विकास और उसके तीन दोस्त उस दोपहर खंडहर तक इसलिए पहुँच गए क्योंकि गेंद उधर चली गई थी। वे वहाँ जाते नहीं थे। जगह ख़राब मानी जाती थी। गेंद ढूँढ़ते हुए विकास एक टूटी दीवार के पीछे गया, और वहीं रुक गया। ज़मीन पर एक कटा हुआ हाथ पड़ा था। इंसान का। और उसके कटे हिस्से से ख़ून नहीं बह रहा था।

विकास और उसके दोस्तों को यह देखकर बहुत डर लगा। लेकिन विकास ने सोचा कि यह शायद किसी पुराने हादसे का हिस्सा हो सकता है। उसने दोस्तों से कहा, "यह शायद किसी के काम करने का तरीका होगा। हमें इसे देखे बिना छोड़ देना चाहिए।" लेकिन उसके दोस्तों ने विरोध किया और कटा हुआ हाथ उठाने की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने हाथ को छुआ, अचानक तेज़ हवा चलने लगी और आसपास का माहौल भयावह हो गया।

थोड़ी देर बाद, विकास ने देखा कि वह हाथ अचानक हिलने लगा और फिर एक विचित्र आवाज़ सुनाई दी, "तुमने मुझे क्यों छुआ? अब तुम मेरी गिरफ्त से नहीं बच सकते।" विकास और उसके दोस्त डर के मारे कांपने लगे। वह सब वापस घर लौटने के लिए भागे, लेकिन जब तक वे घर पहुँचते, सब कुछ और भी अजीब हो गया।

आख़िरी दरवाज़ा

घर पहुँचने पर, विकास ने महसूस किया कि कुछ अलग था। घर में सन्नाटा था, जैसे कि कुछ ग़ायब था। उसकी माँ और पिताजी चुप थे, और उनकी आँखों में एक घबराहट थी। वह खुद भी डर से काँप रहा था, लेकिन उसने इसे अनदेखा कर दिया। रात को, जब विकास सो रहा था, उसने महसूस किया कि उसके पास किसी का साया खड़ा है। वह उठकर देखता है, और उसे सामने वही कटा हुआ हाथ नजर आता है। यह हाथ अपने आप उसके कमरे में आ चुका था। वह हाथ धीरे-धीरे विकास की ओर बढ़ने लगा। विकास ने डर के मारे चीख मारी, लेकिन हाथ और भी पास आ गया।

अचानक, विकास ने सुना एक आवाज़ आई, "तुमने मुझे परेशान किया है, अब तुम्हें मेरी सजा मिलेगी।" वह आवाज़ साफ तौर पर किसी महिला की थी, लेकिन साथ ही वह एक भूतिया और घबराई हुई आवाज़ भी लग रही थी। विकास की आँखों के सामने वह कटा हुआ हाथ अचानक किसी और रूप में बदलने लगा, और वह हाथ एक खूनी आत्मा में तब्दील हो गया। उसकी आँखों में जलती हुई आग और चेहरे पर गुस्से की छाया थी।

📚 यह भी पढ़ें भूतिया झील
भूतिया झील पढ़ें 'भूतिया झील', एक डरावनी कहानी जिसमें एक रहस्यमय झील में बसी हुई आत्माएँ किसी को भी अपनी गिरफ्त में ले सकती हैं। यह कहानी भूतिया घटनाओं और डरावनी एहसासों से भरी हुई है।

विकास ने भागने की कोशिश की, लेकिन हाथ हमेशा उसकी ओर बढ़ रहा था। उसने देखा कि उस आत्मा का चेहरा पूरी तरह से विकृत था, उसकी आँखों में दर्द और क्रोध की भावना साफ तौर पर झलक रही थी। "अब तुम्हें मेरी ताकत का अहसास होगा," आत्मा ने कहा और हाथ को विकास के गले के पास ले जाने लगी। जैसे ही हाथ उसके गले के पास आया, उसने महसूस किया जैसे उसका दम घुटने लगा हो।

डर के मारे, विकास ने सोचा कि अगर वह आत्मा को शांत कर सकता है, तो शायद वह उसे छोड़ देगी। उसने वही किया जो आत्मा ने उसे कहा था, और खुद को आत्मा के सामने प्रस्तुत किया। "मैं जानता हूँ कि तुम्हें शांति नहीं मिली है। बताओ, क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ?" विकास ने आवाज़ में डर के साथ कहा। उसने अपने अंदर की हिम्मत को जुटाकर आत्मा से बात करने की कोशिश की।

आत्मा ने थोड़ी देर चुप रहने के बाद कहा, "मुझे मेरे शरीर का सही सम्मान चाहिए। मुझे मेरे कटे हुए हाथ के साथ दफनाया नहीं गया था, और इसलिए मैं शांति से नहीं रह पाई।" आत्मा की बात सुनकर विकास को समझ में आ गया कि वह केवल शांति की तलाश में थी, और यह उसे बुरी तरह से परेशान कर रहा था। उसने आत्मा को आश्वासन दिया कि वह उसकी मदद करेगा।

एक कदम और, और सब बदल गया

विकास ने आत्मा की बात समझी और अगले दिन गाँव के पंडित से मदद लेकर उस आत्मा के शरीर को ढूंढकर उसे सम्मानित किया। पंडित ने कहा कि यह आत्मा किसी पुराने अधूरे क़िस्से से जुड़ी हुई थी, और उसके शरीर को सही तरीके से दफनाने से ही वह शांति प्राप्त कर सकती थी। गाँव के एक पुराने मंदिर में आत्मा की अंतिम इच्छा पूरी की गई।

पंडित के कहने पर गाँव वालों ने वह हाथ ज़मीन में दफ़्न किया, उसी जगह के पास जहाँ बरसों पहले वह आदमी मारा गया था। कोई पास खड़ा नहीं रहना चाहता था। सब दूर से देखते रहे। मिट्टी डालते वक़्त विकास के हाथ काँप रहे थे, और उसने यह किसी को दिखने नहीं दिया। काम ख़त्म होने के बाद गाँव में एक अजीब सी ख़ामोशी थी, जैसी बरसात रुकने के बाद होती है। विकास उस रात पहली बार बिना जागे सोया।

📚 यह भी पढ़ें आत्मा का पीछा
आत्मा का पीछा पढ़ें 'आत्मा का पीछा', एक डरावनी कहानी, जहाँ एक आत्मा एक व्यक्ति का पीछा करती है और उसे अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

उसके बाद वह हाथ फिर कभी नहीं दिखा। खेत उसी तरह जोते जाते रहे और लोग धीरे धीरे उस बात को कम करने लगे। सिर्फ़ एक चीज़ नहीं बदली। जिस जगह हाथ दफ़्न हुआ था, वहाँ की ज़मीन पर कुछ नहीं उगता। विकास हर साल वहाँ बीज डालता है, हर साल कुछ नहीं होता, और वह अगले साल फिर डालता है। गाँव में लोग कहते हैं कि वह बेकार में मेहनत करता है। विकास कुछ जवाब नहीं देता।