कब्रिस्तान के पास वाला रास्ता शाम के बाद सूना हो जाता था। दिन में लोग उधर से आते-जाते रहते, बात करते, हँसते। सूरज ढलते ही वही रास्ता ऐसे बदल जाता, जैसे किसी ने उसे उठाकर कहीं और रख दिया हो। जो लोग मजबूरी में उधर से गुज़रे थे, वे सब एक ही बात बताते थे। एक सफ़ेद साया, कब्रों के बीच, जो हिलता नहीं था।

गाँव के एक युवक, राजीव ने इन अफवाहों को सिर्फ एक कहानी समझा था। वह किसी भी प्रकार के भूत-प्रेत पर विश्वास नहीं करता था। राजीव को लगता था कि यह सब सिर्फ गाँव के बुजुर्गों की बेतुकी बातें थीं। एक रात उसने तय किया कि वह खुद उस कब्रिस्तान में जाएगा और देखेगा कि क्या सच में कोई आत्मा है, जैसा कि लोग कहते थे। उसकी जिज्ञासा ने उसे इस खतरनाक फैसले पर मजबूर किया।

रात के सन्नाटे में राजीव अकेला कब्रिस्तान में पहुंचा। हवा में एक अजीब सी खामोशी थी, जैसे पूरी दुनिया सो रही हो। उस स्थान पर जाते ही एक अजीब सी हवा चलने लगी। हवा इतनी ठंडी थी कि वह राजीव को भीतर से कांपने पर मजबूर कर रही थी। उसने सोचा कि यह बस एक सामान्य रात की हवा है, लेकिन फिर उसे कुछ हलचल सी महसूस होने लगी। जैसे किसी ने उसके पास से कदमों की आवाज की हो।

जो पीछे छूट गया था

राजीव ने नज़रें घुमाई, लेकिन चारों ओर कुछ भी नहीं था। अचानक, कब्रिस्तान के बीच में एक पुरानी कब्र के पास एक धुंधली आकृति उभरने लगी। वह आकृति धीरे-धीरे एक महिला की रूप में बदलने लगी। उसके चेहरे पर घनी बालों का ढ़ेर था, और उसकी आँखों से खून बह रहा था। यह दृश्य इतना डरावना था कि राजीव की रूह तक कांप गई। उसे महसूस हुआ जैसे वह कभी भी किसी गहरी अंधेरी खाई में गिर सकता है।

महिला ने धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ते हुए कहा, "तुम्हें यहाँ क्यों आना पड़ा?" राजीव की सांसें थम सी गईं, लेकिन वह अपनी जगह से हिला नहीं। वह किसी भी तरह से उस आत्मा से डरकर भागना नहीं चाहता था। उसके मन में एक ही विचार था: वह इस भूतिया रहस्य को जानने के बाद ही वापस लौटेगा। फिर उस आत्मा ने अपनी कहानी सुनानी शुरू की। उसने बताया कि वह किसी समय यहाँ पास के गाँव में एक लड़की थी, जिसका नाम सविता था। उसकी मृत्यु एक दर्दनाक हादसे में हुई थी, लेकिन उसकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिली।

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"मैं सच्चाई जानने के बाद मरी थी," वह आत्मा बोली, "लेकिन अब मुझे अपनी मौत का बदला लेना है।" अचानक, उस महिला की आत्मा एक ज़ोरदार चीख के साथ हवा में उड़ने लगी और फिर कब्रिस्तान की दीवारों में गायब हो गई। राजीव को समझ में आ गया कि उसे यहाँ से तुरंत निकल जाना चाहिए, लेकिन उसकी कोशिशों के बावजूद उसे अपनी सुरक्षा के लिए कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।

लेकिन राजीव जितनी कोशिश करता, वह कब्रिस्तान से बाहर नहीं जा पा रहा था। उसे महसूस हुआ कि जैसे उसकी क़दमों को कोई खींच रहा हो। वह न चाहकर भी उसी स्थान पर वापस लौटने लगा। अचानक, वही महिला की आत्मा फिर से सामने आई, इस बार और भी भयावह रूप में। उसकी आत्मा ने कहा, "तुमसे पहले कई लोग यहाँ आए, लेकिन कोई भी वापस नहीं लौटा। तुम भी अब यहीं रहोगे।" इस बार उसकी आवाज़ में गुस्से और बदले का अहसास था।

राजीव को डर के मारे अब कुछ समझ में नहीं आ रहा था। वह जितना जोर लगाता, उतना ही वह और भी गहरे फंसता गया। उसकी आँखों में डर और दिल में एक अजीब सी घबराहट थी। तभी उसने अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट ऑन की और पास की कब्र पर ध्यान दिया। उस कब्र के ऊपर एक अजीब सा निशान बना हुआ था, और जैसे ही उसने उस निशान को छुआ, एक तेज़ धमाका हुआ और वो महिला की आत्मा बुरी तरह चीखी और भूतिया आवाज़ के साथ लापता हो गई।

दरवाज़े के उस पार

राजीव की हालत खराब थी, लेकिन वह किसी तरह वहाँ से बाहर निकलने में सफल हो गया। उसे अपनी आँखों में चमक और दिल में डर दोनों का अहसास हुआ। बाहर आते ही उसकी साँसें हल्की हुईं, लेकिन उसका मन नहीं रुक रहा था। वह अगले दिन गाँव के बुजुर्गों से उस महिला के बारे में पूछने गया। बुजुर्गों ने बताया कि यह आत्मा गाँव में एक अपराधी द्वारा मारे गए मासूम लड़की की थी। वह आत्मा हमेशा से अपनी मौत का बदला लेना चाहती थी और इस कब्रिस्तान में भटकती रहती थी।

बुज़ुर्गों ने बताया कि उस क़ब्र में जो लड़की दफ़्न है, उसका क़ातिल कभी पकड़ा नहीं गया। मुक़दमा चला ही नहीं। जिन दो लोगों ने उस रात कुछ देखा था, वे दोनों बाद में गाँव छोड़कर चले गए। राजीव ने पूछा कि वे कहाँ गए। किसी को नहीं मालूम था। उस रात राजीव देर तक जागता रहा और यही सोचता रहा कि वह उसके पीछे क्यों पड़ी है। जवाब उसे बहुत बाद में समझ आया। वह उस क़ब्रिस्तान में अकेला जाने वाला पहला आदमी था जो लौटकर किसी को बता सकता था।