एक समय की बात है, एक घने जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। जंगल में एक आलसी खरगोश और एक बुद्धिमान हाथी रहते थे। खरगोश हमेशा आलसी और आराम पसंद था, जबकि हाथी बहुत ही मेहनती और समझदार था। खरगोश को अपनी दिनचर्या में कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती थी, और वह हर समय सोता या खेलता रहता था। दूसरी तरफ, हाथी हमेशा अपने कामों में व्यस्त रहता और जंगल में सभी जानवरों की मदद करता था।

एक दिन, जंगल में अचानक पानी की कमी होने लगी। झील और नदी सूखने लगे, और जानवरों को पानी की तलाश में काफी परेशानी होने लगी। सभी जानवर इधर-उधर दौड़ने लगे, लेकिन कहीं भी पानी नहीं मिल रहा था। तभी हाथी ने एक विचार किया कि उसे कहीं दूर जंगल के दूसरे कोने में जाकर पानी ढूंढना होगा। उसने अपने दोस्तों से कहा, "मैं पानी खोजने जा रहा हूँ, जो भी मेरे साथ आना चाहे, वह साथ चल सकता है।"

खरगोश ने यह सुना और झट से कहा, "हाथी भाई, तुम बहुत मेहनती हो, लेकिन तुम्हारी मेहनत के बजाय अगर मैं कुछ आराम कर लूं, तो ज्यादा बेहतर होगा। तुम मेरे बिना भी जंगल में पानी ढूंढ सकते हो।" हाथी ने उसकी बात सुनी, लेकिन उसने खरगोश को समझाते हुए कहा, "सिर्फ आराम करना सबका काम नहीं है। अगर हम सब साथ मिलकर काम करेंगे तो हम जल्दी पानी ढूंढ सकते हैं।"

लेकिन खरगोश को आलस्य ने घेर लिया था। वह चाहता था कि बिना मेहनत किए ही काम हो जाए, इस कारण उसने हाथी की बात को अनसुना कर दिया। हाथी अकेले ही जंगल के दूसरे कोने की ओर निकल पड़ा। खरगोश ने सोचा कि हाथी तो बहुत बड़ा है, वह आसानी से पानी ढूंढ लेगा, लेकिन मुझे तो बस आराम करना है।

हाथी लंबी दूरी तय कर रहा था, और उसे दूर कहीं झील का पानी दिखाई दिया। उसने खुशी से यह खबर जंगल के बाकी जानवरों तक पहुंचाई। फिर सभी जानवरों ने उस झील की ओर रुख किया। इस बीच, खरगोश का आलस्य उसके काम में आ गया। वह अपने घोंसले में सो रहा था और कोई मेहनत नहीं कर रहा था। जब बाकी जानवर पानी के पास पहुंचे, तो खरगोश भी धीरे-धीरे वहां आया।

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खरगोश ने पानी को देखकर सोचा, "अगर मैं थोड़ा और आलसी रहा और कुछ नहीं किया, तो हाथी अपनी मेहनत में भी अकेला ही सफल हो जाएगा। मुझे ज्यादा कुछ नहीं करना है।" इस तरह वह दिन ब दिन अपनी मेहनत और काम से बचता रहा। हाथी ने बाकी जानवरों को पानी का रास्ता दिखाया और बताया कि मेहनत और एकजुटता से ही समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।

कुछ दिन बाद, जंगल में एक और समस्या खड़ी हो गई। इस बार एक बड़ा तूफान आ गया और कई पेड़ गिर गए। जंगल का वातावरण बहुत गंदा हो गया और जानवरों को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बार खरगोश ने सोचा कि अगर वह हाथी के साथ मेहनत करता तो वह अकेले ही काम में मदद कर सकता था, लेकिन अब वह समझ चुका था कि उसकी आलसी आदतें उसे कोई फायदा नहीं दिलाएंगी।

खरगोश ने हाथी से कहा, "मुझे अब समझ में आ गया है कि आलस्य से कुछ हासिल नहीं होता। मैं भी तुम्हारे साथ काम करने के लिए तैयार हूँ।" हाथी मुस्कुराया और कहा, "यह समझदारी का काम है, अब हम सब मिलकर जंगल को साफ करेंगे और इसे फिर से बेहतर बनाएंगे।" हाथी और खरगोश दोनों ने मिलकर बाकी जानवरों के साथ मेहनत की, और कुछ ही दिनों में जंगल फिर से सुंदर और सुरक्षित हो गया।

इस घटना ने खरगोश को यह सिखाया कि आलस्य से कोई समस्या हल नहीं हो सकती। मेहनत और समझदारी से ही कोई काम सफल होता है। अगर हम सब मिलकर काम करें, तो किसी भी बड़ी से बड़ी समस्या को भी हल किया जा सकता है।

इस कहानी से हमें यह संदेश मिलता है कि आलस्य से केवल समय और अवसर गवाना होता है। अगर हमें जीवन में सफलता चाहिए तो हमें मेहनत करनी चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। मेहनत और ईमानदारी से ही हम किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं।