एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक प्यारी और चतुर लोमड़ी रहती थी। उसका नाम चपल था और उसकी समझदारी जंगल के सभी जानवरों में प्रसिद्ध थी। वह किसी भी समस्या का हल आसानी से ढूंढ़ लेती थी और उसके पास हमेशा सही समाधान होता था। हालांकि, वह बहुत ही समझदार थी, लेकिन कभी भी अपनी चतुराई का घमंड नहीं करती थी।

एक दिन जंगल में एक समस्या आ गई। जंगल के राजा शेर ने फैसला किया कि सभी जानवरों को हर साल अपनी समझदारी साबित करनी होगी, ताकि शेर यह जान सके कि कौन उनके साम्राज्य में सबसे बुद्धिमान है। इस घोषणा के बाद सभी जानवर एक दूसरे से अपनी समझदारी की परीक्षा लेने लगे।

अब, शेर के सामने आने वाली समस्या यह थी कि उसने अपना फैसला सुनाया था, लेकिन वह नहीं जानता था कि सभी जानवर अपनी समझदारी साबित कैसे करेंगे। उसे अपने दरबार में बुलाए गए सभी जानवरों को देखकर एक समाधान की आवश्यकता थी। शेर ने यह तय किया कि हर जानवर को अपनी चतुराई का एक उदाहरण पेश करना होगा।

सबसे पहले हाथी ने अपनी बारी ली और शेर से कहा, "मैं जंगल का सबसे मजबूत और सबसे बड़ा जानवर हूं, मुझे नहीं लगता कि मुझसे ज्यादा समझदार कोई और होगा।" शेर ने उसकी बात मानी, लेकिन शेर का मन में अब भी यह सवाल था कि क्या सचमुच शक्ति ही समझदारी है।

फिर शेर ने अपनी दरबार में अन्य जानवरों से पूछा, "तुम में से कौन अपनी समझदारी का प्रमाण दे सकता है?" सभी जानवर सोच में पड़ गए, तभी चपल लोमड़ी उठी और कहा, "राजा, मैं भी अपनी चतुराई दिखाना चाहती हूं। मुझे एक मौका दीजिए।" शेर ने कहा, "ठीक है, लोमड़ी, तुम्हें अपनी चतुराई साबित करनी होगी।"

📚 यह भी पढ़ें बंदर और उसकी शरारतें
बंदर और उसकी शरारतें पढ़ें 'बंदर और उसकी शरारतें', एक पंचतंत्र कहानी जिसमें एक शरारती बंदर की अजीबोगरीब हरकतों के बारे में बताया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी शरारतें भी किसी के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

चपल लोमड़ी ने शेर से कहा, "राजा, अगर आप मुझे एक दिन का समय दें तो मैं पूरे जंगल को एक साथ एक ऐसा समाधान दे सकती हूं, जो सबके लिए फायदेमंद हो।" शेर ने सोचा और कहा, "ठीक है, लोमड़ी, तुम एक दिन का समय ले सकती हो। अगले दिन हमें अपने समाधान की जानकारी दो।"

अगले दिन लोमड़ी जंगल के सभी जानवरों के पास गई और उनसे मिलकर उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। उसने सभी जानवरों से उनके मुद्दों के बारे में सुना और फिर जंगल के सबसे समझदार जानवरों से विचार-विमर्श किया। लोमड़ी ने अपने बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए पाया कि जंगल में हर एक जानवर की समस्या का हल हो सकता है, यदि वे आपस में मिलकर काम करें।

वह अगले दिन शेर के पास लौटी और बोली, "राजा, मैंने सभी जानवरों से बात की है और एक ऐसा तरीका सोचा है, जिससे सभी की समस्याओं का समाधान हो सके। सभी जानवरों को अपनी ताकत और समझदारी का मिलाजुला उपयोग करना होगा। अगर हम मिलकर काम करेंगे, तो हम किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं।"

शेर को यह विचार बहुत अच्छा लगा और उसने सभी जानवरों को एक साथ बुलाया। लोमड़ी के विचारों को सभी ने स्वीकार किया और सभी ने मिलकर जंगल में एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें सभी जानवरों को अपनी ताकत, चतुराई, और समझदारी का एक साथ उपयोग करना सिखाया गया। इसके बाद जंगल में कोई समस्या नहीं रही और सभी जानवर खुशी-खुशी रहने लगे।

चपल लोमड़ी ने न केवल अपनी चतुराई का परिचय दिया, बल्कि यह भी सिखाया कि एकता में बहुत ताकत होती है। यदि हम सभी एक साथ मिलकर काम करें, तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं रहती। लोमड़ी ने सभी जानवरों को यह भी सिखाया कि समझदारी केवल किसी एक के पास नहीं होती, बल्कि सबकी मदद से ही हम किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

📚 यह भी पढ़ें हाथी और हाथी का बच्चा
हाथी और हाथी का बच्चा पढ़ें 'हाथी और हाथी का बच्चा', एक पंचतंत्र कहानी जिसमें हाथी और उसके बच्चे के बीच के रिश्ते, समझदारी और संघर्ष को दर्शाया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि परिवार के सदस्य एक-दूसरे की मदद से किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

समय के साथ, लोमड़ी की समझदारी और चतुराई जंगल के सभी जानवरों के लिए प्रेरणा बन गई। शेर ने भी यह समझ लिया कि शक्ति और समझदारी दोनों का एक साथ होना जरूरी है, और उसने यह संदेश जंगल के सभी जानवरों में फैलाया। चपल लोमड़ी की यह कहानी अब जंगल में प्रसिद्ध हो गई, और उसने साबित कर दिया कि सच्ची समझदारी केवल घमंड में नहीं, बल्कि विनम्रता और एकता में होती है।

इस कहानी से यह सिखने को मिलता है कि किसी भी समस्या का हल केवल चतुराई से नहीं, बल्कि मिलजुल कर काम करने से ही पाया जा सकता है। लोमड़ी की तरह हमें भी अपनी समझदारी का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए और सभी के साथ मिलकर किसी भी मुश्किल को हल करना चाहिए।