एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक लोमड़ी रहती थी, जो बहुत ही चालाक और समझदार थी। वह जानवरों के बीच अपनी चतुराई के लिए प्रसिद्ध थी। उसे अपनी सूझबूझ और चालाकी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा नए-नए तरीके से जंगल के अन्य जानवरों से अपनी इच्छा पूरी करती थी। लेकिन किसी दिन उसके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिससे उसे समझ में आया कि कभी-कभी केवल चालाकी ही सबकुछ नहीं होती।
एक दिन लोमड़ी अपनी सैर पर जंगल में घूम रही थी, जब उसने देखा कि एक बंदर, खरगोश और एक भालू आपस में कुछ चर्चा कर रहे थे। लोमड़ी ने उन जानवरों को देखा और अपनी चालाकी से एक योजना बनाई। वह सोचने लगी, "अगर मैं इन सबको अपनी चाल में फंसा लूं, तो मेरी स्थिति बहुत मजबूत हो सकती है।"
लोमड़ी ने सबसे पहले बंदर से बातचीत शुरू की। उसने कहा, "तुम तो बहुत समझदार हो, बंदर। मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मुझे तुम्हारी चतुराई का फायदा उठाना है।" बंदर थोड़ी देर सोचता रहा, लेकिन फिर उसने कहा, "ठीक है लोमड़ी, मैं तुम्हारी मदद करूंगा। लेकिन तुम मुझे क्या दोगी?"
लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम्हें मदद करने का कोई खास पुरस्कार नहीं मिलेगा, लेकिन तुम्हारा नाम जंगल के सबसे समझदार जानवर के रूप में लिया जाएगा।" बंदर को यह बात पसंद आई और वह तैयार हो गया।
अब लोमड़ी ने खरगोश और भालू से भी यही कहा। उसने खरगोश से कहा, "तुम तो जंगल के सबसे तेज़ दौड़ने वाले जानवर हो। तुमसे बेहतर कोई नहीं है इस काम के लिए।" खरगोश ने अपनी तारीफ सुनकर लोमड़ी की बात मान ली और मदद करने के लिए तैयार हो गया।
भालू से लोमड़ी ने कहा, "तुम तो बहुत ताकतवर हो, भालू। तुम्हारी ताकत की मिसाल दी जाती है। तुम्हारे बिना यह योजना सफल नहीं हो सकती।" भालू ने भी यह सुनकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस किया और लोमड़ी की योजना में शामिल हो गया।
अब लोमड़ी ने अपनी योजना पर काम शुरू किया। उसने सोचा कि अगर यह सब जानवर अपनी ताकत का सही तरीके से इस्तेमाल करें, तो वह जंगल के अन्य जानवरों को आसानी से अपनी ओर कर सकती है। लोमड़ी की योजना यह थी कि वह इन जानवरों को एक साथ जोड़कर जंगल में एक नई सत्ता स्थापित करेगी, ताकि वह अपनी शक्ति का सही उपयोग कर सके।
एक दिन लोमड़ी ने जंगल के जानवरों को एक सभा में बुलाया और उन्हें अपनी योजना बताई। उसने कहा, "हम सभी मिलकर जंगल में एक नई शक्ति स्थापित कर सकते हैं। हमें अपने अच्छे गुणों का इस्तेमाल करते हुए, जंगल के अन्य जानवरों से अपनी सत्ता स्थापित करनी चाहिए।"
सभी जानवरों ने लोमड़ी की बात सुनी और सोचने लगे। लेकिन एक बुद्धिमान उल्लू जो सभा में मौजूद था, उसने लोमड़ी की बातों को बहुत ध्यान से सुना। उल्लू ने कहा, "लोमड़ी, तुम बहुत चतुर हो, लेकिन कभी-कभी तुम्हारी चालाकी से दूसरों को नुकसान भी हो सकता है। हमें अपनी ताकत का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि हम किसी को भी नष्ट न करें।"
उल्लू की बातों ने लोमड़ी को सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने महसूस किया कि वह केवल अपनी चालाकी और रणनीति पर ही निर्भर नहीं रह सकती। उसे अन्य जानवरों के गुणों और उनके अच्छे कामों का भी सम्मान करना चाहिए।
फिर लोमड़ी ने अपनी योजना में कुछ बदलाव किए। उसने बंदर, खरगोश और भालू से कहा, "हमें अब केवल अपनी ताकत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हमें समझदारी से काम लेना होगा। हमें अन्य जानवरों के साथ मिलकर जंगल में शांति और सद्भावना का माहौल बनाना होगा।"
यह सुनकर सभी जानवरों ने लोमड़ी की बात मानी और उन्होंने एक नई शुरुआत की। सभी जानवरों ने मिलकर जंगल में शांति स्थापित की और एक दूसरे के गुणों को समझते हुए काम करना शुरू किया। लोमड़ी ने भी सीखा कि कभी-कभी अपनी चालाकी और रणनीति के बजाय, समझदारी और सहयोग सबसे ज्यादा जरूरी है।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि केवल चालाकी और ताकत से हम किसी को भी नहीं जीत सकते। बल्कि समझदारी, सहयोग और सामूहिक प्रयास से ही हम किसी भी समस्या का समाधान ढूंढ सकते हैं। हमें अपनी शक्ति का सही इस्तेमाल करना चाहिए और किसी भी स्थिति में दूसरों का सम्मान करना चाहिए।