घर सस्ते में मिल गया था, और अमन को यही सबसे अच्छा लगा। सीमा ने पूछा भी कि इतना सस्ता क्यों है। दलाल ने कहा कि गाँव के बाहर है, इसलिए। यह पूरा सच नहीं था, पर झूठ भी नहीं था। घर के बारे में बातें बहुत थीं, और वे बातें दलाल ने नहीं बताईं। अमन ने बाद में सुनीं और हँसकर टाल दीं।

एक रात, जब अमन और सिमा अपने सोने की तैयारी कर रहे थे, तो अचानक घर में एक अजीब सी आवाज सुनाई दी। यह आवाज घर के नीचे से आ रही थी, जैसे कोई बहुत पुरानी लकड़ी की खपच्ची पर चल रहा हो। अमन ने सिमा से कहा, "तुमने सुनी ये आवाज?" लेकिन सिमा ने कहा, "यह सिर्फ हवाओं की आवाज है।" वे दोनों उस आवाज को नजरअंदाज करते हुए सो गए। हालांकि, अजीब सा अहसास दोनों के मन में बना हुआ था कि कुछ तो गड़बड़ था।

कुछ घंटे बाद, अमन की नींद में खलल पड़ा। वह अचानक जाग उठा, और उसने देखा कि सिमा बिस्तर पर नहीं थी। घबराया हुआ, वह कमरे में इधर-उधर देखने लगा। तभी, उसे कमरे के कोने से एक हल्की सी आहट सुनाई दी। वह धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ा, जहां से आवाज़ आ रही थी। जैसे ही वह बिस्तर से उतरा, उसकी नज़र कमरे के फर्श पर पड़ी, और उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। उसके सामने दृश्य इतना भयावह था कि उसे यकीन ही नहीं हुआ कि जो वह देख रहा था, वह सच है।

रोशनी बुझने से पहले

जमीन से बाहर, घर के नीचे की मिट्टी से एक कटा-फटा हाथ बाहर निकला था। यह हाथ पूरी तरह से सड़ा हुआ था, और उसकी त्वचा में जगह-जगह से फफोले पड़े हुए थे। अमन डर के मारे कांपने लगा, लेकिन उसने साहस जुटाया और हाथ को खींचने की कोशिश की। जैसे ही उसने उसे खींचने का प्रयास किया, एक जोरदार चीख़ घर में गूंज उठी। वह चीख़ इतनी तीव्र थी कि अमन का दिल जैसे उसकी छाती से बाहर कूद पड़ा। उसका शरीर बुरी तरह कांपने लगा।

अचानक, वह हाथ खींचकर बाहर की ओर खींचा गया, और फिर अमन ने देखा कि एक अजीब और डरावनी आकृति जमीन से बाहर निकलने लगी। वह आकृति धीरे-धीरे आकार ले रही थी। वह किसी महिला का रूप था, लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह से काली थीं और उसके शरीर की त्वचा जर्जर और सड़ी हुई थी। उसकी साँसों से बदबू आ रही थी, और उसकी खोपड़ी आधी टूट चुकी थी। अमन का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, और वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन कमरे के दरवाजे बंद हो गए थे।

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सिमा कहीं दिखाई नहीं दी, और अमन को महसूस हुआ जैसे वह अकेला था। उसने देखा कि वह आकृति धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी। अमन डर के मारे कांप रहा था, लेकिन उसे किसी तरह से अपनी जान बचाने के लिए रास्ता तलाशना था। उसका दम घुटने लगा और उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उसे लगा जैसे कुछ भयावह घटित होने वाला है, और वह किसी भी क्षण अपनी चेतना खो सकता है।

आकृति अमन के बिल्कुल पास पहुँच चुकी थी, और वह उसकी ओर देखकर कुछ बड़बड़ाई। अमन समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या कह रही थी। अचानक, एक तेज़ ठंडी हवा आई, और अमन के सामने एक बड़े आकार का साया प्रकट हुआ। वह साया उसके पास बढ़ने लगा, और जैसे ही वह अमन के पास पहुँचा, अमन ने उसकी आँखों में डर और गुस्सा देखा। वह साया बेहद भयावह था, जैसे किसी असली आत्मा का प्रतिनिधित्व कर रहा हो।

अचानक, एक चमकदार रोशनी कमरे में फैल गई, और साया गायब हो गया। अमन चिल्लाया और कमरे से बाहर दौड़ पड़ा। लेकिन जब उसने देखा कि सिमा वहीं खड़ी थी, वह उसकी ओर बढ़ा, लेकिन सिमा का चेहरा अब पहले जैसा नहीं था। उसकी आँखें कटी-फटी थीं, और उसका चेहरा डरावने घावों से भरा हुआ था। यह दृश्य देखकर अमन का दिल लगभग रुक सा गया। उसने डरते हुए सिमा से पूछा, "तुम... तुम ठीक हो?"

जब परछाइयाँ जिंदा हुईं

सिमा ने कहा, "मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी, अमन। यह घर शापित है।" अमन को समझ में आया कि वह आकृति सिमा के अंदर समा चुकी थी और अब वह उसे भी अपने जाल में फंसा लेना चाहती थी। सिमा का रूप अब पूरी तरह से बदल चुका था, और वह किसी अन्य शक्ति द्वारा नियंत्रित लग रही थी। डर के मारे, अमन ने सिमा को अपने साथ लिया और उस घर से बाहर भाग निकला। दोनों की सांसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन किसी तरह उन्हें बाहर निकलने का रास्ता मिल गया।

अगले दिन उन्हें पता चला कि उस घर की ज़मीन के नीचे पुरानी क़ब्रें हैं। कितनी, यह किसी को ठीक से नहीं मालूम था। अमन ने सिमा से यह बात छेड़नी चाही, पर सिमा ने बात बदल दी, और उसके बाद हर बार बदल दी। वे उस घर के पास दोबारा नहीं गए। सिमा अब भी कभी कभी रात में उठकर बैठ जाती है और दीवार की तरफ़ देखती रहती है। पूछने पर कहती है कि कुछ नहीं। अमन उसे जगाता नहीं, क्योंकि पहली बार जब उसने जगाया था, तो जवाब सिमा की आवाज़ में नहीं आया था।