यह कहानी एक जंगल की है, जहाँ एक चालाक लोमड़ी और एक शरारती आरा रहते थे। जंगल में बहुत सारे जानवर थे, लेकिन लोमड़ी का नाम सबसे ज्यादा लिया जाता था क्योंकि वह अपनी चालाकी के लिए प्रसिद्ध थी। हर कोई जानता था कि लोमड़ी हमेशा अपने फायदे के लिए किसी भी चीज़ का इस्तेमाल कर सकती है। एक दिन, आरा ने लोमड़ी से कहा, "तुम्हारी चालाकी से मुझे डर लगता है, लोमड़ी। तुम्हें कुछ करना चाहिए, ताकि तुम जंगल में और भी सम्मानित हो सको।"

लोमड़ी हंसी और बोली, "तुम सही कहते हो, आरा। जंगल में मेरे नाम की काफी चर्चा है, लेकिन मुझे और भी खास बनना है।" आरा, जो थोड़ा चालाक था, ने लोमड़ी को एक योजना दी। उसने कहा, "तुम्हारी चालाकी को हर कोई जानता है, लेकिन अगर तुम एक सच्ची शक्ति का आभास करवा सको, तो शायद तुम्हें ज्यादा सम्मान मिलेगा।"

लोमड़ी ने उसकी बातों को ध्यान से सुना और आरा की बात मानने का निश्चय किया। आरा ने कहा, "मैंने एक योजना बनाई है। हमें जंगल में एक ऐसा दृश्य बनाना होगा, जो सभी जानवरों को चौंका दे।" लोमड़ी उत्सुक थी, लेकिन उसने आरा की योजना पर सवाल नहीं उठाया और दोनों ने मिलकर यह योजना शुरू की।

अगले दिन, लोमड़ी और आरा ने सभी जानवरों को जंगल के एक खुले स्थान पर बुलाया। लोमड़ी ने घोषणा की, "सभी ध्यान दें! मैं जंगल का सबसे शक्तिशाली जीव हूँ।" सभी जानवर हैरान हो गए और समझ नहीं पाए कि लोमड़ी ऐसा क्यों कह रही है। एक बड़ा हाथी, जो जंगल के सबसे बड़े जानवरों में से एक था, उसने हंसी उड़ाते हुए कहा, "तुम एक लोमड़ी हो, तुम्हारे पास शक्ति कहाँ से आई?"

लोमड़ी ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने कुछ ऐसा पाया है, जो इस जंगल में किसी के पास नहीं है।" इतना कहकर उसने आरा की मदद से एक बड़ा आरा (सॉ) दिखाया। वह आरा इतना बड़ा था कि सभी जानवर उससे डरने लगे। लोमड़ी ने कहा, "देखो यह आरा! इसका इस्तेमाल करके मैं किसी भी जानवर को हरा सकती हूँ। यह मेरी ताकत है।"

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सभी जानवर चुप हो गए और वे यह समझ नहीं पाए कि लोमड़ी और आरा का यह तामझाम क्या है। लेकिन जैसे ही लोमड़ी ने आरा को घुमाया और उसकी धार को चूमा, सभी ने देखा कि लोमड़ी ने यह सब केवल दिखावे के लिए किया था। वह जानवरों को यह विश्वास दिलाना चाहती थी कि यह आरा उसकी असली शक्ति है।

जंगल के बुद्धिमान उल्लू ने यह देखा और तुरंत समझ लिया कि लोमड़ी किसी भी तरह से जानवरों को बहका रही थी। उसने सभी जानवरों को सावधान किया और कहा, "साथी वन्यजीवों, हमें कभी भी किसी के छल-कपट में नहीं आना चाहिए। लोमड़ी की शक्ति असली नहीं है, यह सिर्फ एक दिखावा है।"

उल्लू के शब्दों ने सभी जानवरों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने देखा कि लोमड़ी ने केवल अपने नाम को बढ़ाने के लिए यह सब किया था। आरा, जो पहले लोमड़ी के साथ था, अब महसूस करने लगा कि उसने गलती की थी। उसने तुरंत लोमड़ी से कहा, "यह सब तुम्हारा झूठ था, लोमड़ी। हमें यह दिखावा नहीं करना चाहिए।"

लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि सिर्फ शक्ति या दिखावा करने से वह जंगल में सम्मान नहीं पा सकती। असली सम्मान तब मिलता है जब हम सच्चाई और ईमानदारी से अपने कार्यों को करते हैं। लोमड़ी ने सभी जानवरों से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब अपनी चालाकी का इस्तेमाल केवल सही कामों के लिए करेगी।

इस घटना के बाद, लोमड़ी और आरा ने अपनी गलती से सिखा और जंगल में फिर से शांतिपूर्वक रहने लगे। उन्होंने यह समझा कि झूठ और छल से कोई भी सफलता नहीं मिलती, और असली सफलता सच्चाई और मेहनत से मिलती है।

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इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि किसी के दिखावे या छल से प्रभावित नहीं होना चाहिए। हमें हमेशा सच्चाई का पालन करना चाहिए और अपने कार्यों में ईमानदारी रखनी चाहिए। जैसा कि पंचतंत्र की कहानियों में हमेशा एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा होता है, यह कहानी भी हमें यह सिखाती है कि बुरे कामों का अंत हमेशा बुरा होता है और अच्छे कार्यों का परिणाम हमेशा अच्छे होते हैं।

लोमड़ी और आरा की यह कहानी जंगल के अन्य जानवरों को भी यह सिखाती है कि किसी भी कार्य में बाहरी दिखावे से ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य की सच्चाई और ईमानदारी होती है। अब जंगल में सभी जानवर जानते थे कि छल-कपट से किसी का भला नहीं होता।