एक समय की बात है, एक घने जंगल में गब्बर सिंह नामक एक शेर और एक घमंडी हाथी रहते थे। गब्बर सिंह जंगल का राजा था और उसकी दहाड़ से सभी जानवर डरते थे। वह अपनी ताकत और शिकार की कला में माहिर था। वही दूसरी ओर, हाथी का नाम था भारीलाल। भारीलाल अपनी विशाल काया और ताकत पर घमंड करता था और हमेशा दूसरों को कमतर समझता था। वह सोचता था कि उसकी ताकत के सामने कोई भी जानवर टिक नहीं सकता।

एक दिन जंगल में भारीलाल ने गब्बर सिंह को चुनौती दी। उसने गब्बर सिंह से कहा, "तुम खुद को जंगल का राजा समझते हो, लेकिन क्या तुम मेरी ताकत का मुकाबला कर सकते हो?" गब्बर सिंह ने भारीलाल के घमंड को देखा और कहा, "अगर तुम समझते हो कि तुम मुझसे ज्यादा शक्तिशाली हो, तो हम दोनों एक परीक्षण कर सकते हैं।"

इस पर भारीलाल और गब्बर सिंह दोनों ने तय किया कि वे जंगल के सबसे बड़े पेड़ तक दौड़ लगाएंगे। जिसने पहले पेड़ तक पहुँचकर उसे छू लिया, वही जंगल का असली राजा होगा। जंगल के सभी जानवरों ने इस चुनौती को देखा और उत्साहित हो गए। गब्बर सिंह और भारीलाल दौड़ के लिए तैयार हो गए।

दौड़ शुरू हुई। भारीलाल अपनी भारी काया और ताकत के साथ बहुत तेजी से दौड़ा, जबकि गब्बर सिंह की चाल बहुत संतुलित और तेज थी। कुछ समय बाद, भारीलाल गब्बर सिंह से काफी आगे निकल गया। उसने सोचा कि अब गब्बर सिंह उसे नहीं पकड़ सकता। भारीलाल ने अपनी जीत का जश्न मनाते हुए और भी तेज दौड़ने की कोशिश की, लेकिन उसकी आंखों के सामने एक बड़ी चुनौती आ गई।

जंगल के रास्ते में एक गहरी खाई थी, जिसे भारीलाल ने नज़रअंदाज़ कर दिया था। वह तेज दौड़ते हुए खाई के पास पहुँच गया और अचानक वह अपनी भारी काया के कारण खाई में गिर पड़ा। गब्बर सिंह ने यह देखा और बिना देर किए अपनी चाल को और तेज किया। वह खाई के पास पहुँचा और भारीलाल को खाई से बाहर खींचने की कोशिश की।

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गब्बर सिंह ने भारीलाल से कहा, "तुम्हारी ताकत तुमसे केवल खुद के लिए काम आती है, लेकिन सहारा देने की शक्ति सिर्फ अच्छे दिल वाले लोग रखते हैं। तुम्हारे घमंड के कारण तुम खाई में गिर गए थे।" भारीलाल ने शर्मिंदा होकर सिर झुकाया और कहा, "तुम सही कह रहे हो, गब्बर सिंह। मैंने अपनी ताकत को दूसरों को नीचे दिखाने के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन अब मैंने यह समझ लिया कि विनम्रता और दूसरों की मदद करने की भावना से ही असली ताकत आती है।"

गब्बर सिंह ने उसे समझाया, "तुमने सही सीखा। हम जितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अगर हम दूसरों का सम्मान नहीं करते और अपनी शक्ति का गलत उपयोग करते हैं, तो वह कभी हमारी मदद नहीं करती। असली शक्ति वह है जो दूसरों की मदद करने में है।" भारीलाल ने गब्बर सिंह का आभार व्यक्त किया और शांति से चलने की सोची।

उस दिन के बाद से भारीलाल ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल दूसरों की मदद करने में करना शुरू कर दिया। उसने कभी घमंड नहीं किया और हमेशा विनम्र और मददगार बना रहा। गब्बर सिंह और भारीलाल दोनों अच्छे दोस्त बन गए, और जंगल में शांति और भाईचारे का माहौल था।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि घमंड और अहंकार से हम कभी भी सही दिशा में नहीं बढ़ सकते। अगर हमें जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो हमें विनम्रता और समझदारी से काम करना चाहिए। केवल ताकत से कुछ नहीं होता, बल्कि दूसरों के साथ मिलकर काम करने से ही सच्ची सफलता मिलती है।

इस प्रकार, गब्बर सिंह और घमंडी हाथी की कहानी हमें यह सिखाती है कि किसी भी शक्ति का इस्तेमाल सच्चे उद्देश्य के लिए करना चाहिए और हमेशा दूसरों का सम्मान करना चाहिए।