एक समय की बात है, एक घने जंगल में बहुत से जानवर रहते थे। जंगल में एक बड़ा तालाब था, जिसके पास एक ऊँचा पेड़ था। उस पेड़ पर एक उल्लू रहता था, जिसे सभी जानवर चतुर और समझदार मानते थे। उसका नाम था बबलू। बबलू उल्लू बहुत ही शांत और ध्यानपूर्वक सोचने वाला था। वह हमेशा अपनी बुद्धिमानी से समस्याओं का हल निकालता था और बाकी जानवरों की मदद करता था।

एक दिन, जंगल में एक बड़ी समस्या पैदा हो गई। तालाब के पास रहने वाली बत्तखें और मेंढ़क आपस में झगड़ने लगे थे। बत्तखें कह रही थीं कि तालाब का पानी उनके रहने के लिए बहुत अच्छा है, जबकि मेंढ़क दावा कर रहे थे कि पानी में रहने का अधिकार सिर्फ उन्हें है। झगड़े ने बहुत बुरा रूप ले लिया था और जंगल के सभी जानवर परेशान थे।

जंगल के जानवरों ने सोचा कि इस समस्या का हल केवल बबलू उल्लू ही निकाल सकता है, क्योंकि वह बहुत ही चतुर और समझदार था। सभी जानवर बबलू के पास गए और उन्होंने उसे बताया कि तालाब के पास बत्तखें और मेंढ़क आपस में झगड़ रहे हैं। बबलू ने ध्यान से सभी की बातें सुनी और फिर वह सोचने लगा कि इस समस्या का हल क्या हो सकता है।

बबलू ने कहा, "मैं एक योजना बना सकता हूँ। हमें इन दोनों को समझाना होगा कि तालाब सभी जानवरों के लिए है और हमें आपस में मिलजुल कर रहना चाहिए।" फिर वह बत्तखों और मेंढ़कों के पास गया और उनसे इस समस्या पर चर्चा की। बबलू ने उन्हें समझाया, "अगर आप लोग आपस में लड़ते रहेंगे, तो तालाब का पानी भी कम हो जाएगा और कोई भी जानवर यहाँ आराम से नहीं रह पाएगा।"

बत्तखें और मेंढ़क बबलू की बातों को ध्यान से सुन रहे थे। बबलू ने दोनों से कहा, "मैं एक सुझाव देता हूँ। तालाब के एक हिस्से पर बत्तखें रहें और दूसरे हिस्से में मेंढ़क। दोनों का हिस्सा अलग-अलग होगा, लेकिन तालाब का पानी सभी के लिए पर्याप्त रहेगा। इस प्रकार हम दोनों को कोई परेशानी नहीं होगी।"

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बत्तखें और मेंढ़क बबलू की बातों से सहमत हो गए और उन्होंने अपनी अपनी जगहों पर रहने का निर्णय लिया। इस प्रकार बबलू की समझदारी से दोनों पक्षों के झगड़े का हल निकला और तालाब में फिर से शांति छा गई। सभी जानवर बबलू की चतुराई की सराहना करने लगे।

कुछ समय बाद, जंगल में एक और समस्या आई। जंगल के पेड़-पौधों के पास रहने वाले कीड़े और तितलियाँ अपने स्थान को लेकर झगड़ने लगे थे। वे चाहते थे कि जंगल में कोई एक स्थान तय किया जाए, जहाँ वे बिना किसी परेशानी के रह सकें। बबलू ने फिर से इस समस्या का हल निकालने का निर्णय लिया।

बबलू ने सभी कीड़ों और तितलियों को इकट्ठा किया और उन्हें समझाया, "जंगल में हर स्थान का अपना महत्व है। हमें यहाँ मिलकर रहना चाहिए और हर किसी को अपने-अपने स्थान पर रहने का अधिकार देना चाहिए। अगर हम आपस में झगड़ेंगे, तो जंगल का माहौल बिगड़ जाएगा।"

बबलू की बातों को सभी ने माना और उन्होंने अपने-अपने स्थानों को साझा करने का निर्णय लिया। इस प्रकार, बबलू उल्लू ने अपनी समझदारी से फिर से जंगल में शांति स्थापित की। उसकी चतुराई और बुद्धिमानी की सभी जानवरों ने सराहना की और बबलू को जंगल में सबसे समझदार जानवर के रूप में माना।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि समझदारी से हम किसी भी समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। कभी-कभी, हमें छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने और सोच-समझकर फैसले लेने की आवश्यकता होती है। चतुराई और बुद्धिमानी से हम जीवन की कठिनाइयों को आसानी से पार कर सकते हैं।

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"चतुर उल्लू" की यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि हमें किसी भी समस्या से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य और समझदारी से उस समस्या का हल ढूँढना चाहिए। बबलू उल्लू की तरह हमें भी अपने ज्ञान और चतुराई का सही उपयोग करना चाहिए।