी।

एक दिन, जब जंगल में सूखा पड़ गया, तो सभी जानवर भोजन की तलाश में जंगल के अलग-अलग हिस्सों में चले गए। चुहिया को जंगल के एक कोने में एक छोटे से घास के ढेर में कुछ अनाज मिला, जिसे वह बड़ी खुशी से अपने घर में ले जाने की सोच रही थी। उसी समय, वह अचानक सांप से टकरा गई। सांप ने जैसे ही चुहिया को देखा, उसने उसके पास आते हुए कहा, "तुम छोटे से जानवर, क्या तुम मुझसे डरती नहीं हो?"

चुहिया ने सांप को देखा और डरते हुए बोली, "मुझे तुम्हारा डर तो है, लेकिन मुझे तुमसे मदद की उम्मीद है।" सांप ने उसकी बात पर हंसी उड़ाते हुए कहा, "तुम मुझसे मदद चाहती हो? यह दिलचस्प है। बताओ, तुम्हें मेरी मदद किस चीज़ में चाहिए?"

चुहिया ने कहा, "तुम तो बहुत ताकतवर हो, अगर तुम चाहो तो मुझे उस खतरनाक बाघ से बचा सकते हो, जो हमारे जंगल में आकर डर फैलाता है। वह हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या बन चुका है।" सांप ने सोचा, "यह अच्छा अवसर है, इस नन्ही सी चुहिया को मदद करने के बहाने मैं अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकता हूँ।"

सांप ने चुहिया से कहा, "ठीक है, मैं तुम्हारी मदद करूंगा, लेकिन एक शर्त है। जब तुम किसी समस्या में फंस जाओ तो मुझे याद करना।" चुहिया ने तुरंत हां कर दी, और दोनों ने मिलकर बाघ के खिलाफ योजना बनानी शुरू की।

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कुछ दिन बाद, जंगल में बाघ ने हमला किया। वह जंगल के जानवरों को डराकर उनकी परेशानियों को बढ़ा रहा था। जैसे ही सांप और चुहिया ने बाघ को देखा, चुहिया डर के मारे कांपने लगी, लेकिन सांप ने कहा, "तुम डर मत, मैं हूं न!" सांप ने अपनी पूरी ताकत से बाघ का सामना किया और उसे जंगल के बाहर खदेड़ दिया।

बाघ को डराते हुए सांप ने कहा, "तुम इस जंगल में नहीं आ सकते! यहाँ हम सबकी जिंदगी में शांति चाहते हैं, और तुम हमारे लिए खतरनाक हो!" बाघ को इस चुनौती का सामना करने का साहस नहीं था, और वह जल्दी से जंगल से भाग गया।

जंगल के सभी जानवरों ने सांप की बहादुरी की सराहना की और चुहिया ने उसे धन्यवाद दिया। चुहिया ने कहा, "सांप भाई, तुमने मेरी मदद की, और तुमने साबित कर दिया कि ताकत का इस्तेमाल सही उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए।" सांप ने मुस्कुराते हुए कहा, "सचमुच, सच्ची ताकत उसी में है जो दूसरों की भलाई के लिए इस्तेमाल की जाए।"

इस घटना ने जंगल के सभी जानवरों को यह सिखाया कि कभी भी किसी की ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सांप और चुहिया की दोस्ती इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश बन गई। वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए और यह उदाहरण दिया कि हम अपनी परेशानियों का समाधान केवल अपने सामर्थ्य और समझदारी से ही निकाल सकते हैं।

इस तरह, जंगल में शांति और समझदारी का माहौल बना और सभी जानवरों ने मिलकर अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाया। सांप और चुहिया ने अपने उदाहरण से सभी को यह सिखाया कि जीवन में दयालुता और समझदारी सबसे महत्वपूर्ण हैं।

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इस कहानी से हमें यह संदेश मिलता है कि कोई भी समस्या चाहे जितनी बड़ी हो, अगर हमारी नीयत सही हो और हम एक-दूसरे की मदद करें तो हम सब मिलकर उसे हल कर सकते हैं। दया और समझदारी से ही हम दूसरों की मदद कर सकते हैं, और यही सच्ची ताकत है।