एक समय की बात है, एक बड़े नदी के किनारे एक मगरमच्छ और एक बत्तख रहते थे। मगरमच्छ का नाम था 'किरण' और बत्तख का नाम था 'रानी'। दोनों एक-दूसरे के अच्छे दोस्त थे और अक्सर नदी में एक साथ खेलते और समय बिताते थे। बत्तख रानी की चतुराई और मगरमच्छ की ताकत ने दोनों को एक दूसरे का दोस्त बना दिया था।
एक दिन, मगरमच्छ ने रानी से कहा, "रानी, मैं सोच रहा था कि इस नदी के दूसरे किनारे पर एक बहुत बड़ा बाग है। तुमने कभी उस बाग के फल खाए हैं?" रानी ने कहा, "नहीं, मैंने कभी नहीं खाए। लेकिन मुझे बहुत दिलचस्पी है उस बाग के बारे में जानने में।" मगरमच्छ ने कहा, "तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें वहां ले जाऊंगा।"
रानी थोड़ी सी डर गई, क्योंकि मगरमच्छ ने उसे नदी के दूसरे किनारे जाने का प्रस्ताव दिया था, और वह जानती थी कि मगरमच्छ किसी न किसी मौके पर उसे खा सकता था। लेकिन वह बहुत चतुर थी और उसे लगा कि उसे अपनी बुद्धिमानी से ही इस स्थिति से बाहर निकलना होगा। इसलिए, उसने मगरमच्छ से कहा, "ठीक है, मैं तुम्हारे साथ चलूंगी, लेकिन एक शर्त है।"
मगरमच्छ ने सवाल किया, "क्या शर्त है?" रानी ने मुस्कुराते हुए कहा, "जब हम दूसरे किनारे पर पहुंचें, तो तुम मुझे बाग के फल खाने के लिए कुछ समय दो। फिर हम जल्दी से वापस लौट आएंगे।" मगरमच्छ ने सोचा, "यह तो बहुत अच्छा प्रस्ताव है।" उसने हां कह दी, और दोनों नदी के दूसरे किनारे की ओर बढ़ गए।
जब दोनों उस बाग के पास पहुंचे, तो रानी ने वहां के मीठे फल खाए और आनंद लिया। मगरमच्छ खुशी-खुशी फल खा रहा था और उसे लग रहा था कि रानी की शर्त पूरी हो गई है। लेकिन रानी के मन में एक चाल थी, और वह इस समय का फायदा उठाना चाहती थी। उसने सोचा, "अगर मगरमच्छ मुझे खा सकता है, तो मुझे उसे कैसे मात देनी चाहिए?"
रानी ने धीरे-धीरे मगरमच्छ से कहा, "मुझे लगता है कि इस बाग के फल बहुत स्वादिष्ट हैं। क्या तुमने कभी सोचा है कि इस बाग में इतने अच्छे फल क्यों हैं?" मगरमच्छ ने कहा, "यह तो मुझे नहीं पता। शायद इस बाग में कोई खास शक्ति हो सकती है।" रानी ने कहा, "अगर तुम्हारे पास मेरे जैसा दिल और समझ होती तो तुम भी यह समझ सकते कि इस बाग के फल के पीछे एक बहुत बड़ा राज़ छिपा है।"
मगरमच्छ ने रानी की बातों को सुनकर कहा, "तुम्हारा मतलब है कि इस बाग में कोई रहस्य है?" रानी ने कहा, "बिलकुल। लेकिन यह रहस्य मैं तुम्हें तभी बताऊंगी, जब तुम मेरे लिए एक काम करोगे।" मगरमच्छ ने कहा, "क्या काम है?" रानी ने कहा, "तुम्हें वापस लौटने के बाद मुझे नदी के किनारे कुछ समय और रुकने का समय देना होगा।" मगरमच्छ को लगा कि रानी उसकी बातों में फंस गई है, और उसने यह शर्त भी मान ली।
रानी ने अपनी चाल चलने का समय देखा और उसने मगरमच्छ से कहा, "अब हमें वापस लौटना चाहिए।" मगरमच्छ ने रानी की बात मानी और वह वापस नदी की ओर बढ़े। जब वे नदी के पास पहुंचे, तो रानी ने अपनी चतुराई का इस्तेमाल किया और कहा, "अब मुझे नदी के किनारे कुछ समय और रुकने का समय दो।" मगरमच्छ ने तुरंत कहा, "ठीक है, लेकिन फिर हमें तुरंत वापस जाना होगा।"
जैसे ही रानी ने यह पाया कि मगरमच्छ का ध्यान किसी और दिशा में था, उसने अपनी चालाकी का इस्तेमाल करते हुए नदी में कूदने का निश्चय किया। और जैसे ही वह पानी में कूदी, वह तेज़ी से तैरते हुए वापस अपने घर की ओर बढ़ गई।
मगरमच्छ को यह समझने में समय लगा, लेकिन जब वह रानी को वापस नहीं देख सका, तो उसे एहसास हुआ कि रानी ने उसे अपनी चाल में फंसाया था। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने सोचा, "रानी बहुत चतुर है, और उसने मुझे अपनी बुद्धिमानी से हराया।"
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि कभी-कभी हमें दूसरों की चालाकियों को समझने के लिए अपनी चतुराई का इस्तेमाल करना पड़ता है। और यह भी कि अगर हम समझदारी से काम लें तो हम मुश्किल हालात से भी बाहर निकल सकते हैं। रानी ने अपनी समझदारी और चतुराई से मगरमच्छ को हराया और उसे सबक सिखाया।
इस कहानी का संदेश यह है कि किसी भी समस्या का हल केवल ताकत में नहीं, बल्कि समझदारी, चतुराई और बुद्धिमानी से किया जा सकता है। रानी ने अपनी चतुराई से मगरमच्छ के खिलाफ जीत हासिल की और सभी को यह सिखाया कि अपने दिमाग का सही तरीके से इस्तेमाल कैसे किया जाता है।