एक समय की बात है, एक छोटे से तालाब में बहुत सारे मेंढ़क रहते थे। उनमें से एक मेंढ़क था, जो खुद को बहुत ही ताकतवर और श्रेष्ठ समझता था। उसका नाम था कद्रू। कद्रू का मानना था कि वह बाकी सभी मेंढ़कों से बहुत अधिक शक्तिशाली और बुद्धिमान है। उसका घमंड इतना बढ़ चुका था कि वह किसी भी जीव को अपने से कमतर समझता था।
एक दिन कद्रू तालाब के किनारे बैठा हुआ था, जब सूरज की तेज़ किरणों ने उसे चुभा। वह गर्मी से परेशान हो गया और गुस्से में आकर उसने सूरज से लड़ाई की योजना बनाई। उसने सोचा, "सूरज की गर्मी मेरे लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन अगर मैं सूरज से मुकाबला करूंगा, तो यह सब जानवरों के लिए एक संदेश होगा कि कद्रू कितना महान है।" कद्रू ने सूरज को अपनी शक्ति दिखाने का निश्चय किया।
कद्रू सूरज की ओर रुख करते हुए बोला, "सूरज! तुम समझते हो कि तुम्हारी गर्मी से मैं घबरा जाऊं? तुम जितनी चाहो गर्मी डाल सकते हो, लेकिन मैं तुम्हारा मुकाबला करूंगा!" सूरज ने उसकी बातों को सुना और मुस्कुराते हुए कहा, "क्यों कद्रू, तुम्हें लगता है कि तुम मुझसे मुकाबला कर सकते हो? मैं हर समय आकाश में रहता हूं, और मेरी शक्ति से तुम कहीं अधिक छोटे हो।"
कद्रू ने सूरज की बातों को नजरअंदाज किया और अपनी ताकत दिखाने के लिए जोर से चिल्लाया, "देखो सूरज, तुम चाहे जितना भी चमको, मैं तुम्हारी गर्मी को सहन करूंगा। तुम अपनी शक्ति को मुझसे चुनौती देने के लिए नहीं लाओ।" सूरज ने चुप रहकर उसकी बातों का जवाब दिया, "ठीक है, यदि तुम समझते हो कि तुम मुझसे अधिक शक्तिशाली हो, तो तुम्हारे लिए यह परीक्षा होगी।"
कद्रू ने सूरज के साथ मुकाबला करने के लिए तालाब के पानी में कूदकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वह जितना अधिक प्रयास करता, सूरज की गर्मी और तेज़ होती जाती। कद्रू का शरीर जलने लगा, लेकिन वह फिर भी सूरज के खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए था। उसकी ज़िद ने उसे और अधिक घायल कर दिया। कद्रू की स्थिति अब बहुत खराब हो गई थी। वह जल्दी ही थक कर पानी में बैठ गया और सूरज से कहा, "मैं हार मानता हूं, तुम बहुत अधिक शक्तिशाली हो।"
सूरज ने धीरे से कहा, "कद्रू, देखो! यह तुम्हारी जिद थी जो तुम्हें नुकसान पहुंचा रही थी। तुमने अपनी ताकत को समझे बिना मेरी गर्मी से मुकाबला करने की कोशिश की। अगर तुम मेरी शक्ति को समझते और मेरी गर्मी से बचने के लिए कोई उपाय करते, तो तुम इस स्थिति से बच सकते थे। लेकिन घमंड और अति आत्मविश्वास ने तुम्हें कमजोर बना दिया।"
कद्रू को समझ में आ गया कि उसकी घमंड और जिद ने उसे बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया था। वह अब शर्मिंदा था और सूरज से माफी मांगी। सूरज ने उसे समझाया, "हर किसी की ताकत और शक्ति का एक सीमा होती है। यदि तुम अपनी ताकत से अधिक की कोशिश करोगे, तो तुम्हें नुकसान ही होगा। समझदारी से काम लो और कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए।"
कद्रू ने सूरज की बातों को गंभीरता से सुना और अपने अहंकार को नकारते हुए उसे धन्यवाद दिया। अब वह समझ चुका था कि किसी से भी मुकाबला करने से पहले, हमें अपनी सीमाओं को समझना चाहिए। सूरज ने कद्रू को धैर्य रखने और अपनी ताकत का सही तरीके से उपयोग करने की सलाह दी। कद्रू ने अब अपनी गलती को स्वीकार कर लिया और शांति से तालाब में लौट आया।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि कभी भी घमंड और अहंकार से नहीं चलना चाहिए। हमें अपनी ताकत और सीमाओं को समझकर ही किसी भी चुनौती का सामना करना चाहिए। जब हम अपनी ताकत से बाहर की चीजों से मुकाबला करने की कोशिश करते हैं, तो हम सिर्फ अपना नुकसान करते हैं। हमें हमेशा समझदारी से काम लेना चाहिए, और घमंड से बचना चाहिए।
यह पंचतंत्र की कहानी हमें यह सिखाती है कि हर किसी की शक्ति का एक सीमित दायरा होता है। जो लोग अपनी सीमाओं से बाहर जाकर अति आत्मविश्वास के साथ किसी चुनौती का सामना करते हैं, वे अंत में हार जाते हैं। हमें कभी भी अपनी क्षमता और शक्ति से अधिक की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
मेंढ़क और सूरज की यह लड़ाई हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए हमें धैर्य, समझदारी और अपनी शक्ति का सही उपयोग करना चाहिए। हमें अपनी क्षमता को समझकर ही किसी भी काम को करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हम किसी भी समस्या का सही समाधान पा सकें।