राजीव को पहली बार वह एहसास खेत से लौटते वक़्त हुआ था। शाम गहरा रही थी और उसके पीछे कोई चल रहा था, इतने पास कि पैरों की आवाज़ अपनी आवाज़ से आधा क़दम पीछे सुनाई देती। उसने मुड़कर देखा। कोई नहीं था। उस दिन उसने इसे थकान समझकर छोड़ दिया। चौदह साल का लड़का था, दिनभर माँ के साथ काम और रात को पढ़ाई; थकना कोई बड़ी बात नहीं थी। लेकिन अगली शाम भी वही हुआ। और उसके अगली शाम भी।
एक रात, जब पूरा गाँव गहरी नींद में था, राजीव अपनी पढ़ाई में डूबा हुआ था। किताबों के पन्नों में खोया हुआ वह समय का ध्यान ही नहीं रख पाया। जब उसने घड़ी पर नजर डाली, तो पाया कि रात के बारह बज चुके थे। उसके गले में सूखापन महसूस हुआ, और वह पानी पीने के लिए किचन की ओर बढ़ा। घर के सभी कमरे सुनसान और सन्नाटे से भरे हुए थे। अचानक, उसे अपने पीछे एक हलकी सी आहट सुनाई दी। पहले तो उसने इसे अनसुना किया, लेकिन धीरे-धीरे वह आहट बढ़ने लगी, जैसे कोई उसके हर कदम के साथ कदम मिला रहा हो।
राजीव ने डर के मारे जल्दी से मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कुछ नहीं था। फिर भी, उसके दिल में एक अजीब सा एहसास था कि कोई उसके पीछे है। वह एक धुंधला साया था, जो धीरे-धीरे उसके पास आता जा रहा था। साया की मौजूदगी में एक अजीब सा डर था, जो उसके रोंगटे खड़े कर देता था। राजीव तेजी से घर के अंदर दौड़ा, लेकिन साया जैसे उसके हर कदम के साथ उसे घेरे जा रहा था। उसे समझ में आने लगा कि यह केवल उसकी कल्पना नहीं थी, कुछ तो था जो उसका पीछा कर रहा था।
एक कदम और, और सब बदल गया
उसके दिल की धड़कनें तेज़ हो रही थीं। वह समझ गया कि कुछ गलत हो रहा था। वह बाहर की ओर भागा, लेकिन जैसे ही वह दरवाजे के पास पहुँचा, साया ने उसे रोक लिया। दरवाजा बंद था, और राजीव के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। साया धीरे-धीरे राजीव के पास आया और उसने उसके कान में फुसफुसाया, "तुमसे मेरा पीछा नहीं छूटेगा।" राजीव के रोंगटे खड़े हो गए, वह बुरी तरह से डर चुका था, लेकिन फिर भी उसकी हिम्मत ने उसका साथ नहीं छोड़ा।
राजीव डर के मारे कांपते हुए पीछे मुड़ा और देखा, तो साया गायब हो चुका था। लेकिन उसके बाद राजीव को यह अहसास हुआ कि वह अकेला नहीं था। साया उसे हर जगह पीछा करने आया था। वह रात को सो नहीं पा रहा था। हर कमरे में साया उसे नजर आता। कभी दीवारों में, कभी छत से झूलते हुए, और कभी उसके ख्वाबों में। वह अब पूरी तरह से बेचैन हो गया था, जैसे उसका पीछा कभी खत्म न होने वाला था।
कुछ दिनों बाद, राजीव ने गाँव के चौराहे पर कुछ लोगों को चर्चा करते सुना। वे एक पुराने, खंडहर मकान के बारे में बात कर रहे थे, जिसमें एक रहस्यमय साया दिखाई देता है, जो किसी भी समय किसी को भी अपना शिकार बना सकता है। यह साया उन लोगों का था, जिन्होंने गाँव में बुरी हरकतें की थीं। वे आत्माएँ किसी भी निर्दोष व्यक्ति को पकड़ने का इंतजार करती थीं। राजीव ने यह कहानी सुनी थी, और उसे यकीन हो गया कि यही साया उसे परेशान कर रहा था।
