जेठाराम ने एक ही निर्देश दिया था और वह चार शब्द का था। बिल्कुल सामने वाले जैसा। बस यही। सामने वाला घर छह बरस पहले बना था और वह उस गली में सबसे अच्छा माना जाता है। उसकी वजह उसका नक़्शा है। और सिर्फ़ नक़्शा।
उसमें आँगन बीच में है, रसोई पूरब में, और ऊपर की सीढ़ी बाहर की तरफ़ से चढ़ती है, जिससे ऊपर का हिस्सा अलग किराए पर उठाया जा सकता है। यह अच्छा नक़्शा है और जेठाराम की तारीफ़ बनती है कि उसने इसे पहचाना।
मिस्त्री का नाम छीतरमल है और वह उस गली का काम बीस बरस से करता है। सामने वाला घर भी उसी ने बनाया था। पूरा उसी ने। यानी उसे वह नक़्शा याद था और नाप भी। काम शुरू हुआ। सात महीने चला।
घर अच्छा बना और यह उस गली में सब मानते हैं। जो चीज़ें साथ में उतर आईं, वे चार हैं और वे एक-एक करके सामने आईं। पहली सीढ़ी वाली है और वह सबसे बड़ी है। बाहर की सीढ़ी में तेरह क़दम हैं और उनमें से नौवाँ बाक़ी सबसे डेढ़ इंच ऊँचा है।
यह सामने वाले घर में भी वैसा ही है। ठीक वैसा। उसकी वजह छह बरस पुरानी है। उस वक़्त सीमेंट की एक बोरी कम पड़ गई थी और काम एक दिन रुका था, और अगले दिन जो तह चढ़ी वह थोड़ी मोटी बैठ गई।
छीतरमल को यह याद था। सब याद था। उसने इस बार भी नौवाँ क़दम डेढ़ इंच ऊँचा रखा। पूछने पर उसने कहा कि सामने वाले जैसा बोला था। यह जवाब बहस से बाहर है। इसका कोई जवाब नहीं। दूसरी चीज़ रसोई की खिड़की है।
वह पूरब में है और उसके पल्ले बाहर की तरफ़ खुलते हैं, अंदर की तरफ़ नहीं। बाहर की तरफ़ खुलने से बरसात में पानी अंदर आता है। सामने वाले घर में यह ग़लती से हुआ था, क्योंकि बढ़ई ने चौखट उलटी लगा दी थी और उस वक़्त बदलवाना महँगा पड़ रहा था।
इस बार वह जान-बूझकर वैसी लगी। नाप से लगी। तीसरी चीज़ सबसे छोटी है और उस पर सबसे ज़्यादा हँसी हुई। सामने वाले घर के आँगन में एक जगह फ़र्श ढालू है, तीन फ़ुट के घेरे में, जिससे वहाँ पानी जमा होता है।
उस घर में उस जगह पर एक तुलसी का गमला रखा है, जो पानी को छिपा देता है। जेठाराम के घर में वह ढाल है और गमला नहीं है। गमला उसने बाद में रखा। छह महीने बाद। चौथी चीज़ दरवाज़े की है और उसका पता आठ महीने बाद चला।
सामने वाले घर का मुख्य दरवाज़ा साढ़े छह फ़ुट का है, जबकि चलन सात फ़ुट का है। यह इसलिए है कि उस घर के मालिक की लंबाई कम है और उसने कहा था कि छोटा रखो, दरवाज़ा सस्ता पड़ेगा। जेठाराम छह फ़ुट का है। पूरे छह।
उसे यह आठवें महीने में समझ आया, जब उसने सिर पर पगड़ी बाँधकर निकलने की कोशिश की। इन चार के अलावा एक पाँचवीं चीज़ भी उतरी और वह किसी ग़लती की नहीं थी। सामने वाले घर के आँगन के कोने में एक नीम का पेड़ है, जो घर बनने से पहले से वहाँ है।
उसके लिए आँगन के फ़र्श में एक गोल जगह छोड़ी गई थी, बिना सीमेंट की। जेठाराम के आँगन में भी वैसी गोल जगह छूटी है। उसमें पेड़ नहीं है। छीतरमल ने वह जगह छोड़ी और जेठाराम ने इस पर कुछ नहीं पूछा, क्योंकि उस वक़्त तक वह समझ चुका था कि निर्देश उसने ही दिया था।
उस गोल जगह में अब जेठाराम ने अमरूद का पौधा लगा दिया है, जो तीन बरस में कमर तक आया है। इसका पता चलने पर एक बैठक हुई, जिसमें जेठाराम, छीतरमल और गली के दो लोग थे। उस बैठक में छीतरमल ने बहुत सीधी बात कही।
उसने कहा कि उसे यह सब मालूम था। चारों बातें। और उसने यह भी कहा कि उसने पूछा नहीं, क्योंकि पूछने का मतलब यह होता कि वह सामने वाले घर की ग़लती बता रहा है। सामने वाला घर उसी ने बनाया था।
गली में उस घर की तारीफ़ होती है और उस तारीफ़ में उसका हिस्सा है। अपनी ही बनाई चीज़ की ग़लती गिनवाना कोई काम नहीं है। यह बात बैठक में बैठे दोनों लोगों को जमी। जेठाराम को भी जमी, और उसने छीतरमल का बाक़ी पैसा उसी हफ़्ते दे दिया।
उसके बाद दो चीज़ें बदली गईं और दो नहीं। दरवाज़ा बदला गया, क्योंकि उसमें रोज़ सिर लगता था। खिड़की के पल्ले पलटवाए गए, क्योंकि बरसात आने वाली थी। आँगन की ढाल नहीं बदली और उस पर गमला रखा है। और नौवाँ क़दम वैसा ही है। डेढ़ इंच ऊँचा।
उसे बदलवाने में पूरी सीढ़ी तोड़नी पड़ती, और जेठाराम ने हिसाब लगाकर मना कर दिया। अब उस घर में जो नया आदमी आता है, वह नौवें क़दम पर एक बार लड़खड़ाता है। यह हर बार होता है और घर वाले इसकी उम्मीद रखते हैं।
जेठाराम ने इसका जवाब भी बना लिया है और वह उसे बिना हिचक बोलता है। वह कहता है कि यह जान-बूझकर रखा है, ताकि आदमी ध्यान से चढ़े, और सामने वाले घर में भी ऐसा ही है। दूसरी बात सच है और पहली नहीं, और यह उस मुहल्ले में तीन लोगों को मालूम है, और उनमें से किसी ने कभी नहीं टोका।