एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक चतुर बंदर रहता था। उसका नाम मिंटी था। मिंटी जंगल के अन्य बंदरों से अलग था क्योंकि वह न केवल बहुत समझदार था, बल्कि उसकी चतुराई और बुद्धिमानी के कारण उसे सभी बंदर बहुत मानते थे। मिंटी हमेशा जंगल में होने वाली घटनाओं को ध्यान से सुनता और अपने दिमाग से हल निकालता था।

जंगल के राजा शेर ने एक दिन मिंटी को बुलाया और उसे एक विशेष काम सौंपा। जंगल में एक बड़ी समस्या थी। एक हाथी ने पास के नदी के किनारे अपना ठिकाना बना लिया था और वह पानी पीने आने वाले जानवरों को परेशान कर रहा था। सभी जानवर डरे हुए थे और वे डर के मारे नदी में नहीं जा पा रहे थे। शेर ने मिंटी से कहा, "तुम एक चतुर बंदर हो। मुझे विश्वास है कि तुम इस समस्या का समाधान निकाल सकते हो।"

मिंटी ने राजा की बात सुनी और वह सोचने लगा कि हाथी जैसे विशाल जानवर से कैसे निपटा जाए। वह जानता था कि यदि वह सीधे हाथी से भिड़ेगा तो उसे हार का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि हाथी बहुत बड़ा और मजबूत था। मिंटी ने अपनी चतुराई का इस्तेमाल करने का फैसला किया।

मिंटी ने सोचा, "हाथी का आकार बड़ा है, लेकिन मैं अपनी बुद्धिमानी से उसे समझा सकता हूं। मुझे उसकी ताकत का मुकाबला करने की बजाय उसे समझाना होगा।" मिंटी ने हाथी के पास जाकर धीरे-धीरे उससे बात करनी शुरू की। मिंटी ने कहा, "हे हाथी भाई, तुम यहां क्यों आकर दूसरों को परेशान कर रहे हो? यह नदी सभी जानवरों के लिए है, और तुम्हारी वजह से सब डर रहे हैं। क्या तुम नहीं समझते कि तुम अपनी ताकत से दूसरों का जीवन मुश्किल बना रहे हो?"

हाथी ने मिंटी की बात सुनी, लेकिन उसने गुस्से में आकर कहा, "तुम छोटे से बंदर मुझे समझाने आए हो? तुम नहीं जानते कि मैं कितना ताकतवर हूं। मैं जो चाहता हूं, वह मुझे मिलेगा।" मिंटी ने हाथी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और शांतिपूर्वक बोला, "मैं समझता हूं कि तुम बहुत ताकतवर हो, लेकिन अगर तुम अपनी ताकत से सबको नुकसान पहुँचाओगे तो तुम्हारा नाम भी खराब होगा। क्या तुम नहीं चाहते कि लोग तुम्हें एक महान और समझदार जानवर के रूप में देखें?"

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बंदर और उसकी शरारतें पढ़ें 'बंदर और उसकी शरारतें', एक पंचतंत्र कहानी जिसमें एक शरारती बंदर की अजीबोगरीब हरकतों के बारे में बताया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी शरारतें भी किसी के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

हाथी मिंटी की बातों पर चुप हो गया और उसने सोचा, "शायद यह बंदर सही कह रहा है। मुझे अपनी ताकत का उपयोग दूसरों को परेशान करने के बजाय अच्छे कामों में करना चाहिए।" मिंटी ने फिर कहा, "तुम जैसे महान जानवर को किसी भी तरह के विवाद में नहीं फंसना चाहिए। अगर तुम नदी के किनारे थोड़ा दूर जाकर पानी पीने आओ तो बाकी सभी जानवरों को भी कोई समस्या नहीं होगी।"

मिंटी की बातों को सुनकर हाथी का दिल पिघल गया। उसने मिंटी की सलाह मानी और नदी के किनारे थोड़ा हटकर पानी पीने आना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे जंगल के सभी जानवरों को राहत मिली, और वे फिर से बिना किसी डर के नदी में पानी पीने जाने लगे। मिंटी ने अपनी चतुराई से जंगल के सभी जानवरों का जीवन आसान बना दिया।

मिंटी ने फिर से शेर से जाकर उसे खुशखबरी दी। शेर ने उसकी चतुराई की सराहना की और कहा, "मिंटी, तुमने साबित कर दिया कि ताकत से नहीं, बल्कि समझदारी से काम करने से ही बड़ी समस्याओं का समाधान होता है। तुम्हारी चतुराई ने न केवल हाथी को शांत किया, बल्कि सबको एक अच्छे रास्ते पर भी डाला।"

मिंटी को शेर का आशीर्वाद मिला और उसे जंगल में सम्मानित किया गया। जंगल के सभी जानवरों ने उसकी चतुराई की सराहना की और मिंटी को एक आदर्श के रूप में देखा। मिंटी ने यह सिखाया कि कभी भी किसी समस्या का हल केवल ताकत से नहीं, बल्कि सोच-समझ कर और चतुराई से निकाला जा सकता है।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि समस्या चाहे जैसी भी हो, यदि हम धैर्य और समझदारी से काम लें तो हम किसी भी मुश्किल को हल कर सकते हैं। किसी भी कठिन स्थिति का समाधान सिर्फ ताकत में नहीं, बल्कि सोच-विचार और चतुराई में होता है। चतुर बंदर की तरह हमें भी किसी भी समस्या का समाधान समझदारी से ढूंढना चाहिए।