राजीव अब पूरी तरह से हताश हो चुका था। उसे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। उसकी रातें अब बेहद काली और डरावनी हो चुकी थीं। हर समय साया उसे अपने घेरे में लाता, और उसकी आँखों में गहरी अंधकार छा जाता। उसने एक रात उस पुराने मकान में जाने का निर्णय लिया। उसे लगा कि अगर वह साया से सीधे मिले तो शायद वह इस समस्या का हल ढूंढ सकेगा। उसकी यह आखिरी उम्मीद थी।
राजीव उस पुराने, टूटी-फूटी खिड़कियों वाले मकान में घुसा, और वहां उसे वही साया मिला। यह वही साया था जो पिछले कुछ दिनों से उसे परेशान कर रहा था। वह साया उसे देखकर मुस्कराया, और अचानक बोल पड़ा, "तुमने हमारी शांति भंग की है। अब तुम्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।" राजीव का मन डर से कांपने लगा, लेकिन वह हिम्मत नहीं हारना चाहता था। उसने आत्मा से बात करने की ठानी।
रात का सबसे काला पहर
राजीव ने कांपते हुए कहा, "क्या तुम मेरे साथ कुछ करोगे?" साया ने ठंडी हंसी के साथ कहा, "तुम्हें अपनी जान बचाने के लिए कुछ करना होगा। तुम्हें हमारी आत्माओं को शांति देनी होगी। तभी तुम इस साए से बच सकते हो।" साया के शब्दों ने राजीव को अंदर तक हिला दिया। उसे समझ में आया कि यह समस्या सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि कई और लोगों की भी थी।
राजीव ने हिम्मत जुटाई और साया से पूछा, "तुम किस तरह से शांति चाहते हो?" साया ने कहा, "हमें हमारी पुरानी गलती का एहसास दिलाओ, और हमें इस दुनिया से मुक्त करो। तभी हम तुम्हारे पीछे नहीं आएंगे।" राजीव ने अपनी पूरी ताकत इकट्ठा की और इस रहस्य को सुलझाने की योजना बनाई। वह जानता था कि इसका हल गाँव के बुजुर्गों से मिलने वाली जानकारी में छुपा हो सकता है।
राजीव ने साहसिक कदम उठाया और गाँव के बुजुर्गों से इस साये के बारे में जानकारी ली। उसने जान लिया कि उस साये का अस्तित्व उन आत्माओं से जुड़ा था, जिन्होंने जीवन में बहुत गलत काम किए थे। उन्होंने जिन लोगों को नुकसान पहुँचाया था, उन्हीं के आशीर्वाद से वह शांति पा सकते थे। राजीव ने महसूस किया कि यह उसका जिम्मा था कि वह इन आत्माओं की गलती का एहसास दिलाए और उन्हें शांति दे।
राजीव ने गाँव के प्रमुख परिवारों से मिलकर उनकी मदद ली और एक विशेष पूजा आयोजित की। यह पूजा उन आत्माओं की शांति के लिए थी, जिनकी आत्माएं साया बनकर लोगों का पीछा कर रही थीं। पूजा के बाद, साया धीरे-धीरे शांत हो गया और वह हमेशा के लिए राजीव को छोड़कर चला गया। राजीव ने राहत की सांस ली, लेकिन यह अनुभव उसे कभी नहीं भूल सका।
कई महीनों बाद, एक शाम राजीव फिर उसी रास्ते से लौट रहा था। आदत के मारे उसने आधे रास्ते में मुड़कर देखा। पीछे सिर्फ़ खाली पगडंडी थी और ढलता हुआ सूरज। वह कुछ देर वहीं खड़ा रहा, फिर आगे बढ़ गया। पर उस दिन के बाद भी, उम्र भर, वह अंधेरे में पीछे मुड़कर देखना कभी नहीं भूला।