एक समय की बात है, एक सुंदर और विशाल तालाब में कई प्रकार की मछलियाँ रहती थीं। उनमें से कुछ मछलियाँ बहुत समझदार थीं, जबकि कुछ मछलियाँ थोड़ी चंचल और अनजान थीं। तालाब में मछलियाँ आपस में अच्छे दोस्त बनकर रहती थीं और एक-दूसरे की मदद करती थीं। इस तालाब के किनारे एक छोटी सी मछली रहती थी जिसका नाम गोलू था। गोलू अपने दोस्तों के साथ अक्सर खेलता और आनंदित रहता था।

एक दिन तालाब के पास एक बड़ा संकट आ गया। तालाब में एक बड़ा मगरमच्छ आ गया था। मगरमच्छ ने मछलियों का शिकार करना शुरू कर दिया था। वह अपनी तेज़ धारदार दाँतों से मछलियों को पकड़ कर खा जाता था। तालाब की मछलियाँ बहुत डर गईं और किसी को भी बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। इस संकट में, गोलू ने सोचा कि वह अपनी समझदारी से इस समस्या का हल निकालेगा।

गोलू ने अपनी कुछ दोस्तों, जैसे छोटी सी मछली पिंकी और बड़ी मछली राजू को बुलाया। गोलू ने उन्हें कहा, "हमें इस मगरमच्छ से बचने का कोई रास्ता ढूंढ़ना होगा, नहीं तो हम सभी खतरे में पड़ जाएंगे।" पिंकी ने गोलू की बात पर सहमति जताई और कहा, "हमें डरने की बजाय एक योजना बनानी चाहिए।" राजू, जो एक बड़ी मछली था, ने कहा, "गोलू, तुम सही कह रहे हो। अगर हम सब मिलकर काम करेंगे तो हम मगरमच्छ को हराकर तालाब में फिर से शांति ला सकते हैं।"

गोलू और उसके दोस्तों ने तालाब के अन्य मछलियों से बात की और सबको एकजुट किया। उन्होंने एक योजना बनाई, जिसमें पिंकी और अन्य छोटी मछलियाँ मगरमच्छ को बहलाने का काम करेंगी, जबकि गोलू और राजू बड़ी मछलियों की मदद से मगरमच्छ को फंसाने का प्रयास करेंगे।

योजना के अनुसार, पिंकी और अन्य छोटी मछलियाँ मगरमच्छ के पास गईं और उससे कहा, "तुम बहुत ताकतवर हो, मगरमच्छ भैया! हमें तुम्हारी मदद चाहिए। हम तालाब की मछलियाँ तुम्हारी सेवा में हैं, हमें बस एक बार अपनी मदद का अवसर दो।" मगरमच्छ ने सोचा, "ये छोटी मछलियाँ मुझसे कुछ चाहती हैं। अगर मैं इनकी मदद करता हूँ तो मुझे इनसे और भी मछलियाँ मिल सकती हैं।" वह मछलियों की बातों में आ गया और उसने उन्हें एक मौका देने का फैसला किया।

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जैसे ही मगरमच्छ अपने दाँतों से मछलियों को पकड़ने के लिए बढ़ा, गोलू और राजू ने योजना के तहत काम करना शुरू किया। गोलू और राजू ने मगरमच्छ को ध्यान से घेरा और उसे फंसाने की कोशिश की। राजू ने जोर से मगरमच्छ की पीठ पर प्रहार किया और उसे तालाब के किनारे खींच लिया। गोलू ने अपनी तेज़ गति से मगरमच्छ को और आगे बढ़ने से रोका।

मगरमच्छ अब पूरी तरह से फंस चुका था। उसे यह समझ में आ गया कि मछलियाँ उसकी चालाकी से बचने में सफल हो गईं। वह बुरी तरह थक गया था और अब वह तालाब छोड़ने के लिए तैयार था। मगरमच्छ ने मछलियों से कहा, "मैंने तुम सभी को बहुत गलत समझा था। तुम सभी बहुत समझदार हो। मैं अब कभी तालाब में नहीं आऊँगा।" और वह तालाब से बाहर चला गया।

तालाब में फिर से शांति लौट आई। सभी मछलियाँ बहुत खुश थीं और गोलू को उनकी बहादुरी और समझदारी के लिए सराहा। गोलू ने कहा, "हमें हमेशा एकजुट रहकर काम करना चाहिए। अगर हम एकजुट होंगे, तो कोई भी संकट हमें हरा नहीं सकता।" पिंकी और राजू ने भी गोलू की बातों को माना और यह तय किया कि वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करेंगे।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि संकट के समय में एकजुट होकर और समझदारी से काम करने से किसी भी समस्या का समाधान पाया जा सकता है। दोस्ती और सहयोग से बड़ी से बड़ी मुश्किलें हल हो सकती हैं। जैसे गोलू और उसकी मछली दोस्तों ने मिलकर मगरमच्छ से निपटा, वैसे ही हम भी एकजुट होकर किसी भी समस्या का सामना कर सकते हैं।

इस प्रकार, मछलियाँ न केवल अपनी समझदारी से मगरमच्छ से बचने में सफल रही, बल्कि एकजुट होकर उन्होंने संकट का सामना किया। तालाब में शांति बहाल हो गई और सभी मछलियाँ फिर से खुशी-खुशी रहने लगीं। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि एकता में शक्ति होती है और सही समय पर सही निर्णय लेने से बड़ी समस्याओं को भी हल किया जा सकता है।