राजू की कॉपी के हाशिये कभी ख़ाली नहीं रहते थे। जहाँ जगह मिलती, वहाँ वह कुछ न कुछ बना देता। घर की पिछली दीवार पर उसने एक पूरा गाँव बना रखा था, जिसे माँ ने कई बार पोतने की धमकी दी थी और कभी पोता नहीं। राजू के पास रंगों की एक पुरानी डिबिया थी, जिसमें बारह ख़ाने थे और उनमें से चार ख़ाली हो चुके थे। वह अक्सर सोचता था कि रंग आते कहाँ से हैं।

जैसे ही उसने यह सोचा, अचानक एक अद्भुत चीज़ हुई। वह एक जादुई रास्ते पर चल पड़ा और देखते ही देखते वह रंगों की दुनिया में पहुँच गया। वहाँ चारों ओर रंग-बिरंगे रंगों का माहौल था। आसमान नीला था, पेड़ हरे थे, और फूल हर रंग के थे। राजू को समझ में आ गया कि यह एक जादुई जगह है, जहाँ हर रंग की अपनी कहानी है।

सबसे पहले उसे एक बात अजीब लगी। यहाँ हर रंग बोल सकता था। पर कोई ऊँची आवाज़ में बात नहीं करता था। सब अपनी-अपनी जगह पर थे। किसी को दूसरे की जगह नहीं चाहिए थी। राजू ने यह पहली बार देखा। उसे यह अच्छा लगा।

एक नया दोस्त मिला

पहले राजू ने लाल रंग के बारे में सुना। लाल रंग ने राजू को बताया, "मैं उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक हूँ। जब लोग मुझे देखते हैं, तो उनका दिल खुश हो जाता है और उन्हें ताकत मिलती है।" राजू ने लाल रंग की दुनिया को देखा और पाया कि यह जगह बहुत ही ऊर्जावान थी। वहाँ हर जगह लोगों के चेहरों पर मुस्कान थी।

फिर राजू ने पीला रंग देखा, जो बहुत ही खुशमिजाज था। पीला रंग हंसते हुए बोला, "मैं खुशी और रोशनी का प्रतीक हूँ। जब लोग मुझे देखते हैं, तो उनका दिल खिल उठता है और वे खुश हो जाते हैं।" राजू ने देखा कि पीले रंग की दुनिया में हर जगह सूरज की रोशनी थी और सभी लोग हंसी में डूबे हुए थे।

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नीले रंग का सूरज यह कहानी एक जादुई सूरज के बारे में है, जो नीले रंग का था। यह बच्चों को सिखाती है कि हम अपनी दुनिया को अपनी सोच से बदल सकते हैं।

उसके बाद, राजू को नीला रंग दिखाई दिया। नीला रंग बहुत शांत और ठंडा था। उसने राजू से कहा, "मैं शांति और स्थिरता का प्रतीक हूँ। जब लोग मुझे देखते हैं, तो उनका मन शांत हो जाता है और वे विचारशील हो जाते हैं।" राजू ने देखा कि नीली दुनिया में सब कुछ शांत और सुलझा हुआ था। यहाँ की हवा में एक अजीब सी शांति थी।

फिर राजू ने हरा रंग देखा। हरा रंग राजू को अपनी ओर खींचते हुए बोला, "मैं जीवन और ताजगी का प्रतीक हूँ। जब लोग मुझे देखते हैं, तो वे अपने शरीर और मन में ताजगी महसूस करते हैं।" राजू ने देखा कि हरे रंग की दुनिया में हरियाली थी और सारे पेड़-पौधे ताजे और जीवन से भरपूर थे। यह एक सुंदर और ताजगी से भरी दुनिया थी।

अंत में, राजू ने सफेद रंग की दुनिया देखी। सफेद रंग बहुत शुद्ध और पवित्र था। उसने राजू से कहा, "मैं शांति और पवित्रता का प्रतीक हूँ। जब लोग मुझे देखते हैं, तो उनका मन शुद्ध हो जाता है और वे हर काम को सच्चाई से करते हैं।" सफेद रंग की दुनिया बहुत ही शांत और पवित्र थी, जहाँ सब कुछ साफ और उजला था।

दिन का सबसे प्यारा हिस्सा

'एक रंग तो यहाँ है ही नहीं,' राजू ने कहा। 'काला।' कुछ देर तक कोई नहीं बोला। फिर सफ़ेद रंग ने कहा, 'वह है। सबसे नीचे, सबसे पीछे। हम सब उसी पर बने हुए हैं।' राजू ने नीचे देखा और उसे समझ आया कि जिस ज़मीन पर वह खड़ा है, वह काली है। 'लोग उससे डरते क्यों हैं?' 'क्योंकि वे सिर्फ़ ऊपर देखते हैं,' सफ़ेद ने कहा।

राजू ने सोचा, "हर रंग की अपनी खासियत है, और सभी रंगों का एक साथ होना ही रंगों की दुनिया को खूबसूरत बनाता है।" राजू को समझ में आ गया कि रंग न केवल हमारी आँखों को सुंदर लगते हैं, बल्कि हमारे मन और आत्मा को भी प्रभावित करते हैं।

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तभी, रंगों की दुनिया का दरवाजा खुला और राजू ने अपनी आँखें खोली। वह अब समझ गया था कि हर रंग का महत्व होता है और हमें रंगों की सुंदरता को समझना चाहिए। रंगों की दुनिया ने उसे जीवन के बारे में बहुत कुछ सिखाया।

राजू ने आँखें खोलीं। वह अपनी उसी दीवार के सामने बैठा था। रंगों की डिबिया गोद में थी। चार ख़ाली ख़ाने अब भी ख़ाली थे। उसने डिबिया बंद की। फिर वह आँगन में चला गया। शाम की रोशनी दीवार पर तिरछी पड़ रही थी। दीवार का गाँव आधा बना हुआ था।

राजू ने अपने दोस्तों से कहा, "तुम्हें रंगों के बारे में और भी बहुत कुछ जानना चाहिए। हर रंग की एक अद्भुत कहानी है।" उसके बाद, राजू ने अपनी दुनिया को रंगों से भर दिया और हर दिन नए रंगों की सुंदरता का आनंद लिया।

उस साल राजू ने अपनी दीवार वाला गाँव पूरा किया। उसमें आसमान नीला था, खेत हरे, और छतें लाल। सबसे नीचे, ज़मीन के लिए, उसने वह रंग इस्तेमाल किया जो उसकी डिबिया में सबसे ज़्यादा बचा हुआ था और जिसे वह अब तक बेकार समझता आया था। माँ ने दीवार कभी नहीं पोती।