साढ़े छह बजे वे मोड़ पर इकट्ठा हो जाते थे। नौ कुत्ते।
केसर तीस बरस से यह करती आई थी। शाम की रोटियाँ बनते वक़्त वह छह अलग रख देती थी और साढ़े छह बजे नीचे उतरकर उन्हें गली के मोड़ पर डाल देती थी।
उस मुहल्ले में यह किसी को अच्छा नहीं लगता था और उस पर बात भी हुई थी। कुत्ते जमा होते हैं, बच्चों को डर लगता है, और गली गंदी होती है।
केसर ने उन तीस बरसों में यह बात कभी नहीं मानी और उसने बहस भी नहीं की। वह रोज़ डालती रही।
पिछले बरस उसका घुटना बैठ गया। एक ही दिन में।
वह चल सकती है और सीढ़ी नहीं उतर सकती। उनका घर दो मंज़िला है और वे ऊपर रहते हैं, और सीढ़ी तंग और घुमावदार है।
उसकी उम्र चौहत्तर है। सीढ़ी बीस साल पुरानी है।
यह काम उसके पोते को मिला। और किसी के पास वक़्त नहीं था।
उसका नाम अवतार है और वह इक्कीस का है और बीए के दूसरे बरस में है।
उसे यह काम नहीं चाहिए था और उसने यह कहा भी।
उसकी वजह कुत्तों से नफ़रत नहीं थी। वजह यह थी कि साढ़े छह बजे उसका दोस्तों के साथ बैठने का वक़्त था, और गली के मोड़ पर रोटी डालते हुए उसे उन्हीं दोस्तों के सामने खड़ा होना पड़ता था।
पहले महीने में उसने यह काम चौदह दिन किया और सोलह दिन नहीं किया।
जिन दिनों उसने नहीं किया, उन दिनों केसर को यह पता चल जाता था।
उसे नीचे दिखता नहीं है। वह फिर भी जानती थी।
इसका तरीक़ा आवाज़ था। कुत्ते साढ़े छह बजे इकट्ठा होते हैं और रोटी न मिलने पर वे वहीं देर तक भौंकते हैं, और आठ बजे तक भौंकते रहते हैं। यह आवाज़ ऊपर आती है।
जिन दिनों रोटी पड़ जाती थी, उन दिनों गली दस मिनट में चुप हो जाती थी।
केसर ने अवतार से इस पर एक बार भी कुछ नहीं कहा।
यह उसकी नरमी नहीं थी। उसने अपनी बहू से कहा और बहू ने अवतार से कहा, और अवतार ने कहा कि मैं भूल गया था।
दूसरे महीने में उसने अठारह दिन किया।
उन तीस बरसों की एक बात अवतार को नहीं मालूम थी और वह उसे बाद में उसकी माँ ने बताई। शुरू में यह छह रोटियाँ नहीं थीं। दो हज़ार पाँच की बरसात में गली में एक कुतिया ने पिल्ले दिए थे और उनमें से तीन बचे, और केसर ने उन्हीं दिनों यह शुरू किया था। छह की गिनती बाद में बनी, जब वे बड़े हो गए, और तीस बरस वही चली।
तीसरे महीने में उसने एक चीज़ बदली, और वह चीज़ छोटी थी और उससे सब बदल गया।
उसने वक़्त बदल दिया। सुबह कर दिया।
उसने रोटियाँ शाम को नहीं, सुबह छह बजे डालनी शुरू कर दीं, जब वह अपने कॉलेज के लिए निकलता था और गली ख़ाली रहती थी और उसके दोस्त सो रहे होते थे।
इससे उसका काम आसान हो गया और उसने वह लगभग रोज़ किया।
पर इससे एक चीज़ बिगड़ गई जो उसने नहीं सोची थी।
कुत्ते साढ़े छह बजे शाम को आते रहे, क्योंकि वह उनका तीस बरस का वक़्त था, और वहाँ कुछ नहीं मिलता था, और वे भौंकते थे।
ऊपर केसर को यह रोज़ सुनाई देता था। पूरे आधे घंटे।
उसने पंद्रह दिन सुना और सोलहवें दिन उसने अपनी बहू से कहा कि उससे कह दो कि शाम को डाले।
यह बात अवतार तक पहुँची और उस दिन घर में पहली बार आवाज़ ऊँची हुई।
अवतार ने कहा कि वह कर रहा है, रोज़ कर रहा है, और अब वक़्त की भी शर्त है।
केसर ने उससे कुछ नहीं कहा और अगले दिन उसने वह काम ख़ुद करने की कोशिश की।
वह सीढ़ी पर तीन क़दम उतरी और उसे वहीं बैठना पड़ा और उसकी बहू ने उसे ऊपर खींचा।
उस शाम अवतार साढ़े छह बजे रोटी डालने गया और उसने अपने दोस्तों के सामने डाली।
उसके बाद वह रोज़ जाता है, और यह अब सोलह महीने का हो गया है।
उसने अपने दोस्तों से इसका कारण कभी नहीं बताया और उन्होंने उसे दो-तीन महीने चिढ़ाया और फिर छोड़ दिया।
सर्दियों में एक बात और निकली। दिसंबर-जनवरी में शाम साढ़े छह बजे अँधेरा हो जाता है और गली की एक बत्ती ख़राब है, और उस अँधेरे में मोड़ पर कुत्तों के बीच जाकर रोटी डालना डर की बात है। अवतार ने वह डर किसी से नहीं कहा और उसने अपने फ़ोन की रोशनी लेकर जाना शुरू किया।
एक चीज़ उसने अपनी तरफ़ से जोड़ी। उसने रोटियाँ छह से आठ कर दीं, क्योंकि उसने गिनकर देखा कि कुत्ते नौ हैं और छह में झगड़ा होता है।
केसर को यह मालूम है और उसने इस पर कुछ कहा नहीं।
अब उस गली में साढ़े छह बजे आवाज़ होती है और वह दस मिनट की होती है। केसर ऊपर अपनी चारपाई पर लेटी रहती है और उन दस मिनट में वह कुछ नहीं करती, और आवाज़ बंद होने के बाद वह उठकर अपना खाना लेती है, हर शाम, इसी क्रम में।