बहुत समय पहले की बात है, एक घना और विशाल जंगल था, जहाँ तरह-तरह के जानवर रहते थे। यह जंगल खूबसूरत था, लेकिन यहाँ एक बड़ा दानव भी रहता था, जो जंगल के सभी जानवरों को डराता था। दानव इतना भयानक था कि उसके नाम से ही सभी जानवर थर-थर कांपते थे। उसका नाम था ‘कुलपति’। वह जंगल के किसी भी जानवर को कभी भी पकड़ सकता था और उसे खा सकता था। सभी जानवर दानव से डरते थे और उसकी पकड़ में आने से बचते थे।

एक दिन जंगल में एक बंदर नामक जीव आया। वह बहुत ही चालाक और समझदार था। बंदर ने जब सुना कि इस जंगल में एक खतरनाक दानव है, तो उसने सोचा, "इस दानव से कैसे निपटा जाए?" बंदर जानता था कि शक्ति से ज्यादा बुद्धिमानी की आवश्यकता होती है, और उसने दानव से निपटने का एक योजना बनाई।

बंदर ने जंगल के सभी जानवरों को एकत्र किया और उनसे कहा, "हम सब मिलकर इस दानव को उसकी ही चाल में फंसा सकते हैं। अगर हम एकजुट होकर काम करें, तो हम उसे हराकर जंगल में शांति ला सकते हैं।" सभी जानवरों ने बंदर की बात मानी, लेकिन उनमें से कोई भी दानव से सीधा मुकाबला करने का साहस नहीं जुटा पाया।

एक दिन, बंदर ने तय किया कि वह अकेले ही दानव का सामना करेगा। वह दानव के इलाके की ओर बढ़ा और वहां खड़ा होकर चिल्लाया, "ओ दानव! तुमने इस जंगल के सभी जानवरों को डराया है, लेकिन मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूँ।" दानव, जो हमेशा अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता था, बंदर की आवाज़ सुनकर बाहर आया। उसे लगा कि यह बंदर भी उसे डराने की कोशिश कर रहा है, तो उसने बंदर से कहा, "तुम बहुत छोटे हो, तुम्हारी क्या औकात है मेरे सामने?"

बंदर मुस्कराया और बोला, "मैं छोटा हो सकता हूँ, लेकिन मैं इतना चालाक हूँ कि तुम्हें पछाड़ सकता हूँ। तुम मुझसे मुकाबला करने की सोच भी नहीं सकते।" दानव को बंदर की बातों से गुस्सा आ गया, लेकिन उसने सोचा कि यह तो बस मजाक कर रहा है, इसलिए वह बंदर से मुकाबला करने के लिए तैयार हो गया।

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बंदर ने दानव को चुनौती दी, "तुम मुझे पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाओ, लेकिन अगर तुम मुझे नहीं पकड़ पाए, तो तुम हार मानोगे।" दानव ने चुनौती स्वीकार की और अपनी पूरी ताकत लगाकर बंदर के पीछे दौड़ा। बंदर बहुत तेजी से दौड़ा और दानव से कुछ दूर जाकर एक पेड़ पर चढ़ गया। दानव बंदर को पकड़ने के लिए बहुत प्रयास करता रहा, लेकिन वह पेड़ पर चढ़ने में असमर्थ था।

बंदर ने ऊपर से चिल्लाकर कहा, "तुम अपनी ताकत से क्या करोगे? मुझे पकड़ने के लिए तुम्हें दिमाग का इस्तेमाल करना होगा!" दानव ने गुस्से में आकर कहा, "तुम मुझे छेड़ने की कोशिश कर रहे हो, लेकिन अब मैं तुम्हें छोड़ने वाला नहीं हूँ!" फिर दानव ने बंदर से कहा, "ठीक है, तुम अब मेरी चुनौती को स्वीकार करो। हम दोनों को जंगल के एक और हिस्से में दौड़ने की चुनौती देते हैं। जो पहले वहां पहुंचेगा, वह जीत जाएगा।"

बंदर ने तुरंत जवाब दिया, "मैं चुनौती स्वीकार करता हूँ, लेकिन यह शर्त है कि हम दोनों अलग-अलग रास्ते से दौड़ेंगे।" दानव ने इसे मान लिया। अब दोनों ने अपनी दौड़ शुरू की। दानव को यह सोचकर भरोसा था कि वह तेज़ी से जीत जाएगा, क्योंकि उसकी ताकत बहुत अधिक थी, जबकि बंदर का आकार छोटा था। लेकिन बंदर ने अपनी चालाकी से रास्ते बदलते हुए दानव को उलझा दिया। वह जंगल में छोटे रास्तों से चलता गया और बहुत जल्दी निर्धारित स्थान पर पहुँच गया।

दानव, जो सीधे रास्ते पर दौड़ रहा था, बहुत देर बाद ही उस स्थान तक पहुँच सका। वह हैरान था कि बंदर ने उसे इतनी आसानी से मात दे दी। बंदर हंसते हुए बोला, "तुमने अपनी ताकत का सही इस्तेमाल नहीं किया, जबकि मैंने अपनी बुद्धिमानी से तुम्हें हराया।" दानव को अब समझ में आ गया कि सिर्फ ताकत से काम नहीं चलता, बल्कि समझदारी और सही योजना भी महत्वपूर्ण होती है।

इस घटना के बाद, दानव ने जंगल के सभी जानवरों से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब कभी किसी को डराएगा नहीं। वह अब शांतिपूर्वक जंगल में रहने लगा और सभी जानवरों के साथ अच्छे से पेश आने लगा। बंदर की बुद्धिमानी और साहस ने सभी को यह सिखाया कि कभी भी ताकत पर नहीं, बल्कि समझदारी पर विश्वास करना चाहिए।

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इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि असली ताकत सिर्फ शारीरिक बल में नहीं, बल्कि दिमाग और समझदारी में होती है। कभी-कभी कठिन परिस्थितियों में, हमें अपनी बुद्धिमानी का इस्तेमाल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान सही तरीके से ढूँढ़ना चाहिए।