नील की छत पर एक ही चारपाई थी, और उस पर हमेशा उसी का हक़ रहता था, क्योंकि वहाँ बैठने कोई और आता ही नहीं था। रात का खाना ख़त्म होते ही वह ऊपर चढ़ जाता। नीचे गाँव सोने लगता और बत्तियाँ एक-एक करके बुझतीं, और ऊपर तारे एक-एक करके निकलते। नील को लगता था कि यह अदला-बदली किसी ने तय कर रखी है।
एक रात, जब हवा में हल्की ठंडक थी और आसमान तारों से भरा हुआ था, नील ने देखा कि एक तारा अन्य सभी तारों से ज्यादा तेज़ी से चमक रहा था। यह तारा उसके लिए जैसे एक जादुई बुलावा था। नील की आँखों में कौतूहल था और वह सोचने लगा, "क्या यह तारा कुछ खास है?" उसकी आँखें उस तारे पर जमी रहीं, और उसे ऐसा लगा जैसे वह तारा उसे अपनी ओर खींच रहा हो। तभी उसने एक धीमी आवाज़ सुनी, "नील, तुम्हारे दिल में बहुत सारी इच्छाएँ हैं। अगर तुम विश्वास रखोगे, तो वे सच हो सकती हैं।"
नील चौंक गया। उसने अपनी चारों ओर देखा कि कहीं कोई है तो नहीं, फिर उसने आकाश की ओर देखा। तारा अब एक चमकदार रेखा में बदल चुका था, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर झुककर नील के पास आकर ठहर गई। तारे ने आवाज़ में कहा, "हाँ, मैं तुमसे ही बात कर रहा हूँ। मैं वह तारा हूँ जो तुम्हारे सपनों को पूरा करने में मदद कर सकता हूँ। लेकिन तुम्हें अपने सपनों पर विश्वास रखना होगा।"
जब डर भाग गया
नील के मन में हजारों सवाल थे, लेकिन उसने अपने दिल की बात कही, "मेरे सपने हैं कि मैं बड़ा आदमी बनूँ, अपनी किताबें लिखूं, और दुनिया को अच्छा बना सकूं। क्या आप मेरी मदद करेंगे?" तारा मुस्कराया और बोला, "तुम्हारी मेहनत और विश्वास ही तुम्हारे सपनों को सच करेंगे। लेकिन मैं तुम्हें एक खास संदेश देना चाहता हूँ - कभी हार मत मानो, क्योंकि टिमटिमाती रातें यही दिखाती हैं कि अंधेरे के बाद उजाला जरूर आता है।"
'पर मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं सही रास्ते पर हूँ?' नील ने पूछा। तारे ने कहा, 'तुम्हें नहीं पता चलेगा। बहुत दिनों तक नहीं चलेगा। इसीलिए इसे विश्वास कहते हैं।' नील ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। वह देर तक ऊपर देखता रहा।
उस रात नील को तारे से एक महत्वपूर्ण सीख मिली कि सपने सच करने के लिए केवल इच्छा और विश्वास ही नहीं, बल्कि मेहनत भी बहुत जरूरी है। उसने अपने आप से वादा किया कि वह कभी हार नहीं मानेगा और अपने सपनों की ओर लगातार बढ़ता रहेगा। नील की आँखों में एक नई चमक थी, जो उसके आत्मविश्वास की गवाही दे रही थी।
अगले दिन से ही नील ने अपनी पढ़ाई में और भी अधिक मेहनत करना शुरू कर दिया। वह अपने सपनों की दिशा में छोटे-छोटे कदम बढ़ाता गया। उसकी मेहनत का फल धीरे-धीरे दिखने लगा। नील ने न केवल अपने सपनों को पूरा किया, बल्कि उसने दूसरों को भी यह सिखाया कि विश्वास और मेहनत से कुछ भी संभव है। उसकी किताबें बच्चों को प्रेरणा देने लगीं, और उसकी कहानियाँ हर दिल को छूने लगीं।
बीच के साल आसान नहीं थे। एक बार उसकी पूरी कॉपी बारिश में भीगकर ख़राब हो गई और उसे सब कुछ दोबारा लिखना पड़ा। एक बार जो कहानी उसने लिखी, उसे पढ़कर मास्टरजी ने कहा कि यह किसी और की नक़ल लगती है, जबकि वह उसकी अपनी थी। नील ने दोनों बार लिखना छोड़ दिया। और दोनों बार, कुछ हफ़्तों में, फिर शुरू कर दिया।
मस्ती भरा अगला पल
समय के साथ नील बड़ा हुआ और उसने अपनी किताबें लिखी, जो बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। एक दिन, जब नील अपनी छत पर बैठा आकाश को निहार रहा था, उसे वही तारा फिर से चमकता हुआ दिखाई दिया। नील के चेहरे पर एक संतोषजनक मुस्कान थी, और उसने आकाश की ओर देखते हुए कहा, "आपने मेरा मार्गदर्शन किया, धन्यवाद। अब मैं जानता हूँ कि जो तारा रात को चमकता है, वह हमें सिखाता है कि हम कभी भी अपने सपनों को छोड़ नहीं सकते।"
अब भी कभी-कभी गाँव का कोई बच्चा उस छत पर चढ़ जाता है और तारों को देखता रहता है। नील उसे रोकता नहीं। वह जानता है कि उस बच्चे को भी शायद कोई आवाज़ सुनाई देगी। और यह भी जानता है कि वह आवाज़ कहाँ से आती है। कभी-कभी वह ख़ुद भी ऊपर चला जाता है। चारपाई अब भी वहीं पड़ी है। नील उस पर बैठता नहीं। वह बस बच्चे के पास खड़ा हो जाता है और उसके साथ ऊपर देखता रहता है, जब तक नीचे से किसी की आवाज़ न आ जाए। फिर दोनों चुपचाप उतर आते हैं।