एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक मुर्गी और एक गाय रहते थे। दोनों में अच्छी दोस्ती थी और वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे। मुर्गी दिनभर अंडे देती थी और गाय खेतों में काम करने वाले किसानों को दूध देती थी। दोनों का जीवन सरल और खुशहाल था।
एक दिन गाँव में एक बडी समस्या उत्पन्न हुई। गाँव के आस-पास के जंगल में एक बड़ा बाघ आ गया था, जो दिन-प्रतिदिन गाँव के खेतों में आकर जानवरों को नुकसान पहुँचाता था। गाँव के लोग डर के मारे घरों में बंद रहने लगे थे और किसी को बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। इस संकट की घड़ी में मुर्गी और गाय ने तय किया कि उन्हें इस समस्या का समाधान खोजना होगा।
मुर्गी और गाय ने सोचा कि वे बाघ से कैसे निपट सकते हैं। मुर्गी, जो छोटी और फुर्तीली थी, ने कहा, "मैं बाघ को अपनी चालाकी से उलझा सकती हूँ और उसे वहाँ से भगा सकती हूँ।" गाय, जो बहुत बड़ी और मजबूत थी, ने कहा, "तुम बहुत होशियार हो मुर्गी, लेकिन अगर मैं उसकी ताकत से मुकाबला करूँ तो क्या होगा?"
मुर्गी ने कहा, "हम दोनों मिलकर काम करेंगे। तुम्हारी ताकत और मेरी चालाकी से हम बाघ को हरायेंगे।" गाय को मुर्गी का भरोसा बहुत अच्छा लगा और दोनों ने योजना बनानी शुरू कर दी। पहले मुर्गी ने बाघ को जंगल में एक जगह देखा और उसके पास जाने का मन बनाया।
मुर्गी ने अपनी छोटी सी चोंच से बाघ के पास जाकर कहा, "हे बाघ भाई, तुम इतने बड़े और ताकतवर हो, तुम्हें कुछ नया करना चाहिए। तुम्हें ये खेत और गाँव छोड़कर जंगल में जाना चाहिए, वहाँ तुम्हें आराम मिलेगा और तुम बिना किसी परेशानी के अपना जीवन जी सकते हो।" बाघ ने मुर्गी की बातों को सुना और हंसते हुए कहा, "तुम छोटी सी मुर्गी मुझे कुछ सिखाना चाहती हो? मैं एक ताकतवर जानवर हूँ, तुम्हारी बातें मुझे नहीं बदल सकतीं।"
मुर्गी ने फिर भी हार मानने का नाम नहीं लिया और उसने कहा, "अगर तुम मुझसे मदद चाहते हो, तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ। लेकिन तुम्हें एक शर्त माननी होगी।" बाघ ने पूछा, "क्या शर्त है?" मुर्गी ने कहा, "तुम्हें मेरे साथ जंगल में चलना होगा और वहाँ का राजा बनना होगा। अगर तुम ऐसा करोगे, तो मैं तुम्हारे सामने कोई परेशानी नहीं लाऊँगी।"
बाघ ने सोचा, "जंगल का राजा बनने से मुझे फायदा होगा।" इसलिए उसने मुर्गी की शर्त मान ली। मुर्गी ने बाघ को जंगल के एक दूरस्थ कोने में ले जाकर एक बड़ी खुली जगह दिखाई और कहा, "यहाँ तुम आराम से रह सकते हो।" मुर्गी के इस व्यवहार ने बाघ को भ्रमित कर दिया और वह किसी तरह यहाँ पर रहकर अपनी भूख को शांत करने लगा।
वहीं गाय ने अपनी ताकत का इस्तेमाल किया और गाँव के जानवरों को एकजुट किया। उसने सभी को समझाया कि अगर वे सब मिलकर बाघ का मुकाबला करेंगे, तो उसे आसानी से हराया जा सकता है। गाय के नेतृत्व में सभी जानवर बाघ का सामना करने के लिए तैयार हो गए थे।
अगले दिन, जब बाघ जंगल में अपनी शिकार की तलाश कर रहा था, तो गाय और अन्य जानवर एकजुट होकर उसके पास पहुँच गए। गाय ने बाघ को चेतावनी दी, "तुम अब हमारे जंगल में नहीं रह सकते। तुम्हारा आतंक यहाँ खत्म होगा।" बाघ ने गाय और जानवरों को देखकर डरने की बजाय हंसते हुए कहा, "तुम सब एक साथ आकर मेरा क्या बिगाड़ सकते हो?"
लेकिन गाय और अन्य जानवरों ने मिलकर बाघ को जंगल से बाहर कर दिया। बाघ ने अपनी हार स्वीकार की और जंगल छोड़ दिया। अब गाँव में फिर से शांति लौट आई थी और सभी जानवर अपनी-अपनी जगह पर सुरक्षित थे।
मुर्गी और गाय की मित्रता और समझदारी ने सबको यह सिखाया कि अगर हम एकजुट होकर काम करें तो कोई भी समस्या हल की जा सकती है। मुर्गी ने अपनी चतुराई से बाघ को उलझाया और गाय ने अपनी ताकत से उसे हरा दिया। दोनों ने मिलकर यह साबित कर दिया कि बुद्धिमानी और बल दोनों की आवश्यकता होती है किसी भी मुश्किल का हल निकालने में।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हमें कोई समस्या आती है, तो हमें अपनी ताकत और बुद्धिमानी का सही इस्तेमाल करना चाहिए। मुर्गी और गाय की तरह अगर हम भी एकजुट होकर काम करेंगे, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होगी।