एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक बकरी रहती थी। यह बकरी बहुत ही घमंडी और अजीब स्वभाव की थी। जंगल के अन्य जानवरों से वह हमेशा अपनी सुंदरता और शारीरिक ताकत पर घमंड करती थी। उसका मानना था कि वह सबसे सुंदर और ताकतवर जानवर है और सभी उसे देख कर डरते थे।

बकरी जंगल के सभी जानवरों से कहती, "मैं सबसे सुंदर हूँ, मेरे जैसा रूप किसी के पास नहीं है। जंगल के सभी जानवरों को मुझसे डरना चाहिए।" बकरी का घमंड दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था। वह अन्य जानवरों का मजाक उड़ाती और उन्हें यह बताती कि वह उन सभी से श्रेष्ठ है।

एक दिन बकरी जंगल में घूम रही थी कि उसने देखा कि एक हाथी पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। बकरी को यह मौका मिल गया। उसने हाथी के पास जाकर कहा, "तुम क्या कर रहे हो, हाथी? तुम बहुत बड़े और भारी हो, लेकिन मेरे जैसे सुंदर और तेजस्वी जानवर से मुकाबला नहीं कर सकते। मैं तो अपने खूबसूरत सींगों से किसी भी जानवर को हर सकती हूँ।"

हाथी ने बकरी को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "तुम सही कह रहे हो, तुम बहुत सुंदर हो। लेकिन सुंदरता से कहीं ज्यादा ताकत और समझदारी जरूरी होती है।" बकरी ने हाथी की बातों को नकारते हुए कहा, "तुम समझदार हो, लेकिन तुम्हारी समझदारी की कोई अहमियत नहीं है। मैं तो केवल अपनी सुंदरता और तेजस्विता के बल पर सबको पछाड़ सकती हूँ।"

बकरी का घमंड दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था, और वह अब जंगल के अन्य जानवरों को भी तंग करने लगी थी। उसने एक दिन एक शेर को देखा जो नदी के पास पानी पी रहा था। बकरी ने शेर के पास जाकर कहा, "तुम शेर होकर भी कमजोर हो। मैं तुमसे कहीं ज्यादा तेज और सुंदर हूं। तुम्हारे जैसी ताकतवर शेर तो मुझसे मुकाबला नहीं कर सकते।"

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शेर ने बकरी की बातों को नजरअंदाज किया और कहा, "तुम्हारी सुंदरता और तेजस्विता तो तुम्हारे लिए बहुत बड़ी बात हो सकती है, लेकिन ताकत और साहस भी जरूरी हैं। तुमने कभी जंगल के असली खतरों का सामना नहीं किया है, तुम जानवरों के साथ मेरी तरह नहीं जूझ सकती।" बकरी ने शेर की बातों को भी अनसुना किया और अपनी घमंड में ही खोई रही।

एक दिन जंगल में एक बड़ा संकट आया। जंगल में अचानक एक तेंदुआ आ गया और उसने कई जानवरों को घेर लिया। सभी जानवर डर गए और इधर-उधर भागने लगे। बकरी ने सोचा, "मैं तो इतनी सुंदर और तेज हूं, मुझे तेंदुए से डरने की कोई जरूरत नहीं है।" इस सोच के साथ उसने तेंदुए का सामना करने का फैसला किया।

बकरी तेंदुए के पास पहुंची और उससे बोली, "तुम क्या समझते हो, मैं तुम्हारे सामने डर कर भाग जाऊंगी? मैं तो तुम्हें चुनौती देती हूं।" तेंदुआ हंसा और बोला, "तुम एक बकरी हो, तुम्हारे पास ताकत नहीं है।" बकरी ने जवाब दिया, "मेरे पास सुंदरता और तेजस्विता है, और मैं किसी से भी नहीं डरती।"

तेंदुआ बकरी की बातें सुनकर उसे चुनौती देने लगा और दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया। बकरी ने अपने तेज सींगों से तेंदुए पर हमला किया, लेकिन तेंदुआ बहुत तेज था। उसने अपनी चालाकी से बकरी को आसानी से दबोच लिया और उसके घमंड को चूर-चूर कर दिया। तेंदुआ बकरी को बुरी तरह से हराकर जंगल से बाहर चला गया।

इस घटना के बाद, बकरी ने अपना घमंड छोड़ दिया। उसने महसूस किया कि केवल सुंदरता और तेजस्विता से कोई नहीं जीत सकता। उसे यह सिखने को मिला कि ताकत, समझदारी और विनम्रता से ही किसी भी मुश्किल का सामना किया जा सकता है। बकरी ने अपनी गलती मानी और जंगल के सभी जानवरों से माफी मांगी।

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इस कहानी से यह सिखने को मिलता है कि घमंड करना कभी भी किसी के लिए अच्छा नहीं होता। हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिए और अपनी ताकत और गुणों का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए। बकरी की तरह हमें अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और दूसरों से कुछ सिखने की कोशिश करनी चाहिए।