वेरावल से जो नावें निकलती हैं वे आठ से बारह दिन बाहर रहती हैं।
हर नाव पर एक वायरलेस सेट होता है और उस पर तय चैनल होते हैं। एक बंदरगाह से बात करने के लिए, एक बाक़ी नावों के लिए, और एक ख़तरे के लिए, जिसे कोई नहीं छेड़ता। इलियास उस नाव पर तंदेल था, यानी चलाने वाला, और वह उन्नीस बरस से समुद्र में था।
तंदेल का काम सिर्फ़ नाव चलाना नहीं होता। उसे यह तय करना होता है कि जाल कहाँ डालेगा, कब लौटेगा, और मौसम बिगड़ने पर क्या करेगा। बाक़ी लोग उसकी बात मानते हैं और उससे वजह नहीं पूछते, और इसके बदले नुक़सान होने पर हिसाब भी उसी से माँगा जाता है।
उसके साथ छह आदमी थे।
उस चक्कर में वे तट से लगभग साठ मील बाहर थे, उस पट्टी में जहाँ गहराई अचानक बढ़ जाती है। जाल रात में डाला जाता है और सुबह खींचा जाता है, इसलिए रात में नाव लगभग खड़ी रहती है और आदमी सोते हैं। एक जागता है।
पहली रात रहमान जाग रहा था। दो बजे के आसपास उसने सेट पर आवाज़ सुनी। वह उस चैनल पर थी जो ख़ाली रहता है। उस पर कोई स्टेशन नहीं है और वहाँ सिर्फ़ खरखराहट आती है। आवाज़ ने एक नाम लिया, साफ़, जैसे कोई पास से बोल रहा हो।
रहमान ने उसे ठीक से नहीं सुना और उसने सोचा कि किसी दूसरी नाव की बात इधर आ गई होगी, जो होता है। दूसरी रात इलियास जाग रहा था। दो बजे के आसपास आवाज़ फिर आई और इस बार खरखराहट कम थी।
इस बार उसने साफ़ सुना। आवाज़ ने उसके अपने पिता का नाम लिया।
उसके पिता को गुज़रे चौदह बरस हो चुके थे और वे भी इसी काम में थे और वे समुद्र में ही गए थे, एक तूफ़ान में, और उनकी नाव का कुछ नहीं मिला था।
उस तूफ़ान में उस बंदरगाह से गई तीन नावें नहीं लौटीं और उन पर कुल उन्नीस आदमी थे। मलबा दो हफ़्ते तक किनारे लगता रहा, तख़्ते, जाल के टुकड़े, प्लास्टिक के डिब्बे, और उनमें से जो पहचाना जा सका वह लोगों ने ले लिया। इलियास के घर में उस मलबे में से कुछ नहीं आया।
इलियास ने किसी को नहीं जगाया। उसने सेट का घुंडी घुमाकर चैनल बदल दिया और वह सुबह तक जागता रहा। तीसरी रात उसने सेट बंद करके सोने का फ़ैसला किया।
यह वह चीज़ है जो समुद्र में नहीं की जाती। सेट रात भर चालू रहता है, क्योंकि मौसम की चेतावनी उसी पर आती है और वह किसी भी वक़्त आ सकती है। उसने फिर भी बंद कर दिया। दो बजे उसकी नींद खुली।
सेट बंद था और उसकी बत्ती नहीं जल रही थी। और फिर भी आवाज़ आ रही थी। वह उसी सेट से आ रही थी, धीमी, वैसी ही खरखराहट के भीतर से, और वह वही नाम ले रही थी।
इलियास उठकर बैठ गया।
उसके सामने दो चीज़ें थीं। वह सेट का तार खींच सकता था, जो बैटरी से जुड़ा था, और उसके बाद वह चीज़ बंद हो जाती या नहीं, यह उसे नहीं मालूम था। दूसरी चीज़ यह थी कि नाव पर छह आदमी सो रहे थे और वे उसके ज़िम्मे थे, और तट साठ मील दूर था।
उसने तार नहीं खींचा। उसने सेट चालू कर दिया।
यह उसने सोचकर किया था और उसकी वजह सीधी थी। बंद सेट से आवाज़ आ रही थी, यानी उसे बंद रखने से वह चीज़ रुक नहीं रही थी। चालू सेट पर कम से कम बाक़ी चैनल भी चलते हैं और मौसम की चेतावनी आ सकती है, और नाव पर छह आदमी सो रहे थे।
बत्ती जल गई और खरखराहट तेज़ हो गई, और उसमें से आवाज़ चली गई।
सुबह होते ही उसने पहला काम यह किया कि उसने उस चैनल पर ख़ुद बोलकर देखा। उसने अपना नाम कहा, नाव का नंबर कहा, और दो बार पूछा कि कौन है। जवाब में सिर्फ़ खरखराहट आई, वैसी ही जैसी उस चैनल पर हमेशा आती है।
उसने बाक़ी रात सेट के पास बैठकर काटी और सुबह उसने जाल खिंचवाया और नाव तट की तरफ़ मोड़ दी, चार दिन पहले। बाक़ी छह ने पूछा। उसने कहा कि मौसम ठीक नहीं लग रहा। मौसम उन चार दिनों में बिलकुल ठीक रहा और नाव ख़ाली लौटी और उस चक्कर में सबका नुक़सान हुआ।
एक चक्कर का ख़र्च डीज़ल, बर्फ़ और राशन मिलाकर काफ़ी बैठता है और वह पहले ही लग चुका था। जो मछली उस वक़्त तक पकड़ी गई थी वह चार दिन कम होने की वजह से आधी से भी कम थी। हर आदमी का हिस्सा उस चक्कर में उसकी उम्मीद के एक तिहाई पर आया।
किसी ने उससे इस बारे में दोबारा बात नहीं की, और मछुआरों में यह बात मानी जाती है कि तंदेल का फ़ैसला आख़िरी होता है और उसकी वजह नहीं पूछी जाती। वह सेट उसने बदलवा दिया और नया लगवाया।
पुराना उसने बेचा नहीं और फेंका नहीं। वह उसके घर की छत वाली कोठरी में रखा है, तार कटा हुआ, और उसकी घुंडी अब भी उसी चैनल पर टिकी है जिस पर उसने तीसरी रात छोड़ी थी।