हिम्मत हाथी की मुस्कान उसके चेहरे से बड़ी थी। जब वह हँसता, तो उसके सामने के दाँत पूरे दिख जाते और आँखें ग़ायब हो जातीं। उसे यह पता नहीं था कि यह डरावना लगता है। पता तब चला जब एक दिन उसने एक हिरन के बच्चे को देखकर मुस्कुराया, और वह बच्चा उलटे पाँव भाग गया। उसके बाद हिम्मत ने मुस्कुराना कम कर दिया। फिर लगभग बंद ही कर दिया।

हिम्मत अपने विशाल दिल में बहुत सारा प्यार और अपनापन लिए घूमता था, लेकिन उसके मन में एक गहरी उदासी छिपी थी। वह अक्सर सोचता कि उसकी मुस्कान ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है। जब वह अपनी सूंड से पेड़ की पत्तियों को हिला-हिलाकर खेलता, तब भी उसके मन में यही प्रश्न गूंजता रहता - क्या उसकी मुस्कान सच में इतनी डरावनी थी कि कोई भी उसके पास नहीं आता?

जंगल में उसका कोई दोस्त नहीं था। कोई उससे नफ़रत भी नहीं करता था। बस सब दूरी बनाए रखते। वह अकेला घूमता। अकेला नहाता। शाम को अकेला लौट आता। कभी-कभी वह पानी में अपनी परछाईं देखता और मुँह बंद रखकर मुस्कुराने की कोशिश करता। वैसे मुस्कान बनती ही नहीं थी।

साझा करने का मज़ा

एक दिन, जब सूरज अपनी सुनहरी किरणों से जंगल को सजाने में व्यस्त था, वहीं जंगल में एक नया मेहमान आया। यह छोटा, फुर्तीला और नटखट खरगोश था, जिसका नाम था चीकू। चीकू की जिज्ञासा उसे जंगल के कोने-कोने में खींच ले जाती थी। जब उसने हिम्मत को देखा, तो उसकी आँखों में कोई डर नहीं था। वह नन्हे कदमों से दौड़ता हुआ हिम्मत के पास आया और बोला, "नमस्ते! आप बहुत अच्छे लगते हो।" हिम्मत के लिए यह अविश्वसनीय था, क्योंकि पहली बार किसी ने उसकी मुस्कान को सराहा था।

हिम्मत ने संकोच के साथ कहा, "तुम मुझसे कैसे प्रभावित हो सकते हो? मेरी मुस्कान बहुत बड़ी है, और लोग मुझसे डर जाते हैं।" उसकी आवाज में एक हल्की सी उम्मीद की झलक थी, जैसे कि वह चाहता था कि चीकू उसे गलत साबित करे।

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चीकू ने अपनी चमकदार आँखों से देखते हुए कहा, "तुम्हारी मुस्कान तो बहुत प्यारी है! मैं देख सकता हूँ कि तुम्हारे दिल में कितनी अच्छाई है। किसी की मुस्कान से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे समझना चाहिए। तुम्हारी मुस्कान तो इस जंगल को रोशन कर देती है।" चीकू की बातों ने हिम्मत के दिल को छू लिया।

हिम्मत ने आश्चर्य और खुशी के मिश्रण से पूछा, "तुम सच में मेरे साथ दोस्ती करना चाहोगे?" चीकू ने हंसते हुए उत्तर दिया, "बिल्कुल! तुम्हारी मुस्कान ने मेरा दिल जीत लिया।" इस तरह, हिम्मत और चीकू की अनोखी दोस्ती की शुरुआत हुई।

पहले कुछ दिन चीकू अकेला ही उसके साथ दिखता था। बाकी जानवर दूर से देखते रहते। फिर एक दिन हिरन का वही बच्चा, जो कभी भागा था, पास आकर खड़ा हो गया। हिम्मत ने इस बार मुँह बंद रखा। चीकू ने कहा, 'ऐसे नहीं।' हिम्मत ने डरते-डरते पूरा मुँह खोला। हिरन का बच्चा नहीं भागा। वह हँस पड़ा।

जब हिम्मत जागी

चीकू ने हिम्मत को यह समझाया कि उसकी मुस्कान उसकी पहचान है, और उसे इसे गर्व से दिखाना चाहिए। हिम्मत ने अब अपनी मुस्कान को छिपाना बंद कर दिया। वह जंगल में गर्व से घूमता और सभी जानवरों को अपनी मुस्कान से प्रभावित करता। धीरे-धीरे, जंगल के अन्य जानवरों को भी समझ में आया कि हिम्मत की मुस्कान डरावनी नहीं, बल्कि दोस्ताना और दिल को छू लेने वाली थी।

एक दिन, जब आकाश में काले बादल घिर आए और जंगल में एक बड़ा तूफान आया, सभी जानवर भयभीत होकर इधर-उधर भागने लगे। लेकिन हिम्मत ने अपनी मुस्कान के साथ सभी को शांत किया। वह अपनी सूंड से जानवरों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने लगा। उसकी मुस्कान ने सभी को साहस दिया, और वे अपने डर को भूल गए।

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तूफ़ान में सबसे बड़ी दिक़्क़त अँधेरा था। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। छोटे जानवर आवाज़ के सहारे चल रहे थे और आवाज़ें आपस में गड्डमड्ड हो रही थीं। तब हिम्मत ने वह किया जो उसे सबसे अच्छा आता था। उसने मुँह खोला और हँसने लगा, ज़ोर से, लगातार। अँधेरे में वे सफ़ेद दाँत दूर से दिख जाते थे। जानवर उसी तरफ़ चलते रहे।

तूफान के बादल जब छंट गए और सूरज की किरणें फिर से जंगल को आलोकित करने लगीं, तब सभी जानवरों ने हिम्मत के पास आकर उसे धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "तुम्हारी मुस्कान ने हमें साहस दिया। अब हमें यह समझ में आया कि सच्ची दोस्ती और अच्छाई दिखाने के लिए कभी भी अपनी मुस्कान छिपानी नहीं चाहिए।"

हिम्मत ने अपनी बड़ी मुस्कान के साथ कहा, "मैंने तो बस अपनी मुस्कान और दिल से मदद की। असली खुशी दूसरों की मदद करने में ही है।" उसकी मुस्कान ने सबके दिलों में जगह बना ली थी।

तब से जंगल में एक चीज़ बदल गई। रात को जब कोई रास्ता भटक जाता, तो वह सबसे पहले यह देखता कि कहीं कुछ सफ़ेद चमक रहा है क्या। हिम्मत को यह बात पता चली तो उसने रात में गुफा के मुँह पर बैठना शुरू कर दिया। वह कुछ करता नहीं था। बस बैठा रहता, और मुँह खुला रखता।