बस अड्डे के उस कोने में कारू अड़तीस बरस से बैठ रहा था। बरसात में वहाँ काम सबसे ज़्यादा होता है।

पानी में चलने से जूते के तल्ले की सिलाई सबसे पहले जाती है। धागा गलता है, तल्ला मुँह खोल देता है, और उसके बाद हर क़दम पर पानी अंदर जाता है। कारू का काम उसी को बंद करना था। उसके पास दो तरह के धागे रहते थे।

एक आम था। मोम लगा हुआ सूती धागा, बंडल में आता था, और उसी से नब्बे में से नवासी जूते सिलते थे। दूसरा उसके अपने कपड़ों में से निकलता था।

यह नियम उसे उसके बाप ने बताया था और बाप ने अपने बाप से सुना था, और उसमें कोई जादू जैसी बात करके नहीं बताया गया था। उसे काम की तरह बताया गया था, जैसे रापी पकड़ना बताया जाता है।

नियम इतना था।

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जिस जूते की सिलाई अपने पहने हुए कपड़े से निकले धागे से की जाए, वह जूता अपने पहनने वाले को एक सफ़र में ग़लत मोड़ नहीं लेने देता। एक ही सफ़र में। उसके बाद वह टाँका ख़ुद ही खुल जाता है।

पहनने वाले को इसका कभी पता नहीं चलता।

उसे बस इतना लगता है कि रास्ता सीधा मिल गया, कि बस छूटते-छूटते बची, कि वह उस गली में मुड़ ही नहीं पाया जिसमें मुड़ने वाला था। यही सब लगता है और यही सब लगता रहता है। और धागा कहीं से तो आता ही है।

अड़तीस बरस में कारू का काला कोट पूरा जा चुका था। उसके बाद उसका कंबल, जिसमें अब बीच में एक गंजी जगह है। फिर उसके थैले की सिलाई। फिर उसकी अपनी चारपाई की निवार, जो तीन जगह से खुलकर दोबारा किसी और चीज़ से बाँधी गई है।

यह सब उसने कुल इकतालीस बार किया था। इकतालीस बार में अड़तीस बरस, यानी साल में एक बार भी नहीं।

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वजह भी सीधी है। यह हर किसी के लिए नहीं होता। कारू को जूते से पता चल जाता था कि आदमी किस हाल में है, और जब हाल ऐसा हो कि एक ग़लत मोड़ उसे कहीं और पहुँचा दे, तभी वह अपने कपड़े में हाथ डालता था।

उस बरसात में लड़का सावन के दूसरे हफ़्ते में आया। उसकी उम्र सोलह-सत्रह रही होगी और उसके साथ एक झोला था। जूता एक ही था जो उसने उतारा। दूसरा उसने पहने रखा, जो यह बताता है कि उसके पास और कुछ पहनने को नहीं है।

तल्ला पूरा खुला हुआ था। कारू ने उसे लिया और उलटकर देखा और उसे कई बातें एक साथ दिख गईं।

एड़ी एक तरफ़ से ज़्यादा घिसी थी, जो लंबा पैदल चलने से होता है। अंदर की परत गीली थी। और तल्ले में मिट्टी दो अलग रंग की लगी थी, यानी लड़का दो अलग इलाक़ों से चलकर आया था। उसने पूछा कि कहाँ जाना है।

लड़के ने कहा कि नई सड़क वाले चौराहे पर, जहाँ शाम को ट्रक लगते हैं। कारू को यह मालूम था कि वहाँ क्या लगता है।

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उन ट्रकों पर ठेकेदार के आदमी बैठते हैं और वे पंजाब के भट्ठों के लिए लड़के ले जाते हैं। पैसा पहले मिलता है, थोड़ा, और उसके बाद आठ महीने का हिसाब वहीं चलता है। उसने लड़के से यह भी पूछा कि घर में बता आया है।

लड़के ने कहा कि नहीं।

उसके बाद उसने वह कहा जो ऐसे लड़के कहते हैं और जिसका कोई जवाब नहीं होता। कि घर में खाने को नहीं है, कि बाप बीमार है, कि छोटी बहन है, और कि आठ महीने में लौट आएगा। कारू ने आगे कुछ नहीं पूछा।

उसके सामने दो काम थे।

पहला यह कि वह आम धागे से सिल दे। तब जूता ठीक हो जाता और लड़का चौराहे तक पहुँचता या नहीं पहुँचता, यह उसके अपने पैरों और उस शाम की बारिश पर रहता। दूसरा यह कि वह अपने कपड़े से धागा निकाले।

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तब लड़का चौराहे पर पहुँचता, ठीक वक़्त पर, बिना भटके। यहीं वह चीज़ है जिसे कारू ने अड़तीस बरस में कई बार सोचा और जिसका जवाब उसे हर बार वही मिला। वह नियम को मोड़ नहीं सकता था।

जूता उस जगह ले जाता है जहाँ पहनने वाला जाना चाहता है। वह यह तय नहीं करता कि जाना चाहिए या नहीं। यह तय करना कारू का काम कभी नहीं था और अगर वह यह करने लगता तो वह कुछ और हो जाता।

उसने कुर्ते की बग़ल वाली सिलाई खोली।

उसमें से उसने धागा खींचा, उसे मोम पर घिसा, और तल्ला सिया। इसमें उसे बीस मिनट लगे और उसने दाम बीस रुपये लिए, जो उस काम का आम दाम था।

लड़का जूता पहनकर चला गया।

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उस शाम बारिश बहुत हुई और चौराहे पर पानी भर गया, और सुना गया कि दो ट्रक फँस गए और एक ही निकला।

लड़का उसी एक में गया।

यह कारू को बाद में पता चला, और वह उसे इसलिए पता चला क्योंकि वह लड़का चार बरस बाद उसी बस अड्डे पर उतरा। वह लौट आया था और उसके साथ उसकी औरत थी।

उसने कारू को नहीं पहचाना। बस अड्डे के मोची को कोई नहीं पहचानता। वह उसके सामने से निकल गया और उसके पैरों में नए जूते थे, दुकान के, जिनका तल्ला चिपकाया हुआ होता है और सिला हुआ नहीं। कारू ने उसे रोका नहीं।

आज कारू की उम्र इकहत्तर है और वह उसी कोने में बैठता है।

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उसका अपना जूता तीन जगह से खुला हुआ है और उस पर तार बँधा है, तीन जगह। आम धागे से वह उसे सिल सकता है और उसने कभी सिला नहीं, इसलिए नहीं कि सिलना मना है, बल्कि इसलिए कि जब वह अपने जूते पर हाथ रखता है तो उसे हर बार यह याद आता है कि इस वक़्त कोई दूसरा जूता उसके सामने पड़ा हो सकता है, और वह उसे उठा लेता है।