एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक व्यापारी अपने व्यापार के लिए बहुत दूर-दूर तक यात्रा करता था। उसके पास एक वफादार कुत्ता था, जो हमेशा उसके साथ रहता था। इस कुत्ते का नाम था 'शेरू'। शेरू व्यापारी का सबसे अच्छा दोस्त और साथी था। वह हमेशा व्यापारी के साथ हर यात्रा पर जाता और उसका ख्याल रखता था।
व्यापारी और शेरू का रिश्ता बहुत खास था। व्यापारी जब भी व्यापार के लिए किसी दूसरे गाँव जाता, शेरू हमेशा उसके साथ होता था। एक दिन व्यापारी ने तय किया कि उसे एक बड़ी यात्रा पर जाना है, जो उसे कई दिनों तक बाहर रहने की आवश्यकता थी। व्यापारी ने शेरू से कहा, "शेरू, इस बार तुम्हें घर पर रहना होगा। तुम जानते हो कि यह यात्रा बहुत लंबी होगी, और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें कोई परेशानी हो।" शेरू के चेहरे पर थोड़ी मायूसी दिखी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और सिर्फ अपनी पूंछ हिलाकर व्यापारी की बात मानी।
व्यापारी अपने रास्ते पर निकल पड़ा। शेरू ने उसे जाते हुए देखा, लेकिन वह खामोशी से वहीं खड़ा रहा। व्यापारी ने शेरू से वादा किया था कि जब वह वापस लौटेगा, तो शेरू को बहुत सारी खुशियाँ देगा। यात्रा के दौरान व्यापारी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, लेकिन शेरू का ख्याल हमेशा उसे मजबूत बनाए रखता था।
एक दिन व्यापारी अपनी यात्रा के बीच में था जब वह एक सुनसान जंगल में पहुँचा। वहाँ उसके पास कई खतरे थे, लेकिन वह बिना डर के आगे बढ़ता रहा। अचानक उसे एक भयंकर तेंदुआ सामने दिखाई दिया। व्यापारी डर से कांपने लगा, क्योंकि तेंदुआ बहुत पास आ चुका था। उसे लगा कि अब वह बच नहीं पाएगा, तभी अचानक शेरू जंगल में दौड़ते हुए आया। शेरू ने तेंदुए से मुकाबला किया और व्यापारी को बचाया। वह पूरी तरह से घायल हो गया, लेकिन उसने व्यापारी की जान बचाई।
व्यापारी ने शेरू को देख कर उसे गले लगाया और कहा, "शेरू, तुमने मुझे बचाया, तुम सच में मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो।" शेरू ने पूरी ताकत से व्यापारी की मदद की थी, और अब उसकी हालत खराब हो गई थी। व्यापारी ने उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर इलाज किया। शेरू की बहादुरी ने व्यापारी का दिल छू लिया।
शेरू के घाव ठीक हुए, लेकिन उसकी आँखों में वही वफादारी और प्रेम था, जो हमेशा था। अब व्यापारी ने शेरू से कभी भी अलग रहने का नहीं सोचा। वह जानता था कि शेरू उसकी जान का हिस्सा बन चुका था और हमेशा उसकी मदद करता रहेगा। इस घटना के बाद व्यापारी ने शेरू को कभी अकेला नहीं छोड़ा। वे दोनों एक साथ हर चुनौती का सामना करते और एक-दूसरे का सहारा बने रहते।
कुछ समय बाद व्यापारी वापस अपने गाँव लौट आया। अब वह और शेरू एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। गाँव के लोग इस कुत्ते की वफादारी के बारे में सुनकर हैरान रह गए। शेरू को हमेशा सम्मान और प्यार मिला, क्योंकि उसने अपने मालिक के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी। गाँव के लोग कहते थे, "शेरू ने हमें यह सिखाया कि वफादारी और दोस्ती का कोई मूल्य नहीं होता, यह एक अनमोल गुण है।"
व्यापारी ने शेरू की वफादारी के लिए एक स्मारक भी बनवाया, ताकि लोग हमेशा याद रखें कि किसी का सच्चा साथी और दोस्त वही है जो न केवल दुख-सुख में साथ दे, बल्कि अपनी जान की भी परवाह न करे। शेरू की बहादुरी और वफादारी की कहानी आज भी गाँव में सुनाई जाती है।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि वफादारी और मित्रता का कोई मूल्य नहीं होता। सच्चा दोस्त वही होता है जो बिना किसी स्वार्थ के आपके लिए हर स्थिति में खड़ा हो, चाहे आपकी स्थिति कैसी भी हो। शेरू ने हमें यह सिखाया कि हमें अपने सच्चे मित्रों की कद्र करनी चाहिए और उनके साथ हमेशा वफादार रहना चाहिए।
इस कहानी में 'कुत्ते की वफादारी' हमें यह समझाती है कि दोस्ती और वफादारी किसी भी रिश्ते का मूल है। जो लोग अपने मित्रों के लिए सच्चे और वफादार होते हैं, वे कभी भी अकेले नहीं रहते। ऐसे लोग हमेशा अपने मित्रों से प्यार और सम्मान पाते हैं। इस पंचतंत्र की कहानी का संदेश यही है कि हमें अपनी वफादारी और दोस्ती की ताकत को समझना चाहिए और इसे जीवन में सही तरीके से अपनाना चाहिए।